प्रणब Indonesia में बढ़ाएगा भारत का मान

मथुरा। कहते हैं यदि हौसले बुलंद हों और कुछ कर गुजरने का जुनून सवार हो तो हर मुश्किल आसान नजर आने लगती है। खेल सिर्फ मनोरंजन ही नहीं एक तरह की तपस्या होते हैं। जो जितना तपता है उतना ही कुंदन बनकर निखरता है। हमारे देश में खेल संस्कृति की जड़ें अभी पूरी तरह से नहीं जम पाई हैं। आर्थिक परेशानी के चलते कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी समय से पहले ही खेलों से नाता तोड़ लेते हैं। भारत काहोनहार धावक प्रणब राय भी इन दिनों मुफलिसी के दौर से गुजर रहा है, उसे देश का मान बढ़ाने के लिए मदद की दरकार है। प्रणब राय एथलेटिक्स में मुल्क को गौरवान्वित करने का न केवल सपना देख रहा है बल्कि इसके लिए दिन-रात मेहनत भी कर रहा है।

पश्चिम बंगाल का उदीयमान धावक प्रणब राय Indonesia में ऐसा कारनामा करने जा रहा है जोकि आज तक कोई भारतीय नहीं कर सका है। जी हां, प्रणब राय इंडोनेशिया में 14 और 15 जुलाई को होने जा रही एशियन ट्रेल मास्टर्स चैम्पिनशिप में 18618 फिट ऊंचाई पर 75 किलोमीटर की दौड़ में हिस्सा लेगा। ऐसा कारनामा करने वाला प्रणब राय भारत का पहला धावक है। खेलों की जहां तक बात है हावड़ा जिले के बगनान गांव में निर्मल कुमार राय-सांतना राय के घर जन्मे प्रणब राय आठ साल की उम्र से ही लम्बी दूरी की दौड़ों में शिरकत कर रहे हैं। यह धावक अब तक 50 किलोमीटर से 161 किलोमीटर की दौड़ों में अनगिनत बार हिस्सा लेकर अपने प्रदेश को गौरवान्वित कर चुका है।

प्रणब राय का कहना है कि सरकारी उपेक्षा और पैसे के अभाव के चलते उसके सामने परेशानियां ही परेशानियां हैं लेकिन मन में विश्वास है कि वह एक न एक दिन लम्बी दूरी की दौड़ों में देश का नाम अवश्य रोशन करेगा। प्रणब के जोश और जुनून को देखते हुए उम्मीद करनी चाहिए कि वह Indonesia में 14 और 15 जुलाई को होने जा रही एशियन ट्रेल मास्टर्स चैम्पिनशिप की कठिन प्रतिस्पर्धा को जरूर पूरी करेगा। प्रणब इस रेस में सफलता हासिल कर दुनिया की सबसे कठिन दौड़ों में से एक यूटीएमबी रेस जोकि फ्रांस, इटली और स्विट्जरलैंड से होकर गुजरती है, उसमें शिरकत करेगा। इस करिश्माई धावक को उम्मीद है कि आने वाली हर परेशानी पर वह अपनी दृढ़-इच्छाशक्ति से फतह हासिल कर विश्व कप में भारत का प्रतिनिधित्व जरूर करेगा।

प्रणब को मदद की दरकार
प्रणब राय की जहां तक बात है वह बहुराष्ट्रीय कम्पनी ई.वाय. (ERNST AND YOUNG) में कार्यरत है। यही कम्पनी इस धावक की स्पांसर और मददगार भी है। Indonesia में होने जा रही एशियन ट्रेल मास्टर्स चैम्पिनशिप की कठिन चुनौती के लिए अब तक प्रणब एक लाख 80 हजार रुपये खर्च कर चुका है। एक गरीब प्रतिभाशाली बच्चे के सपनों को साकार करने के लिए उसके माता-पिता ने यह पैसा लोगों से उधार लिया है। बकौल प्रणब मैं मदद के लिए कई लोगों के सामने हाथ फैला चुका हूं लेकिन सब दूर उसे निराशा ही हाथ लगी है। प्रणब दुखी मन से कहते हैं कि यदि उन्हें सरकारी या औद्योगिक घरानों से मदद मिल जाए तो वह लम्बी दूरी की दौड़ों में देश का मान बढ़ा सकते हैं। मैं शुक्रगुजार हूं ई.वाय. कम्पनी का जिसकी मदद से इंडोनेशिया जाने का सहारा मिला। देश में खेलों को बढ़ावा देने के लिए जरूरी है कि प्रणब राय जैसे गरीब धावकों को आर्थिक मदद मिले। सरकार और औद्योगिक घराने मदद को आगे आएं।

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