चार घंटे RSS के मुख्‍यालय में रहेंगे प्रणब मुखर्जी, शाम 6:30 बजे होगा संबोधन

नागपुर। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी गुरुवार शाम को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ RSS के कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। इससे पहले कांग्रेस समेत देश के राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि आखिर वह क्या बोलेंगे। नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में RSS में तृतीय वर्ष का प्रशिक्षण लेने वाले काडर को प्रणब मुखर्जी शाम 6:30 पर संबोधित करेंगे। तकरीबन 5 दशक से कांग्रेस की राजनीति करने वाले पूर्व राष्ट्रपति का संघ के कार्यक्रम में हिस्सा लेना अप्रत्याशित माना जा रहा है। वह गुरुवार शाम को 5:30 बजे से रात 9:30 बजे तक RSS मुख्यालय में मौजूद रहेंगे।
कार्यक्रम की शुरुआत RSS के भगवा ध्वज को फहराए जाने से होगी। संघ की शब्दावली में इसे ध्वजारोहण कहा जाता है। संघ के इस दीक्षांत समारोह में प्रणब मुखर्जी समेत 4 लोग मंच पर होंगे। इनमें मोहन भागवत और आरएसएस के दो अन्य सीनियर अधिकारी भी शामिल होंगे। प्रणब मुखर्जी करीब आधे की घंटे की स्पीच देंगे। कहा जा रहा है कि वह राष्ट्रीय मुद्दों पर ही बात करेंगे और राजनीतिक मुद्दों से परे रह सकते हैं। उनके बाद आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत का भाषण होगा।
संघ परिसर देखेंगे प्रणब मुखर्जी, डिनर भी कर सकते हैं
संघ मुख्यालय में आरएसएस के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार की याद में बना स्मृति मंदिर भी है। हालांकि अभी यह तय नहीं है कि प्रणब मुखर्जी वहां जाएंगे या नहीं, लेकिन उन्हें संघ मुख्यालय के परिसर को जरूर दिखाया जा सकता है। ऐसा ही दौरा कारोबारी रतन टाटा ने भी किया था। संघ मुख्यालय में प्रणब मुखर्जी का डिनर भी हो सकता है, हालांकि परंपरा के मुताबिक संघ प्रमुख मोहन भागवत कार्यकर्ताओं के साथ ही कॉमन हॉल में भोजन करेंगे। गौरतलब है कि बुधवार रात को भी प्रणब मुखर्जी ने संघ प्रमुख मोहन भागवत और गवर्नर विद्यासागर राव के साथ डिनर किया था।
बेटी ने दी नसीहत, अहमद पटेल ने कहा, ‘यह उम्मीद नहीं थी’
हालांकि इस बीच प्रणब मुखर्जी के नागपुर पहुंचते ही उनकी बेटी समेत कांग्रेस के सीनियर लीडर अहमद पटेल ने उन्हें नसीहत दी है। शर्मिष्ठा ने अपने बीजेपी में शामिल होने की अफवाहों और प्रणब के नागपुर जाने पर ट्वीट कर कहा, ‘नागपुर जाकर आप बीजेपी और आरएसएस को आज जैसी फर्जी स्टोरीज प्लांट करने और अफवाहें फैलाने की खुली छूट देने जा रहे हैं और कहीं न कहीं उन पर यकीन भी कर लिया जाएगा और यह तो सिर्फ शुरुआत है। ‘ उन्होंने कहा, ‘आपके भाषण को भुला दिया जाएगा, बस तस्वीरें याद रहेंगी और उन्हें फर्जी बयानों के साथ फैलाया जाएगा।’ यही नहीं शर्मिष्ठा के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए कांग्रेस के सीनियर लीडर अहमद पटेल ने लिखा कि प्रणब दा आप से यह उम्मीद नहीं थी।
महात्मा गांधी, जेपी और करियप्पा भी गए हैं संघ के कार्यक्रमों में
संघ के कार्यक्रम में जाने वाले प्रणब मुखर्जी अकेले गैर-संघी नहीं हैं। उनसे पहले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, जयप्रकाश नारायण और पूर्व सेना प्रमुख जनरल करियप्पा भी संघ के कार्यक्रमों में हिस्सा लेते रहे हैं। यही नहीं इंदिरा गांधी ने भी संघ के आनुषांगिक संगठन के बुलावे पर विवेकानंद रॉक मेमोरियल का उद्घाटन किया था।
प्रणब ने राष्ट्रपति बनते वक्त की थी विविधता की बात
2012 में शपथ ग्रहण के समय उन्होंने विविधता और सहिष्णुता की बात की थी। दोनों संबोधनों में उन्होंने शिक्षा पर बोला था। 2012 में उन्होंने उन फैक्टर्स पर जोर दिया था जो आधुनिक देश के लिए जरूरी हैं- जैसे लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और समानता। उन्होंने कहा था कि असली विकास वह है जब सबसे गरीब व्यक्ति को महसूस हो कि वह उभरते हुए भारत का हिस्सा है।
राजनीतिक वर्ग का एक हिस्सा कांग्रेस पार्टी से जुड़े रहे प्रणव मुखर्जी के RSS के कार्यक्रम में बतौर चीफ गेस्ट शामिल होने से खुश नहीं है। उसका मानना है कि इससे संघ की कट्टर हिंदुत्व की विचारधारा को मान्यता मिलेगी। वहीं, एक दूसरे वर्ग का कहना है कि राजनीतिक विरोध के बीच ऐसा जुड़ाव लोकतंत्र के लिए जरूरी है, क्योंकि ऐसा नहीं होने पर कई बार राष्ट्रहित को नुकसान पहुंचता है।
-एजेंसी

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