प्रणव मुखर्जी ने आभार जताया, नंबी नारायणन ने कहा कि देश के लिए जो किया वो बेकार नहीं गया

नई दिल्‍ली। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. प्रणव मुखर्जी ने भारत रत्न दिए जाने पर देश के लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया है। प्रणव मुखर्जी ने मीडिया के सामने कहा, ‘मैं भारत के लोगों के प्रति विनम्रता और आभार की भावना के साथ इस महान सम्मान को स्वीकार करता हूं। यह मैंने पहले भी कई बार कहा है और फिर से कह रहा हूं कि मैंने देश के लोगों को जितना दिया है, मुझे उससे कहीं ज्यादा इस महान देश के लोगों से मुझे मिला है।’
पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि सिटीजन मुखर्जी देश के सभी सिटीजन का आभार व्यक्ति करता है। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को भारत रत्न दिए जाने की घोषणा पर खुशी जताते हुए शुक्रवार को कहा कि मुखर्जी ने अपने निस्वार्थ कार्यों से देश की विकास यात्रा में मजबूत छाप छोड़ी है।
वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि उनकी पार्टी को गर्व है कि कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे एक व्यक्ति के योगदान को पहचान और सम्मान दिया गया है। राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा, ‘प्रणव दा, भारत रत्न के लिए बधाई। कांग्रेस पार्टी को गर्व है कि जनसेवा एवं राष्ट्र निर्माण में हमारे एक अपने के असीम योगदान को पहचान और सम्मान मिला है।’
कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने भी खुशी जाहिर करते हुए कहा, ‘यह सरकार का फैसला है। प्रणव दा के रूप में भारत रत्न योग्य व्यक्ति को दिया गया है। अन्य लोगों को भी उनके द्वारा किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए यह सम्मान मिला है। जिन लोगों ने देश की तरक्की और गौरव में योगदान दिया उन्हें देश के द्वारा मान्यता देना एक स्वागतयोग्य संकेत है।’
देश के लिए जो किया, बेकार नहीं गया: वैज्ञानिक नंबी नारायणन

वैज्ञानिक एस. नंबी नारायणन
वैज्ञानिक एस. नंबी नारायणन

तिरुवनंतपुरम। एक समय जासूसी के आरोप झेलने वाले इसरो के रिटायर वैज्ञानिक एस. नंबी नारायणन का नाम शुक्रवार को जारी पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किए जाने वाले व्यक्तियों में था। जासूसी के आरोपों में बेदाग होकर निकले नंबी नारायणन की खुशी का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। नंबी को आरोपों के 24 साल गुजरने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने बीते साल सितंबर में बेदाग घोषित किया और 50 लाख रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया।
उन्होंने कहा, ‘मैं खुश हूं। मुझे जासूसी की भेंट चढ़ाया गया। मेरा नाम उस केस की वजह से ज्यादा सुर्खियों में रहा और एक समय लोगों को मुझसे हमदर्दी होने लगी थी। यह पुरस्कार मुझे अहसास दिलाता है कि मैंने देशसेवा में जो योगदान दिया, वह बेकार नहीं गया।’
क्या था नंबी नारायणन से जुड़ा पूरा मामला?
अक्टूबर 1994 को मालदीव की एक महिला मरियम राशिदा को तिरुवनंतपुरम से गिरफ्तार किया गया था। राशिदा को इसरो के स्वदेशी क्रायोजनिक इंजन की ड्रॉइंग की खुफिया जानकारी पाकिस्तान को बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। तिरुवनंतपुरम में इसरो के टॉप वैज्ञानिक और क्रायोजनिक प्रॉजेक्ट के डायरेक्टर नारायणन समेत दो वैज्ञानिकों डी शशिकुमारन और डेप्युटी डायरेक्टर के चंद्रशेखर को भी अरेस्ट किया गया। मामला कई सालों तक चला।
सीबीआई ने पाया निर्दोष, सुप्रीम कोर्ट ने वापस दिलाया सम्मान
मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई। दिसंबर 1994 में सीबीआई ने अपनी जांच में इंटेलिजेंस ब्यूरो और केरल पुलिस के आरोप सही नहीं पाए। सितंबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने आखिरकार उत्पीड़न का शिकार हुए इसरो वैज्ञानिक नारायणन को 50 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। कोर्ट ने इस मामले में एक जुडिशल जांच का भी आदेश दिया।
-एजेंसियां

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