प्रफुल्ल पटेल ने इकबाल मेमन ‘मिर्ची’ के साथ डील स्‍वीकार की, लेकिन लीगल बताया

मुंबई। एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल ने अपनी फैमिली और ‘मिर्ची’ के नाम से कुख्यात रहे इकबाल मेमन के बीच फाइनैंशल डील पर सफाई दी।
उन्होंने कहा कि इकबाल मेमन के साथ जिस जमीन की डील को लेकर आरोप लग रहे हैं, वह पूरी तरह कानूनी रूप से हुई थी।
उन्होंने जमीन का पूरा इतिहास बताते हुए साफ किया कि किस तरह विवादित जमीन को 1990 में ही बॉम्बे हाई कोर्ट की निगरानी में एक शख्स एम. के. मोहम्मद द्वारा हजरा इकबाल मेमन को बेचा गया था।
उन्होंने कहा कि उसके बाद मेरे पटेल परिवार के कुछ विवाद हुए और इसके बाद इकबाल मेमन के साथ साल 2004 में जमीन को लेकर डील हुई। यह डीड रजिस्ट्रार के सामने हुई। सारे दस्तावेज कलेक्टर के सामने रखे गए। अगर इकबाल मेमन दागी था तो उस वक्त ही प्रशासन इस डील पर रोक लगा देता।
मंगलवार को ईडी ने इस जमीन डील को लेकर प्रफुल्ल पटेल को समन भेजा है और उन्हें 18 अक्टूबर को पेश होने को कहा है।
उन्होंने कहा कि ‘मीडिया में अभी क्या चल रहा है, मैं इस बारे में कुछ नहीं बोलूंगा क्योंकि मुझे अभी पूरे तथ्यों की जानकारी नहीं है। बस मीडिया में एक रिपोर्ट के कुछ अंश आए हैं। हर किसी को अपने हिसाब से उसका अर्थ निकालने का अधिकार है। मैं चुनाव प्रचार में था मगर मीडिया में जो आ रहा था उस पर सफाई देने के लिए मुझे प्रचार बीच में छोड़कर आना पड़ा।’
प्रफुल्ल ने बताया बिल्डिंग का पूरा इतिहास
प्रफुल्ल ने कहा, ‘सीजे हाउस नाम की एक बिल्डिंग है वर्ली में। उस बिल्डिंग के एक हिस्से में थर्ड फ्लोर पर एक शख्स रहता है। मुद्दा यह है कि वह वहां कैसे रह रहा है और सवाल यह है कि क्या उसका मुझसे या मेरे परिवार से संबंध है।’ प्रफुल्ल पटेल ने जमीन के इतिहास के बारे में बताते हुए कहा, ‘इस जमीन को माधवराव जीवाजी राव सिंधिया ने 1963 में कुछ लोगों को बेचा था, जिसमें मेरे परिवार के 21 लोग भी शामिल थे। जहां सीजे हाउस है, वह प्लॉट एफ पर बनी है और 1970 में बनी थी। मेरे पिता के देहांत के बाद कुछ पारिवारिक विवाद हुए और जमीन का मुद्दा कोर्ट में चला गया। 1978 से यह बॉम्बे हाई कोर्ट की निगरानी में थी।’
उन्होंने कहा, ‘बिल्डिंग के पीछे कुछ लोगों ने अवैध इमारतें बना ली थीं। दरअसल वे दो रेस्ट्रॉन्ट थे। जिसका अवैध कब्जा था, उसका नाम एम. के. मोहम्मद था। हाई कोर्ट के रिसीवर ने 21 मार्च 1988 को 7 लाख रुपये सेटलमेंट देने को कहा और कोर्ट ऑर्डर के बाद से वह जमीन उसके पास चली गई। 4 अप्रैल 1990 को उसने कोर्ट की निगरानी में यह जमीन हजरा इकबाल मेमन को बेच दी। यह 1990 तक उस जमीन का इतिहास रहा।’
‘कुछ संदिग्ध रहा होता तो तभी पता चल गया होता’
प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि ‘2004 में जो जमीन की डील हुई, वह भी हाई कोर्ट के आदेश के अनुरूप हुई। हजरा इकबाल मेमन और हमारे बीच जो डीड हुई, वह सारे वैध दस्तावेजों के साथ हुई। इकबाल मेमन को लेकर कुछ भी संदिग्ध होता तो उसी समय पकड़ में आ जाता। इकबाल मेमन की फैमिली आयकर देती थी, 1999 से उसके पास पासपोर्ट था और बिना रोक-टोक के यूएई आता-जाता था। चूंकि हम उस जमीन के टुकड़े के सहमालिक थे इसलिए हम चाहकर भी लैंड डील से इंकार नहीं कर सकते थे। मैंने डील के समय अपने वकीलों से भी इकबाल मेमन के सभी दस्तावेजों की जांच करने को कहा था और उस वक्त ऐसा कुछ भी संदिग्ध सामने नहीं आया।’
यह है प्रफुल्ल पटेल की फैमिली पर आरोप
बता दें कि एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल पर आरोप है कि उनकी फैमिली की ओर से प्रमोटेड कंपनी और ‘मिर्ची’ के नाम से कुख्यात दिवंगत इकबाल मेमन के बीच फाइनैंशल डील हुई थी। पटेल फैमिली की ओर से प्रमोटेड कंपनी मिलेनियम डिवेलपर्स प्राइवेट लिमिटेड और मिर्ची फैमिली के बीच हुए लीगल अग्रीमेंट की ईडी की ओर से जांच की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि इस डील में पटेल फैमिली की कंपनी मिलेनियम डिवेलपर्स को मिर्ची फैमिली की ओर से एक प्लॉट दिया गया था। यह प्लॉट वर्ली में नेहरू प्लैनेटेरियम के सामने प्राइम लोकेशन पर मौजूद है। इसी प्लॉट पर मिलेनियम डिवेलपर्स ने 15 मंजिला कमर्शल और रेजिडेंशल इमारत का निर्माण किया है।
बीजेपी ने पूछा, पटेल फैमिली और दाऊद में क्या संबंध?
इस मामले में बीजेपी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके एनसीपी और कांग्रेस को घेरा।
संबित पात्रा ने कहा कि ‘आज हम टीवी पर देख रहे हैं कि महाराष्ट्र में यूपीए की जो पूर्व सरकार थी और केंद्र में जो यूपीए की सरकार थी, उस समय का बहुत बड़ा खुलासा आज कई चैनल कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर एनसीपी और डी कंपनी के लिंक का खुलासा हुआ है। दाऊद इब्राहिम, जोकि एक आतंकी सरगना है, उसका और एनसीपी का क्या लिंक है?’
-एजेंसियां

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