लखनऊ जिला जेल की बिजली कटी, करोड़ों रुपए का बिल बकाया

लखनऊ। लखनऊ की जिला जेल में करोड़ों रुपये का बिल बकाया होने की वजह से पावर सप्लाई बिजली विभाग ने काट दी। ऐसे में जेल में बंद कैदियों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जिला जेल की बिजली कटने से मंगलवार जेल प्रशासन में खलबली मच गई। सजायाफ्ता और न्यायिक अभिरक्षा के 3600 कैदियों और बंदियों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई। अधिकारियों ने काफी प्रयास किया लेकिन बकाएदारी जमा होने से पहले बिजली विभाग ने सप्लाई चालू करने से इंकार कर दिया।
मोहनलालगंज उपकेंद्र के अधिशासी अभियंता आरएन वर्मा का कहना है कि कई महीने से नोटिस देने के बावजूद बिल जमा नहीं हुआ। मंगलवार को भी देर शाम तक इंतजार करने के बाद सप्लाई बंद की गई है।
अधिशासी अभियंता आर एन वर्मा के मुताबिक जिला जेल के बंदी और आवासीय परिसर की बिजली शाम करीब पांच बजे काट दी गई। उनका कहना है कि दोनों परिसर का एक साल का 1.32 करोड़ रुपये का बिल बकाया है। इसे जमा करने के लिए कई बार नोटिस दी गई, लेकिन जेल प्रशासन ने भुगतान नहीं करवाया। मंगलवार को कर्मचारियों को बकाया रकम वसूलने के लिए जेल भेजा गया लेकिन वहां के अधिकारियों आधी राशि भी नहीं दी। इस पर जेल और आवासीय परिसर की बिजली काट दी गई। हालांकि आदर्श कारागार और नारी बंदी गृह का बिल जमा है इसलिए दोनों भवनों की सप्लाई चल रही है।
कई हाईप्रोफाइल बंदी हैं यहां
जेल अधीक्षक पी एन पाण्डेय ने बताया कि जिला जेल में कुल 3600 बंदी और कैदी रखे गए हैं। इनमें ज्यादातर हाईप्रोफाइल केस में विचाराधीन बंदी शामिल हैं। उनका कहना है कि बिजली की अतिरिक्त व्यवस्था कर ली गई है जबकि सूत्रों का कहना है कि जिला जेल को 667 केवीए और आवासीय परिसर को 334 केवीए लोड का कनेक्शन दिया गया है। जेल प्रशासन के पास इतने लोड की सप्लाई देने की अतिरिक्त व्यवस्था नहीं है। हाई सिक्योरिटी बैरकों के बाहर अतिरिक्त फोर्स तैनात की गई है। छोटे-छोटे जनरेटर लगाकर किसी तरह से उजाले का प्रबंध किया गया है।
जेल के अफसर अगर समय रहते जाग जाते तो अतिसंवेदनशील जेल की सुरक्षा खतरे में नहीं पड़ती। अक्सर देखा जाता है कि सरकारी विभाग ही बिजली के बिल की अनदेखी करते हैं और बिजली विभाग भी तभी सख्ती दिखाता है जब बकाया करोड़ों में पहुंच जाए। ऐसे मामलों में जिम्मेदारों को सख्त नियम बनाने चाहिए ताकि ऐसी लापरवाही पर लगाम लग सके।
-एजेंसियां

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