आलू ने फिर मुश्‍किल में डाला राहुल को, लोग बोले हजम नहीं हुए आलू और चिप्‍स

नई दिल्‍ली। ‘आप चिप्स कै पैकेट उठाएं। आलू का क्या दाम है आज कल? 5 रुपया। चिप्स का पैकेट कितने में बिकता है? उसमें कितना आलू होता है? आधा आलू होता है। उस चिप्स के पैकेट में से किसान को कितना रुपया मिलता है? 50 पैसे, उससे भी कम…’ अरे नहीं, यह हम नहीं कह रहे… यह बात कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कही है।
दरअसल, पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के चलते राहुल गांधी आज मध्यप्रदेश के धार में एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। इस बीच किसानों की समस्याओं पर बात करते हुए उन्होंने आलू और चिप्स का उदाहरण देते हुए किसानों को उनकी उपज के कम दाम मिलने की बात समझाने की कोशिश की लेकिन इस दौरान उन्होंने आलू की जो कीमत बतायी, वह किसी को हजम नहीं हुई। उन्होंने आलू को पांच रुपया और चिप्स के पैकेट में से उन्हें 50 पैसे या उससे कम मिलने की बात कही। उनके इस बयान के बाद एक बार फिर राहुल गांधी सोशल मीडिया पर ट्रोल हो रहे हैं। लोगों ने उनको लेकर तरह-तरह के ट्वीट करने शुरू कर दिए हैं।
आपको ज्ञात ही होगा कि राहुल गांधी ऐसे ही बयानों के लिए अक्सर विरोधियों के निशाने पर आ जाते हैं। हाल ही में उन्होंने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह पर हमला करने की कोशिश की, लेकिन यहां भी उनका बयान विवादों में घिर गया। उन्होंने रमन सरकार की संचार क्रांति योजना को कठघरे में खड़ा कहते हुए कहा ‘ये जो मोबाइल है, ये इन्होंने बीएचईएल से क्यों नहीं खरीदा… भैया बात समझिए, उस तरफ राफेल घोटाला है…इस तरफ सेल फोन घोटाला…’ मजेदार बात तो यह है कि यह बयान देते हुए कांग्रेस अध्यक्ष यह बात भूल गए कि बीएचईएल का पूरा नाम भारत हेवी इलेक्ट्रीकल्स लिमिटेड है। यानी यह सरकारी कंपनी भारी इलेक्ट्रिकल्स सामान बनाती है न कि मोबाइल जैसे उपकरण।
अपने इस बयान के बात राहुल गांधी सोशल मीडिया पर खूब ट्रोल हुए। यही नहीं चुनाव प्रचार के दौरान ही 29 अक्टूबर 2018 को उन्होंने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनके बेटे कार्तिकेय पर घोटालों का आरोप भी लगाया। इसके बाद जब मुख्यमंत्री और उनके बेटे ने मानहानि का मामला दर्ज कराने की बात कही तो राहुल गांधी बैकफुट पर आ गए। आखिरकार मंगलवार 30 अक्टूबर 2018 की सुबह उन्होंने अपने बयान से पलटी मारते हुए कहा कि मध्यप्रदेश और भाजपा शासित राज्यों में इतने घोटाले हुए हैं कि वे कन्फ्यूज हो गए।
-एजेंसियां

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