किसानों को दी जाएगी Tissue culture से तैयार आलू की पनीरी

जालंधर। पंजाब बागवानी विभाग ने आलू की खेती में नयी क्रांति लाते हुए आलू उत्पादक किसानों को आलू के बीज की बजाए अब Tissue culture से तैयार आलू की पनीरी उपलब्ध करवाने की तैयारी की है।

जालंधर के धोगड़ी स्थित आधुनिक केन्द्र ‘पोटैटो सेंटर आफॅ एक्सीलेंस’ में एयरोपोनिक विधि से आधुनिक और बीमारी रहित आलू का बीज तैयार किया जाता है। अब इस केन्द्र ने आधुनिक तकनीक से टिशू कल्चर द्वारा आलू की पनीरी तैयार की जा रही है जो नवंबर माह तक किसानों को उपलब्ध करवा दी जाएगी।

पंजाब में दोआबा क्षेत्र में तैयार आलू तथा आलू के बीज को देश भर के आलू उत्पादकों द्वारा पसंद किया जाता है। जलवायु के लिहाज से दोआबा में तैयार आलू बीज उत्तम गुणवत्ता का होता है जिसकी पूरे देश के आलू किसानों में मांग है।

पंजाब बागवानी विभाग के उपनिदेशक डॉ सतवीर सिंह ने बताया कि धोगड़ी केन्द्र में तैयार पनीरी को किसान एयरोपोनिक विधि या फिर पोली हाउस से आलू का बीज तैयार कर सकता है।

इस प्रकार किसान एक ही पौधे से एयरोपोनिक विधि द्वारा लगभग 50 मिनी टयूवर तैयार कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि पायलट परियोजना के तौर पर आरंभ में किसानों को दो कनाल रकबे के लिए पनीरी दी जाएगी जिससे किसान खुद एयरोपोनिक और पॉली हाऊस विधि द्वारा कई गुणा अधिक तैयार कर सकता है।

डॉ सतवीर सिंह ने बताया कि पंजाब के दोआबा क्षेत्र के जलवायु की खासियत है कि आलू के बीज को तैयार करने के लिए अक्तूबर से दिसंबर माह दौरान इसके पौधे को तेला रोग नहीं लगता। दोआबा क्षेत्र की मिट्टी में ब्रॉन रोट (सड़न) का रोग भी नहीं है जिससे यहां तैयार बीज कई महीनों तक खराब नहीं होता जबकि इसी समय दौरान अन्य जिलों में तैयार हो रहे आलू के बीज को तेला के कीड़े से काफी नुकसान पहुंचता है। इसी खासियत के कारण दोआबा के आलू बीज की देश भर में मांग है।

पोटैटो सेंटर आफॅ एक्सीलेंस के परियोजना अधिकारी डॉ परमजीत सिंह ने बताया कि पंजाब में लगभग 90 हजार हेक्टेयर में आलू की फसल बोयी जाती है। प्रति हेक्टेयर लगभग 200 क्विंटल आलू की उपज होती है। उन्होंने बताया कि पंजाब से लगभग 11 लाख मीट्रिक टन आलू का बीज देश के विभिन्न राज्यों में निर्यात किया जाता है।

उन्होंने बताया कि उनके प्रयास से देश के विभिन्न क्षेत्रों के किसान इस केन्द्र का दौरा कर tissue culture की आधुनिक विधि का अवलोकन कर चुके हैं।

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