Poster प्रतियोगिता में भरे भावनाओं के रंग

Poster प्रतियोगिता में  संस्कृति विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने लिया पृथ्वी बचाने का संकल्प

ऋषि मिश्रा और गुरदीप की जोड़ी को मिला पहला स्थान

मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में छात्र-छात्राओं ने न केवल अपनी भावनाओं के रंग भरे बल्कि पृथ्वी बचाने का संकल्प भी लिया। इस प्रतियोगिता में विभिन्न संकाय के सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।

प्रतियोगिता में डिप्लोमा मैकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्र ऋषि मिश्रा-गुरदीप की जोड़ी को प्रथम, डिप्लोमा इन कम्प्यूटर साइंस के यतेन्द्र फौजदार-पीयूष खण्डेलवाल की जोड़ी को द्वितीय तथा कम्प्यूटर साइंस की नेहा और फैशन डिजाइनिंग की प्रियंका की जोड़ी को तृतीय स्थान मिला।
संस्कृति विश्वविद्यालय में छात्र-छात्राओं को किताबी ज्ञान के साथ ही उनके बौद्धिक विकास को बढ़ावा देने के लिए हमेशा कुछ न कुछ नया किया जाता है। पृथ्वी पर बढ़ते प्रदूषण को लेकर होटल मैनेजमेंट संकाय के प्राध्यापक आलोक प्रसाद, विमलेश सिंह तथा फहीम अख्तर द्वारा विभिन्न संकाय के छात्र-छात्राओं के बीच पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता आयोजित की गई।

इस प्रतियोगिता में सभी संकाय के छात्र-छात्राओं ने कागजों में अपनी भावनाओं के रंग भरे। विजेता-उपविजेता का फैसला करने के लिए निर्णायक मण्डल में शामिल डा. अरविन्द राजपुरोहित, डा. धर्मेन्द्र दुबे और डा. रीना रानी को काफी जद्दोजहद करनी पड़ी। छात्र-छात्राओं ने कागजों में न केवल पृथ्वी पर मड़रा रहे प्रदूषण को उकेरा बल्कि इससे बचाव के उपाय भी सुझाए। निर्णायकों ने काफी कश्मकश के बाद डिप्लोमा मैकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्र ऋषि मिश्रा-गुरदीप की जोड़ी को प्रथम, डिप्लोमा इन कम्प्यूटर साइंस के यतेन्द्र फौजदार-पीयूष खण्डेलवाल की जोड़ी को द्वितीय तथा कम्प्यूटर साइंस की नेहा और फैशन डिजाइनिंग की प्रियंका की जोड़ी को तृतीय स्थान प्रदान किया।

प्रतियोगिता के समापन अवसर पर कुलपति डा. देवेन्द्र पाठक ने विजेता छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए सभी को प्रदूषण मुक्त धरती का संकल्प दिलवाया।

डा. पाठक ने कहा कि लगातार बढ़ता प्रदूषण हर जीव-जंतु के जीवन के लिए चिन्ता की बात है। उप-कुलाधिपति राजेश गुप्ता ने अपने संदेश में विजेता छात्र-छात्राओं को बधाई दी और कहा कि पृथ्वी पर लगातार प्रदूषण बढ़ना खतरे का संकेत है।

श्री गुप्ता ने छात्र-छात्राओं का आह्वान किया कि वे पांच-पांच पौधे लगाकर धरती को न केवल हरा-भरा कर सकते हैं बल्कि इससे प्रदूषण संकट से आसानी से निपटा जा सकता है।