हार्ट संबंधी बीमारियों से होने वाली मौतों को टालना संभव

भारत में दिल की बीमारी से होने वाली मौतों का मुख्य कारण देर से बीमारी का पता चलना है। तमाम मरीज जब तक डॉक्टर के पास पहुंचते हैं, बहुत देर हो चुकी होती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जिन लोगों को हार्ट की बीमारी है, हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज है या परिवार में हार्ट से जुड़ी बीमारी की हिस्ट्री रही है, ऐसे लोग अगर नियमित रूप से चेकअप कराते रहें तो हार्ट से जुड़ी बीमारियों से होने वाली मौतों को टाला जा सकता है।
एम्स के प्रोफेसर डॉ. संदीप सेठ कहते हैं कि हार्ट की बीमारी से मरने वाले मरीजों में 50 फीसदी लोग ऐसे होते हैं जिन्हें बीमारी का पता देर से चलता है। फिर तमाम मरीज ऐसे भी होते हैं जो डॉक्टर की लिखी दवाइयां नहीं लेते। जीवनशैली में बदलाव कर भी इसे रोका जा सकता है, लेकिन लोग ऐसा नहीं करते।
वैसे हार्ट से जुड़ी बीमारियों का शिकार होने का मतलब यह कतई नहीं कि जीवन खत्म हो जाएगा। मरीज दवाइयों और जीवनशैली में सुधार से सामान्य जीवन जी सकते हैं। टीएचएफआर, मेदांता रजिस्ट्री और इंटर-सीएचएफ की रिपोर्ट का हवाला देते हुए डॉ. संदीप मिश्रा कहते हैं कि भारत में हार्ट के मरीजों की औसत उम्र हार्ट के अमेरिकी मरीजों से कम है।
टीएचएफआर की रिपोर्ट के अनुसार यह उम्र 61.2 साल है, मेदांता रजिस्ट्री के अनुसार 58.9 साल और इंटर-सीएचएफ के अनुसार 56 साल।
अमेरिका की ADHERE रजिस्ट्री के अनुसार वहां के हार्ट पेशंट की औसतन उम्र 72.6 साल है। रुमाटॉइड आर्थराइटिस और हाई ब्लड प्रेशर जैसे मूल कारणों का अगर समय से पता चल जाए और इलाज हो जाए तो हार्ट से जुड़ी बीमारियों से होने वाली मौतों की संख्या कम हो सकती है।
जागरुकता जरूरी
भारत में नोवार्टिस के एमडी संजय मुर्डेश्वर कहते हैं कि हार्ट से जुड़ी बीमारी होने से मौत हो सकती है। यह बीमारी लंबे समय तक पीछा करती है। अनुमान है कि दुनिया भर में 2.6 करोड़ और भारत में 80 लाख से 1 करोड़ लोग इस बीमारी से ग्रस्त हैं। भारत में सबसे ज्यादा लोग हार्ट से जुड़ी बीमारियों की वजह से हॉस्पिटल में भर्ती हो रहे हैं। इस बीमारी का मुख्य कारण लोगों में पर्याप्त जागरुकता का न होना है।
हार्ट के मरीज स्वस्थ हों और इस मामले में देश की स्थिति सुधरे इसके लिए अवेयरनेस फैलाना जरूरी है। तकरीबन 60 प्रतिशत हार्ट के मरीजों को इलाज ही नहीं मिलता या गलत इलाज कर दिया जाता है। वक्त रहते इलाज होने से हार्ट रोगियों को हॉस्पिटल से दूर रखा जा सकता है। वे ज्यादा उम्र तक जीवित रह सकते हैं और अधिक अच्छा जीवन व्यतीत कर सकते हैं।
-एजेंसियां

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