समकालीन साहित्य के लोकप्रिय कथाकार स्वयं प्रकाश का निधन

समकालीन कथा साहित्य के लोकप्रिय कथाकार स्वयं प्रकाश जी नहीं रहे। महीने भर की परेशानियों के बाद मुंबई के लीलावती अस्पताल में आज सुबह 7 बजे उनका निधन हो गया।
उन्हें मुख्यत: कथाकार के तौर पर जाना जाता है। 20 जनवरी 1947 को इंदौर में जन्मे स्वयं प्रकाश 5 उपन्यास लिख चुके हैं और उनके 9 कहानी संग्रह भी प्रकाशित हो चुके हैं। उनके लिखे उपन्यासों में जलते जहाज पर, ज्योति रथ के सारथी व उत्तर जीवन कथा आदि शामिल हैं। साहित्यकार स्वयं प्रकाश को प्रेमचंद की परंपरा का महत्वपूर्ण कथाकार माना जाता है।
कहानियां लिखने से पहले स्वयं प्रकाश सस्वर कविता-पाठ किया करते थे। बाद में प्रसिद्ध कथाकार रमेश उपाध्याय के निर्देशन में उन्होंने कहानी लिखना प्रारंभ कर दिया। उनका लेखन जनवादी रहा, उनकी कहानियां दुख साझा करती लगती थीं। उनकी कहानियों से जो रस पढ़ने पर मिलता उससे कहीं अधिक उन्हें सुनने पर मिलता है। स्वयं प्रकाश की कहानियों का अनुवाद रूसी भाषा में भी हो चुका है।
1969 में पहली कहानी लिखने वाले स्वयं प्रकाश इससे पहले कविताएँ लिखते थे और मंचों पर सस्वर काव्य पाठ भी करते थे।
उन्होंने राजस्थान में रहते हुए भीनमाल से अपने मित्र मोहन श्रोत्रिय के साथ लघु पत्रिका ‘क्यों’ का संपादन-प्रकाशन किया तो ‘फीनिक्स’, ‘चौबोली’ और ‘सबका दुश्मन’ जैसे नाटक भी लिखे। उनका प्रसिद्ध उपन्यास ‘बीच में विनय’ भीनमाल के परिवेश पर ही लिखा गया है। इससे पहले वे अपने सैन्य जीवन के अनुभवों पर एक उपन्यास ‘जलते जहाज पर’ लिख चुके थे।
उन्हें राजस्थान साहित्य अकादमी पुरस्कार, विशिष्ट साहित्यकार सम्मान, वनमाली स्मृति पुरस्कार आदि से सम्मानित किया जा चुका है। उनके जाने से साहित्य जगत को अपूरणीय क्षति पहुंची है।
-Legend News

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