राजनीतिक दलों को RSS से सीख लेनी चाहिए: अमर सिंह

लखनऊ। राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ (RSS) के कार्यक्रम में पूर्व राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी के भाषण पर देशभर में छिड़ी बहस के बीच समाजवादी पार्टी से निष्‍कासित चल रहे राज्‍यसभा सांसद अ‍मर सिंह ने खुलकर संघ का समर्थन किया है। अमर सिंह ने कहा कि RSS अवसरवादी राजनीति में विश्‍वास नहीं करता है और सभी राजनीतिक दलों को उससे सबक लेना चाहिए।
अमर सिंह ने ट्विटर पर एक वीडियो संदेश जारी कर कहा, ‘मैंने अपना सारा जीवन समाजवादी पार्टी को दे दिया लेकिन एसपी की 25वीं सालगिरह मनाई गई तो स्‍वयं मुलायम सिंह ने कहा कि आपका योगदान तो बहुत है लेकिन आपके आने से अखिलेश नाराज हो जाएगा। मैं बहुत दुख के साथ आपको सलाह देता हूं कि आप लखनऊ के कार्यक्रम में न आएं।’
उन्‍होंने कहा, ‘चंद दिनों की पहचान में मैंने पाया कि RSS को बदनाम किया जाता है। RSS के शीर्ष पदाधिकारी ने मेरा बहुत सम्‍मान किया। मुझे मुख्‍य अतिथि के रूप में बुलाया और सम्‍मानित किया। पूर्व राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी संघ की यह विशिष्‍टता देखी होगी कि संघ किसी को अपनाता नहीं है।’
अमर सिंह ने कहा, ‘मैं RSS के प्रति अपना आभार प्रकट करना चाहूंगा और मैं यह महसूस करता हूं कि वे अवसरवाद की राजनीति में विश्‍वास नहीं करते हैं। अन्‍य राजनीतिक दलों को उनसे सबक सीखना चाहिए।’ बता दें, कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के संबोधन के बाद पहले असहज महसूस कर रहे कांग्रेस के नेता अब प्रणब के संबोधन के सहारे बीजेपी और RSS पर निशाना साध रहे हैं।
इस क्रम में पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने संघ के कार्यक्रम में गुरुवार को कांग्रेस की विचारधारा को आगे रखने के लिए पूर्व राष्ट्रपति की सराहना की। बता दें, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने अपने बहुप्रतिक्षित भाषण में राष्ट्रवाद पर एक लंबा आख्यान दिया। प्रणब मुखर्जी ने अपने संबोधन की शुरुआत में ही स्पष्ट कर दिया कि वह नेशन (देश), नेशनलिज्म (राष्ट्रवाद) और पैट्रियॉटिज्म (देशभक्ति) पर बात करने आए हैं।
मुखर्जी ने कहा कि राष्ट्रवाद किसी धर्म या भाषा में नहीं बंटा है। उन्‍होंने कहा कि धर्म, मतभेद और असिहष्णुता से भारत को परिभाषित करने का हर प्रयास देश को कमजोर बनाएगा। पूर्व राष्‍ट्रपति ने कहा कि असहिष्णुता भारतीय पहचान को कमजोर बनाएगी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय पहचान और भारतीय राष्ट्रवाद सार्वभौमिकता और सह-अस्तित्व से पैदा हुआ है।
-एजेंसी

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