सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में होने वाली मौतों पर पुलिस FIR जरूर दर्ज़ करे

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सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में होने वाली मौतों पर पुलिस FIR जरूर दर्ज़ करे

नई दिल्‍ली। सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ के दौरान होने वाली मौतों पर पुलिस द्वारा FIR दर्ज करने को जरूरी बताया है. जस्टिस मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली बेंच का यह आदेश मणिपुर में गैर-न्यायिक हत्या से जुड़ी एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए आया है.

सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ के दौरान होने वाली मौतों पर पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज करने को जरूरी बताया है. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक बुधवार को जस्टिस मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली बेंच ने एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया. इस याचिका में मणिपुर में वर्ष 2000 से 2012 के बीच गैर-न्यायिक हत्या के 1,528 मामलों की जांच कराने और मुआवजा दिलाने की मांग की गई है.

बीते हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से मणिपुर में गैर-न्यायिक हत्या के 265 मामलों में से सुरक्षा बलों से जुड़े मामलों को अलग करने का निर्देश दिया था. शीर्ष अदालत ने कहा था कि वह जांच आयोग, न्यायिक जांच या हाईकोर्ट, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और लिखित शिकायतों के वर्ग में सूचीबद्ध मामलों की सुनवाई सबसे पहले करेगा. इनमें गैर-न्यायिक हत्या के 35 मामले जांच आयोग, 37 मामले न्यायिक जांच या हाईकोर्ट, 23 मामले राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और 170 मामले लिखित शिकायतों के वर्ग में हैं. शीर्ष अदालत ने इस मामले की सुनवाई के लिए 18 अप्रैल की तारीख तय की थी. हालांकि, सभी पक्षों को अतिरिक्त दस्तावेजों को 15 अप्रैल तक जमा कराने का समय दिया था.

सुप्रीम कोर्ट ने बीते साल जुलाई में मणिपुर में पुलिस और सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ से जुड़े मौत के सभी मामलों की जांच का आदेश दिया था. शीर्ष अदालत ने कहा था कि सुरक्षाबल विशेषाधिकार कानून के तहत ‘उपद्रव वाले इलाकों’ में सुरक्षा बलों या पुलिस को जरूरत से ज्यादा ताकत इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दी जा सकती. कोर्ट ने केंद्र की उस दलील को भी नहीं माना था कि फर्जी मुठभेड़ों को रोकने के लिए सेना के मानवाधिकार डिवीजन ने जांच कराई है, इसलिए स्वतंत्र जांच की जरूरत नहीं है.
-एजेंसी

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