इमरान के सामने मलेशिया के पीएम बोले, भारत के साथ हमारा विवाद जल्द खत्‍म होगा

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान मलेशिया के दो दिवसीय दौरे पर हैं. मंगलवार को मलेशियाई पीएम महातिर मोहम्मद और इमरान ख़ान ने मुलाक़ात के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस प्रेस कॉन्फ़्रेंस में दोनों नेताओं ने आपसी सहयोग के बारे में बताया और पत्रकारों के सवालों का जवाब भी दिया.
एक पत्रकार ने इमरान ख़ान से पूछा कि क्या वो मलेशिया से पाम तेल की ख़रीदारी बढ़ाएंगे? इस सवाल के जवाब में इमरान ख़ान ने कहा, ”मलेशिया ने कश्मीर में पाकिस्तान का समर्थन किया तो भारत ने धमकी दी और पाम तेल की ख़रीदारी बंद कर दी. हम मलेशिया से पाम तेल का आयात बढ़ाएंगे ताकि मलेशिया को कम से कम नुक़सान हो.”
इमरान ख़ान ने भारत की धमकी की बात कही तो महातिर मोहम्मद मुस्कुराने लगे. पाकिस्तानी पीएम ने मलेशिया में आयोजित इस्लामिक समिट में नहीं आने को लेकर भी इस प्रेस कॉन्फ़्रेंस में सफ़ाई दी.
इमरान ख़ान 19 दिसंबर को कुआलालंपुर में आयोजित इस्लामिक समिट में सऊदी अरब के कहने पर नहीं गए थे. हालांकि इमरान ख़ान ने इस समिट में आने के लिए आमंत्रण स्वीकार कर लिया था.
मंगलवार की प्रेस कॉन्फ़्रेंस में इमरान ख़ान ने महातिर मोहम्मद के सामने कहा कि उन्हें इस समिट में नहीं आने का दुख है. पीएम ख़ान ने कहा, ”मलेशिया के साथ हमारे रिश्ते और मज़बूत हुए हैं. हम कई मुद्दों पर बात कर रहे हैं.’
प्रेस कॉन्फ़्रेंस में महातिर मोहम्मद ने कहा कि मलेशिया पाकिस्तान में ऑटोमोटिव प्लांट लगा रहा है और इसमें कारें बनेंगी. उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग बिज़नेस में भी मलेशिया पाकिस्तान में निवेश करेगा.
क्या पाकिस्तान मलेशिया से पाम तेल की ख़रीदारी बढ़ाएगा? इस सवाल के जवाब में पहले महातिर मोहम्मद ने कहा, ”हमने इसे लेकर आपस में बात की है. मुझे लगता है कि पाकिस्तान इस बात के लिए तैयार है कि वो पाम तेल की ख़रीदारी बढ़ाएगा.”
महातिर की टिप्पणी पर इमरान ख़ान ने कहा, ”बिल्कुल, हम मलेशिया से पाम तेल और ख़रीदेंगे. ख़ास करके तब और जब कश्मीर को लेकर मलेशिया ने समर्थन किया और पाम तेल के आयात को लेकर भारत ने धमकी दी. पाकिस्तान भारत से हो रही क्षतिपूर्ति का नुक़सान करेगा.”
इमरान ख़ान से एक पत्रकार ने पूछा कि क्या वो अगले साल कुआलालंपुर समिट में आएंगे? इसके जवाब में इमरान ने कहा, ”हां, क्यों नहीं. ज़रूर आऊंगा. इस समिट को लेकर कहा जा रहा था कि मुस्लिम दुनिया में विभाजन बढ़ेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ. बल्कि एकता बढ़ी है. इस बार इसलिए नहीं आया क्योंकि कुछ दोस्तों को लग रहा था कि इससे मुस्लिम दुनिया और बँट जाएगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.”
भारत को लेकर क्‍या कहा
इस बीच मलेशिया ने मंगलवार को कहा कि भारत से उसका विवाद जल्द ही ख़त्म हो जाएगा. मलेशिया ने कहा कि भारत ने पाम तेल के आयात में भले कटौती की है लेकिन आने वाले दिनों में दोनों देश पूरे विवाद को मैत्रीपूर्ण ढंग से सुलझा लेंगे. पिछले महीने भारत ने अपने कारोबारियों से कहा था कि वो मलेशिया से पाम तेल का आयात बंद कर दें.
मलेशिया ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा ख़त्म करने और नागरिकता संशोधन क़ानून का विरोध करते हुए भारत की आलोचना की थी. इसी के जवाब में भारत ने मलेशिया से पाम तेल के आयात को रोक दिया था.
मलेशिया के प्राथमिक उद्योग मंत्री टेरेसा कोक के हवाले से मलेशियाई पाम ऑइल काउंसिल ने कहा है, ”दोनों देशों के बीच लंबे समय से मज़बूत द्विपक्षीय संबंध रहे हैं. अभी कुछ चुनौतियां हैं लेकिन दोनों देश पारस्परिक सहयोग और द्विपक्षीय हितों को देखते हुए जल्द समाधान खोज लेंगे.”
इमरान ख़ान के मलेशिया पहुंचने पर प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद उनके स्वागत में कुआलालंपुर अंतरर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर खड़े थे. सोमवार को इमरान ख़ान कुआलालंपुर पहुंचे हैं.
मलेशिया का पाम तेल और भारत
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार मार्च महीने के लिए भारत में पाम तेल की डिलीवरी का कॉन्ट्रैक्ट गिरकर 0.9 फ़ीसदी पर आ गया है. भारत की सरकार ने ट्रेडर्स को अनौपचारिक रूप से आदेश दिया था कि वे मलेशिया के पाम तेल की ख़रीदारी से दूर रहें. भारतीय कारोबारी अब मलेशिया के बदले इंडोनेशिया से प्रति टन 10 डॉलर ज़्यादा की क़ीमत पर पाम तेल ख़रीद रहे हैं.
भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि पाम तेल की ख़रीदारी किसी ख़ास देश से नहीं जोड़ा जा सकता. विदेश मंत्रालय ने कहा था कि किसी भी तरह का कारोबार दोनों देशों के संबंधो पर निर्भर करता है और इसी आधार पर व्यापारिक रिश्ते भी बनते हैं.
2019 में मलेशिया के पाम तेल का भारत सबसे बड़ा ख़रीदार था. 2019 में भारत ने मलेशिया से 40.4 लाख टन पाम तेल ख़रीदा था. भारतीय कारोबारियों का कहना है कि अगर दोनों देशों में रिश्ते ठीक नहीं हुए तो 2020 में मलेशिया से भारत का पाम तेल आयात 10 लाख टन से भी नीचे आ जाएगा.
मलेशिया के अधिकारियों का कहना है कि भारत के इस रुख़ से मलेशिया को भारी नुक़सान होगा. मलेशिया इस नुक़सान की भरपाई पाकिस्तान, फ़िलीपीन्स, म्यांमार, वियतनाम, इथियोपिया, सऊदी अरब, मिस्र, अल्जीरिया और जॉर्डन से करने की कोशिश कर रहा है.
लेकिन कहा जा रहा है कि शीर्ष आयातक के हटने से उसकी भरपाई आसान नहीं है. ऐसे में मलेशियाई ट्रेड यूनियन कांग्रेस, जिसमें पाम वर्कर्स भी शामिल हैं, ने आग्रह किया है कि भारत से बातचीत कर मामले को सुलझाया जाए.
मलेशियाई ट्रेड यूनियन कांग्रेस ने अपने बयान में कहा है, ”हम दोनों सरकारों से आग्रह करते हैं कि निजी और डिप्लोमैटिक अहम को किनारे रख कोई समाधान निकालें.”
मलेशिया के प्राथमिक उद्योग मंत्रालय जो कि विदेश मंत्रालय के अधीन काम करता है, ने कहा है कि मसले को सुलझाने के लिए भारत से बात करने की कोशिश हो रही है.
महातिर मोहम्मद 1981 से 2003 तक मलेशिया के प्रधानमंत्री रह चुके हैं और 2018 में वो एक बार फिर से पीएम चुने गए. दोबारा चुने जाने के बाद पाकिस्तान और मलेशिया क़रीब आए हैं.
मलेशिया अब कोशिश कर रहा है कि भारत में पाम तेल की ख़रीदारी कम होने के बाद अब वो इसकी भरपाई पाकिस्तान से करे. मलेशिया की प्राथमिक उद्योग मंत्री टेरेसा कोक ने रविवार को कहा था, ”पाकिस्तान हमारे पाम तेल का नियमित ख़रीदार है और वो हम पर निर्भर है.”
कोक ने पाकिस्तान के आधिकारिक दौरे पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के वाणिज्य, टेक्स्टाइल, इंडस्ट्री, उत्पादन और निवेश सलाहकार अब्दुल रज़ाक़ दाऊद से भी मुलाक़ात की थी.
-BBC

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