पीएम मोदी ने नई शिक्षा नीति को लेकर हर उलझन पर स्थिति स्पष्ट की

नई दिल्‍ली। पीएम ने अपने संबोधन में नई शिक्षा नीति को लेकर हर बड़ी उलझन पर स्थिति स्पष्ट की, वो उलझन चाहे छात्रों के माता-पिता के मन में हो या शिक्षकों के दिल में या फिर शिक्षाविदों के दिमाग में।
पीएम मोदी ने नई शिक्षा नीति की दरकार, इसमें 5+3+3+4 के नए सिस्टम से लेकर छात्रों को कोर्स में एंट्री-एग्जिट की छूट देने जैसे विषय पर उठ रहे सवालों के साफ-सुथरे जवाब दिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 21वीं सदी के भारत की नींव तैयार करने वाली है। उन्होंने NEP पर कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए नई शिक्षा नीति का औचित्य बताया और कहा कि हर देश खुद को भविष्य की मांग के अनुरूप तैयार करता है और इस तैयारी में वहां के एजुकेशन सिस्टम की बड़ी भूमिका होती है। पीएम ने नई शिक्षा नीति को लेकर माता-पिता से लेकर शिक्षकों तक के मन में उठ रहे सवालों के जवाब दिए।
1. नई शिक्षा नीति की जरूरत क्यों?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि नई शिक्षा नीति (NEP) देश की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक वैश्विक मूल्यों पर खरा उतारने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि हमारा एजुकेशन सिस्टम वर्षों से पुराने ढर्रे पर चल रहा था जिसके कारण नई सोच, नई ऊर्जा को बढ़ावा नहीं मिल सका।
पीएम ने कहा, ‘हमारे एजुकेशन सिस्टम में लंबे समय से बड़े बदलाव नहीं हुए थे। परिणाम यह हुआ कि हमारे समाज में उत्सुकता और कल्पना के मूल्यों को बढ़ावा देने के बजाय भेड़चाल को ही प्रोत्साहन मिलने लगा। कभी डॉक्टर, कभी वकील, कभी इंजिनियर बनाने की होड़ लगी। दिलचस्पी, क्षमता और मांग की मैपिंग के बिना इस होड़ से छात्रों को बाहर निकालना जरूरी था।’
2. 5वीं कक्षा तक मातृभाषा में पढ़ाई क्यों?
आखिर बच्चों को पांचवीं तक उनकी मातृभाषा में ही शिक्षा देने की सिफारिश नई शिक्षा नीति में क्यों की गई?
प्रधानमंत्री ने इसकी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि बच्चे अगर मातृभाषा पढ़ें तो उनमें सीखने की गति तेज हो जाती है। मोदी ने कहा, ‘इस बात में कोई विवाद नहीं है कि बच्चों के घर की बोली और स्कूल में पढ़ाई की भाषा एक ही होने से बच्चों के सीखने की गति बेहतर होती है। यह एक बहुत बड़ी वजह है, जिसकी वजह से जहां तक संभव हो पांचवीं क्लास तक बच्चों को उनकी मातृभाषा में पढ़ाने पर सहमति दी गई है। इससे बच्चों की नींव तो मजबूत होगी है, उनके आगे की पढ़ाई के लिए भी उनका बेस और मजबूत होगा।’
3. 10+2 को हटकार 5+3+3+4 सिस्टम क्यों?
प्रधानमंत्री ने कहा कि अब बच्चों को सीखने के लिए इन्क्वायरी बेस्ड, डिस्कवरी बेस्ड, डिस्कशन बेस्ड और अनैलसिस बेस्ड तरीकों से पढ़ाई के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने कहा कि इससे बच्चों में सीखने की ललक बढ़ेगी और उनके क्लास में उनका भागीदारी भी बढ़ेगी।
मोदी ने कहा, ‘आज मुझे संतोष है कि भारत की नेशनल एजुकेशन पॉलिसी को बनाते समय इन सवालों पर गंभीरता से काम किया गया। बदलते समय के साथ एक नई विश्व व्यवस्था खड़ी हो रही है। एक नया ग्लोबल स्टैंडर्ड भी तय हो रहा है।’ उन्होंने कहा कि इसके हिसाब से भारत का एजुकेशन सिस्टम खुद में बदलाव करे, ये भी किया जाना बहुत जरूरी था। मोदी ने कहा, ‘स्कूली पाठ्यक्रम के 10+2 स्ट्रक्चर से आगे बढ़कर अब 5+3+3+4 पाठ्यक्रम का स्ट्रक्चर देना, इसी दिशा में एक कदम है।’
4. किसी कोर्स में एंट्री-एग्जिट की इतनी छूट क्यों?
पीएम ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जो किसी भी स्टूडेंट को उसके जुनून के मुताबिक लक्ष्य प्राप्ति की राह में बाधक न बनकर उसका मददगार बने। उन्होंने कहा, ‘हर विद्यार्थी को यह अवसर मिलना ही चाहिए कि वो अपने पैशन फॉलो करे। वो अपनी सुविधा और जरूरत के हिसाब से कोई डिग्री ले सके या कोर्स कर सके और अगर उसका मन करे तो वो छोड़ भी सके।’ उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा को स्ट्रीम्स से मुक्त करने, मल्टिपल एंट्री और एग्जिट, क्रेडिट बैंक के पीछे यही सोच है। पीएम ने कहा, ‘हम उस कालखंड की तरफ बढ़ रहे हैं जहां कोई व्यक्ति जीवन भर किसी एक प्रोफेशन में ही नहीं टिका रहेगा। इसके लिए उसे निरंतर खुद को रीस्किल और अपस्किल करते रहना होगा।’
5. नई शिक्षा नीति से क्या हासिल होगा?
पीएम ने कहा कि जमाना क्या सोचना है से कैसे सोचना है कि तरफ बढ़ गया है। मोदी ने कहा, ‘अभी तक हमारी शिक्षा व्यवस्था में ‘वट टु थिंक’ पर फोकस रहा है जबकि इस शिक्षा नीति में ‘हाउ टु थिंक’ पर बल दिया जा रहा है। आज सूचनाओं की बाढ़ है। हर जानकारी मोबाइल पर भरी पड़ी है। ऐसे में यह जरूरी है कि कौन सी जानकारी हासिल करनी है और क्या पढ़ना है।’
उन्होंने कहा, ‘हमारे स्टूडेंट्स में, हमारे युवाओं में क्रिटिकल और इनोवेटिव एबिलटी विकसित कैसे हो सकती है, जब तक हमारी शिक्षा में पैशन ना हो,फिलॉसफी ऑफ एजुकेशन ना हो, पर्पज ऑफ एजुकेशन ना हो। उन्होंने कहा, ‘हर देश, अपनी शिक्षा व्यवस्था को अपनी राष्ट्रीय मूल्यों के साथ जोड़ते हुए, अपने राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुसार सुधारत करते हुए चलता है। मकसद ये होता है कि देश का शिक्षा तंत्र अपनी वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को फ्यचर रेडी रखे, फ्यूचर रेडी करे। भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति का आधार भी यही सोच है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 21वीं सदी के भारत की, नए भारत की नींव तैयार करने वाली है।’
6. कैसे लागू कर पाएंगे इतने बड़े बदलाव?
प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ लोगों के मन में ये सवाल आना स्वभाविक है कि इतना बड़ा रिफॉर्म कागजों पर तो कर दिया गया, लेकिन इसे जमीन पर कैसे उतारा जाएगा। यानी अब सबकी निगाहें इसे लागू करने की तरफ हैं। उन्होंने कॉन्क्लेव में उपस्थित शैक्षिक संस्थानों के प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों आदि से कहा, ‘आप सभी राष्ट्रीय शिक्षा नीति के इंप्लेमेंटेशन से सीधे तौर पर जुड़े हैं और इसलिए आपकी भूमिका बहुत ज्यादा अहम है। जहां तक राजनीतिक इच्छाशक्ति की बात है, मैं पूरी तरह प्रतिबद्ध हूं, मैं पूरी तरह से आपके साथ हूं। जितनी ज्यादा जानकारी स्पष्ट होगी, फिर उतना ही आसान इस राष्ट्रीय शिक्षा नीति का इंप्लेमेंटेशन भी होगा।’
7. नई शिक्षा नीति का शिक्षकों के जीवन पर क्या असर?
एक प्रयास ये भी है कि भारत का जो टैलेंट है, वो भारत में ही रहकर आने वाली पीढ़ियों का विकास करे। उन्होंने कहा, ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति में टीचर पर बहुत जोर है, वो अपनी स्किल्स लगातार अपडेट करते रहें, इस पर बहुत जोर है। शिक्षा व्यवस्था में बदलाव, देश को अच्छे स्टूडेंट्स, अच्छे प्रोफेशनल्स और उत्तम नागरिक देने का बहुत बड़ा माध्यम आप सभी शिक्षक ही हैं, प्रोफेसर ही हैं इसलिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति में शिक्षकों की प्रतिष्ठा का भी विशेष ध्यान रखा गया है।’
-एजेंसियां

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