शी चिनफिंग के स्‍वागत को चेन्नै पहुंचे पीएम मोदी, ममल्लापुरम में शिखर बैठक

चेन्नै। भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव और कश्मीर पर चीन के लगातार विरोधाभासी बयानों के बीच चेन्नै के नजदीक ममल्लापुरम में होने जा रही मोदी-शी शिखर बैठक काफी अहम है। पीएम मोदी सुबह सवा 11 बजे चेन्नै पहुंच गए जहां वह शी चिनफिंग का स्वागत करेंगे। शी दोपहर करीब 2 बजे चेन्नै उतरेंगे। वहां से शाम करीब 5:30 बजे दोनों नेता ममल्लापुरम जाएंगे। वुहान के बाद दूसरी इनफॉर्मल समिट के अजेंडे में व्यापार, आसियान देशों के साथ प्रस्तावित फ्री ट्रेड, सीमा विवाद और 5 जी का मुद्दा प्रमुख होगा।
कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है लिहाजा पीएम मोदी इसकी चर्चा नहीं करेंगे। अगर शी चिनफिंग इसे छेड़ते हैं तो भारत उन्हें पक्ष से वाकिफ कराएगा।
तमिलनाडु के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित, मुख्यमंत्री ई. पलनिसामी, डेप्युटी सीएम ओ. पन्नीरसेल्वम ने चेन्नै उतरने पर प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया। पीएम मोदी ने उम्मीद जताई है कि इनफॉर्मल समिट से भारत और चीन के रिश्ते को और ज्यादा मजबूती मिलेगी। उन्होंने लिखा, ‘चेन्नै में उतर चुका हूं। तमिलनाडु की महान भूमि पर आकर खुश हूं, जो अपनी अद्भुत संस्कृति और मेहमाननवाजी के लिए जानी जाती है। खुशी की बात है कि तमिलनाडु प्रेसीडेंट शी चिनफिंग की मेजबानी करेगा। इस अनौपचारिक शिखर बैठक से भारत और चीन के रिश्ते और मजबूत होंगे, ऐसी कामना है।’
इनफॉर्मल समिट के अजेंडे में क्या-क्या
मोदी-शी शिखर बैठक अनौपचारिक है, लिहाजा किसी समझौते पर दस्तखत नहीं होंगे लेकिन दोनों देश उस दिशा में आगे जरूर बढ़ेंगे। उम्मीद की जा रही है कि मोदी और शी आपसी विश्वास बढ़ाने वाले कुछ कदमों का ऐलान कर सकते हैं। अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर के बीच पीएम मोदी चीनी राष्ट्रपति को व्यापार में कुछ छूट की पेशकश कर प्रभावित करने की कोशिश कर सकते हैं। इसके अलावा वह चीन के साथ व्यापार घाटे के मुद्दे को प्रमुखता से उठा सकते हैं।
अप्रैल 2018 में वुहान समिट के दौरान पीएम मोदी ने चीन से कहा था कि वह भारत से चीनी और चावल का आयात करे। इसके बाद से उसने इन दोनों का भारत से आयात शुरू भी कर चुका है। चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा घटा तो है लेकिन व्यापार संतुलन के लिए अभी और भी बहुत कुछ करने की जरूरत है। 2017-18 में चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 60 अरब डॉलर था जो 2018-19 में घटकर 53 अरब डॉलर पर पहुंचा है। भारत का कपड़ा और स्टील उद्योग इस बात को लेकर डरा हुआ है कि बहुत ज्यादा आयात से उनके बिजनस को नुकसान पहुंचेगा। दूसरी तरफ भारत की फार्मा इंडस्ट्री को उम्मीद है कि उसे चीनी बाजार में और ज्यादा पहुंच मिलेगी।
रिजनल कॉम्प्रिहेंसिव इकनॉमिक पार्टरशिप (RCEP)
RCEP एक प्रस्तावित मेगा फ्री ट्रेड अग्रीमेंट है जिस पर 10 ASEAN देशों और चीन, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया व न्यू जीलैंड के बीच बातचीत चल रही है। अमेरिका के साथ ट्रेड वॉर के बीच चीन चाहता है कि जल्द से जल्द RCEP को अंतिम रूप दिया जाए। उम्मीद की जा रही है कि नवंबर तक इस दिशा में कुछ ठोस प्रगति दिखने लगेगी।
खास बात यह है कि शुक्रवार को ही कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल RCEP पर बातचीत के लिए बैंकॉक के लिए रवाना होंगे। RCEP के कम से कम 11 सदस्य देशों के साथ भारत का व्यापार घाटा (निर्यात से ज्यादा आयात) है, जो नई दिल्ली की चिंताओं में शामिल है। मोदी-शी समिट में RCEP का मुद्दा भी काफी अहम रहने वाला है।
सीमा विवाद
मोदी-शी अनौपचारिक शिखर बैठक में दोनों देशों के बीच सीमा विवाद पर भी चर्चा होगी। एनएसए अजीत डोभाल और चीन के विशेष प्रतिनिधि यांग जीचे के बीच दोनों देशों के बीच सीमा विवाद पर बातचीत हो सकती है। चीन ने लद्दाख को केंद्रशासित प्रदेश बनाने का विरोध किया है। इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश पर भी वह दावा करता रहा है। खास बात यह है कि इंडियन आर्मी फिलहाल अरुणाचल प्रदेश में ही सैन्य अभ्यास हिम विजय कर रही है।
अन्य मुद्दे
दोनों शीर्ष नेताओं की बातचीत में 5 G का मुद्दा भी शामिल है। खास बात यह है कि भारत ने चीनी कंपनी हुवावे को 5G नेवटर्क के डेमो के लिए मंजूरी दे दी है। ध्यान देने वाली बात यह है कि अमेरिका ने हुवावे के 5 जी को प्रतिबंधित कर दिया है। अमेरिका नहीं चाहता कि भारत हुवावे को 5 जी ट्रायल की मंजूरी दे। लिहाजा चिनफिंग का जोर 5 G मुद्दे पर जरूर रहेगा। इसके अलावा अमेरिका-जापान-ऑस्ट्रेलिया-भारत के बीच समुद्री सुरक्षा पर साझेदारी को लेकर चीन अपनी चिंताओं से भारत को वाकिफ करा सकता है।
जहां तक कश्मीर मुद्दे का बात है तो भारत अपने आंतरिक मुद्दे को चीन के साथ शायद ही उठाए। ध्यान देने वाली बात यह है कि चीन ने कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने का विरोध किया था और भारत से वह इस मुद्दे पर सहमत नहीं है। चीन की राय को भारत ने पूरी तरह से खारिज किया है। हालांकि दोनों देशों के बीच समिट में यह मुद्दा उभरता है तो फिर समिट में ही गतिरोध पैदा होने की आशंका है।
-एजेंसियां

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