दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर BHUTAN पहुंचे मोदी, भव्‍य स्‍वागत

पारो (भूटान)। पीएम नरेंद्र मोदी दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर BHUTAN पहुंच गए हैं। पीएम मोदी अपनी इस यात्रा के दौरान BHUTAN के नेताओं से दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करने के लिए बातचीत करेंगे। पीएम मोदी की दूसरे कार्यकाल में यह पहली BHUTAN यात्रा है। BHUTAN के पीएम डॉ. लोटे शेरिंग ने पीएम मोदी की हवाईअड्डे पर अगवानी की। इसके बाद पीएम मोदी का काफिला जिस रास्ते से होकर गुजरा, BHUTAN के लोगों ने दोनों देशों के झंडे लेकर पारंपरिक अंदाज में उनका वेलकम किया।

इससे पहले हवाईअड्डे पर पीएम मोदी को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। पीएम मोदी के दौरे के दौरान भारत के करीबी दोस्त BHUTAN के साथ कई समझौतों पर हस्ताक्षर होंगे। दौरे पर रवाना होने से पहले पीएम मोदी ने ‘नेबर फर्स्ट’ के तहत BHUTAN और भारत के रिश्तों को महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। पीएम मोदी आपसी हितों से जुड़े विविध विषयों पर व्यापक चर्चा भी करेंगे। यात्रा के दौरान मोदी द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं पर BHUTAN नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक और अपने भूटानी समकक्ष से बातचीत करेंगे। प्रधानमंत्री प्रतिष्ठित रॉयल यूनिवर्सिटी ऑफ BHUTAN में युवा छात्रों को भी संबोधित करेंगे।
भारत और BHUTAN समय की कसौटी पर खरे और विशेष संबंधों को साझा करते हैं और दोनों देश साझी सांस्कृतिक धरोहर और लोगों के बीच संपर्क के साथ आपसी समझ और सम्मान का भाव रखते हैं। दोनों देश आर्थिक और विकास सहयोग सहित द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने पर चर्चा करेंगे। इसमें पनबिजली क्षेत्र में सहयोग सहित दोनों देशों के लोगों के बीच सम्पर्क को बढ़ाने का विषय भी शामिल हो सकता है।
समझें भूटान से रिश्तों की अहमियत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी BHUTAN की अपनी दूसरी यात्रा पर पहुंचे हैं। थिम्पू के साइज और दुनिया में भूटान के कद को लेकर हो सकता है कुछ लोगों को आश्चर्य हो पर BHUTAN के लिए BHUTAN से मित्रता का सामरिक महत्व भी है।
1. रणनीतिक बफर
नेपाल ने हाल के वर्षों में भारत और चीन दोनों देशों के साथ अपने संबंधों को संतुलित करने की कोशिश की है। ऐसे में भारत निश्चित रूप से चाहेगा कि हिमालयी क्षेत्र में उसका प्रभाव पूरी तरह से खत्म न हो। भारत पर निर्भरता होने के बाद भी नेपाल 2017 में चीन के ‘वन बेल्ट वन रोड’ पहल में शामिल हो गया जबकि भारत चीन के इस अभियान का विरोध कर रहा है। भारत का मानना है कि पेइचिंग अपनी रक्षा जरूरतों के लिए यह सब कर रहा है। अघोषित सीमा होने के कारण BHUTAN का चीन से अपना विवाद है। BHUTAN के चीन या संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के दूसरे किसी भी देश (अमेरिका, यूके, फ्रांस और रूस) के साथ राजनयिक संबंध नहीं है। नई दिल्ली के साथ भूटान के अपने विशेष संबंध हैं।
2. सैन्य सुरक्षा
चीन और भारत के बीच में भूटान एक बफर के तौर पर है। 2017 में डोकलाम में भारत और चीन दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने आ गई थीं। रॉयल भूटान आर्मी की गश्त के दौरान पता चला कि भूटान की सीमा में चीन सड़क बना रहा है। इसके बाद भारतीय सेना ने चीन को ऐसा करने से रोक दिया। इसके चलते 75 दिनों तक डोकलाम में गतिरोध बना रहा।
दरअसल, चीन यह मांग करता रहा है कि भूटान उसे डोकलाम पठार का 269 वर्ग किमी का इलाका दे दे, जो उसकी सेना अपने हिसाब से भारत के खिलाफ इस्तेमाल कर सकती है लेकिन भूटान ने साफ मना कर दिया है।
3. साझा विरासत
भारत के सिक्किम राज्य और भूटान की साझा विरासत है। दोनों पहले स्वतंत्र राज्य थे। 1975 में सिक्किम भारत में शामिल हुआ। सिक्किम और भूटान के शाही परिवार आपस में जुड़े हुए थे। भूटान के लोग भी दलाई लामा को अपना आध्यात्मिक गुरु मानते हैं।
4. सदाबहार मित्र
भूटान ने भारत के साथ 1968 में औपचारिक रूप से राजनयिक संबंध स्थापित किए। 1978 में दूतावास भी स्थापित हो गए। हालांकि दोनों देशों ने 1949 में ही मित्रता संधि पर हस्ताक्षर कर लिए थे। 1971 में भारत के समर्थन से भूटान यूएन में शामिल हुआ। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के दावे को भूटान का खुला समर्थन है।
-एजेंसियां

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