PM मोदी की लोगों से अपील, चंद्रयान-2 के ऐतिहासिक क्षण सोशल मीडिया पर शेयर करें

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री मोदी ने भी लोगों से अपील की है कि वह चंद्रयान-2 के चांद की सतह पर उतरने जैसे ऐतिहासिक क्षणों के साक्षी बनें और इस खास पल के फोटो सोशल मीडिया पर शेयर करें।
उन्होंने ट्वीट करके कहा, ‘130 करोड़ देशवासी इस पल का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।’
उन्होंने कहा, कुछ ही घंटों में चंद्रयान चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव को छुएगा। भारत और पूरी दुनिया इन वैज्ञानिकों के करिश्मा देखेगी।
गौरतलब है कि चंद्रयान-2 के चांद की सतह पर उतरकर इतिहास बनाने में अब कुछ ही घंटे शेष हैं। ऐसे में वैज्ञानिकों के साथ सभी की नजरें इस ऐतिहासिक दृश्य को देखने के लिए बेहद उत्साहित हैं।
यह दृश्य देखने के लिए बेहद उत्साहितः मोदी
बता दें कि लैंडर विक्रम की लैंडिंग के दौरान पीएम मोदी भी इसरो सेंटर में मौजूद रहेंगे। मध्यरात्रि में 1:30 से 2:20 के बीच लैंडर चंद्रमा की सतह को छुएगा और इसके बाद रोवर प्रज्ञान बाहर निकलेगा। पीएम मोदी ने कहा, ‘भारत के इस ऐतिहासिक अंतरिक्ष कार्यक्रम को देखने के लिए मैं बहुत उत्साहित हूं और खुशी है कि मैं बेंगलुरु के ISRO सेंटर में मौजूद रहूंगा।’
उन्होंने कहा, जिन युवाओं के साथ मैं इस शेष पल का साक्षी बनूंगा, उन्होंने ‘माइगव’ पर ISRO की क्विज जीती है और बेहद प्रतिभाशाली हैं। इस क्विज में बड़ी संख्या में युवाओं का भाग लेना दिखाता है कि युवाओं को विज्ञान और अंतरिक्ष में बेहद रुचि है। यह एक अच्छा संकेत है।
‘लॉन्चिंग के बाद से ही ले रहा हूं अपडेट’
मोदी ने आगे लिखा, ‘मैं 22 जुलाई यानी लॉन्चिंग डेट से ही चंद्रयान से जुड़े सभी अपडेट लगातार हासिल करता रहता हूं। यह अभियान भारतीयों की प्रतिभा और मेहनत को प्रदर्शित करता है। इससे करोड़ों भारतीयों को लाभ होगा।’ उन्होंने कहा, ‘आप भी इस ऐतिहासिक पल को देखें और सोशल मीडिया पर फोटो शेयर करें, मैं इनमें से कुछ को रीट्वीट करूंगा।’
ISRO सेंटर में मोदी के साथ ये भी देखेंगे लैंडिंग
प्रधानमंत्री के साथ देशभर के करीब 70 छात्र-छात्राएं शनिवार तड़के चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम की सॉफ्ट लैंडिंग के दृश्य सीधे देखने के लिए उपस्थित रहेंगे। ये सभी स्टूडेंट इसरो द्वारा आयोजित ऑनलाइन प्रतियोगिता के जरिए चयनित किए गए हैं। इनमें प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश से सर्वाधिक अंक हासिल करने वाले दो-दो छात्रों को अंतरिक्ष एजेंसी ने चांद की सतह पर चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम की सॉफ्ट लैंडिंग का सीधा नजारा देखने के लिए अपने केंद्र में आमंत्रित किया है।
आखिर के 14.5 मिनट में यूं चांद पर उतरेगा भारत
स्पेस साइंस की दुनिया में भारत एक ऐतिहासिक सफलता हासिल करने से कुछ ही कदम दूर है। भारत का महत्वाकांक्षी स्पेस मिशन चंद्रयान- 2 के चांद पर कदम रखने में कुछ घंटे बाकी हैं। पूरे देश के साथ ही दुनिया की नजर भी भारत के स्पेसक्राफ्ट पर टिकी हैं। शुक्रवार देर रात अगर चंद्रयान 2 का लैंडर विक्रम चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करने में कामयाब रहा तो ऐसा करने वाला भारत दुनिया का चौथा देश बन जाएगा।
इस तरह पहुंचेगा सतह के करीब
बीते बुधवार विक्रम चांद की सतह पर उतरने की ओर बढ़ने के लिए जरूरी ऑर्बिट में दाखिल हो गया था। अब शुक्रवार देर रात 1 से 2 बजे के बीच यह सतह की ओर बढ़ने लगेगा। चांद के आखिरी ऑर्बिट से निकलने के बाद सतह से 35 किमी दूर से विक्रम लैंडिंग के लिए बढ़ना शुरू कर देगा। पहले 10 मिनट में यह 7.7 किमी की ऊंचाई तक आएगा और उसके अगले 38 सेकंड में 5 किमी ऊंचाई पर पहुंच जाएगा। इसके 89 सेकंड बाद 400 मीटर और फिर 66 सेकंड में 100 मीटर की ऊंचाई पर पहुंच जाएगा।
100 मीटर की दूरी से लैंडिंग पर फैसला
सतह से 100 मीटर की दूरी से ही विक्रम लैंडिंग साइट को लेकर आखिरी फैसला करेगा। इसरो ने पहले ही साउथ पोल पर एक प्राइमरी और एक सेकंडरी साइट चुन रखी हैं। इसरो ने जो साइट्स चुनी हैं वह ऐसी जगह पर हैं जहां से लैंडिंग के वक्त सूरज सही ऐंगल पर हो। इससे रोवर को बेहतर तस्वीरें लेने में मदद मिलेगी। लैंडिंग के लिए मैन्जीनियस और सिंपीलियस नाम के क्रेटर्स के बीच दक्षिण पोल से करीब 350 किमी दूर उतरना विक्रम की प्राथमिकता रहेगी।
ऐसे उतरेगा ‘विक्रम’
लैंडर के पास प्राइमरी साइट के भी दो विकल्प हैं और उस वक्त की स्थिति के हिसाब से वह फैसला करेगा कि लैंडिंग कहां करनी है। इसके 78 सेकंड्स के अंदर कुछ चक्कर काटने के बाद लैंडर करीब 1:30-2:30 के बीच सॉफ्ट लैंडिंग करेगा। मिशन से जुड़े एक साइंटिस्ट ने बताया है कि अगर विक्रम प्राइमरी साइट के पहले जोन में उतरने का फैसला करता है, तो 65 सेकंड में यह सतह से 10 मीटर की दूरी पर पहुंच जाएगा।
यह है जटिल कदम
अगर इसे दूसरी लैंडिंग साइट चुननी पड़ी तो पहले 40 सेकंड यह 60 मीटर की दूरी तक जाएगा और उसके अगले 25 सेकंड में 10 मीटर तर पहुंच जाएगा। एक बार विक्रम सतह से 10 मीटर की दूरी पर पहुंच जाता है तो इसे नीचे जाने में 13 सेकंड लगेंगे। सॉफ्ट लैंडिंग ऐसी प्रक्रिया होगी जिसे लेकर सबसे ज्यादा सतर्कता बरती जानी है।
इसरो को है भरोसा
सॉफ्ट लैंडिंग सफलता से करना इसलिए जरूरी है क्योंकि चंद्रयान 2 के रोवर के अंदर रीसर्च से जुड़े जरूरी उपकरण मौजूद हैं। इतिहास पर नजर डालें तो सॉफ्ट लैंडिंग के सिर्फ 37% प्रयास अभी तक सफल हुए हैं। हालांकि, इसरो को अपनी अडवांस्ड टेक्नॉलजी और लॉन्च करने से पहले रोवर, ऑर्बिटर और लैंडर के सबसिस्टम, सेंसर और थ्रस्टर पर किए गए टेस्ट्स की वजह से पूरा भरोसा है कि वह सफलतापूर्वक लैंडिंग कर लेगा।
फिर बाहर आएगा रोवर
एक बार सॉफ्ट लैंडिंग होने के बाद शनिवार तड़के 5:30- 6:30 बजे के बीच रोवर प्रज्ञान 1 सेंटीमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से लैंडर से बाहर निकलेगा और शुरू हो जाएंगे चांद पर वैज्ञानिक प्रयोग। ऑर्बिटर इस दौरान चांद की कक्षा में घूमता रहेगा और विक्रम अपनी जगह साउथ पोल पर ही बना रहेगा।
-एजेंसियां

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