पीएम ने क्यों की सामूहिक चेतना के ल‍िए अपील और क्या है एसीई-2 रिसेप्टर

पीएम नरेंद्र मोदी की दीया-मोमबत्ती अपील के पीछे सामूहिक चेतना का विज्ञान है। पद्मश्री अवार्डी और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल का कहना है कि योग वशिष्ठ पुस्तक का छठा अध्याय सामूहिक चेतना के सिद्धांत के बारे में बताता है। 95 फीसदी लोग वही करते हैं, जो पांच फीसदी लोग सोचते और करते हैं।

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Ex president of IMA : Dr.K.K.Agrawal

हमारे शरीर और सामूहिक चेतना के सिद्धांत के बारे में बात करते हुए वह कहते हैं कि जिस सिद्धांत को पुस्तक में रेखांकित किया गया है, उसमें शरीर के एसीई-2 रिसेप्टर्स को दुरुस्त करने की शक्ति है।अब सवाल है कि यह एसीई-2 रिसेप्टर क्या है!

एसीई-2 रिसेप्टर्स एक तरह का एंजाइम है, जो मानव शरीर के हृदय, फेफड़े, धमनियों, गुर्दे और आंत में कोशिका की सतह से जुड़ा होता है। यह रिसेप्टर गंभीर सांस संबंधी सिंड्रोम का कारण बनने वाले कोरोना वायरस के लिए कार्यात्मक और प्रभावी होता है।

एसीई-2 रिसेप्टर्स को निंयत्रित और दुरुस्त करने वाला हमारी सामूहिक चेतना का विज्ञान क्वांटम फिजिक्स की अवधारणाओं पर आधारित है। अगर हम सभी सामूहिक रूप से शरीर में कोरोना वायरस को नहीं रहने देने का निर्णय लेते हैं तो हमारी सामूहिक चेतना ऐसा सुनिश्चित करने में मदद करेगी।

कोशिका की झिल्ली पर मौजूद प्रोटीन एसीई-2 इस महामारी के केंद्र में है

कनाडा स्थित ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के मुताबिक कोशिका की झिल्ली पर मौजूद प्रोटीन एसीई-2 इस महामारी के केंद्र में है, क्योंकि यह कोरोना वायरस (सार्स-कोव-2) के ग्लाइकोप्रोटीन बढ़ाने के लिए प्रमुख रिसेप्टर यानी अभिग्राहक है। इससे पहले भी टोरंटो विश्वविद्यालय और ऑस्ट्रिया स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ मॉल्युकूलर बायोलॉजी के शोधार्थियों ने भी यह पाया था कि मानव शरीर में एसीई-2 सार्स संक्रमण के मुख्य अभिग्राहक है। मालूम हो कि सार्स वायरस, सांस की बीमारी का कारण होता है और साल 2003 में इससे बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए थे। वैज्ञानिक अपने शोध में एसीई-2 रिसेप्टर को लक्षित कर कोरोना का इलाज ढूंढने के लिए रिसर्च कर रहे हैं।

इसके अलावा प्रख्यात ज्योतिषि‍यों के अनुसार प्रधानमंत्री की इस अपील के लिए 9 बजे और 9 मिनट चुनने का कारण मंगल का दोहरा प्रभाव है। मंगल साहस, पराक्रम, एकजुटता और एकाग्रता का प्रतीक होता है। यह हमारी उच्च इच्छा शक्ति और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, जिससे हम बड़ी समस्याओं को मात दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि पांच अप्रैल को चंद्रमा सिंह राशि में रहेगा। सिंह, सूर्य का प्रतीक है, जिसका सीधा संबंध प्रकाश और शक्ति से है।

दीया और मंत्र प्रकाश और ध्वनि ऊर्जा का अद्भुत संयोजन हैं। उन्होंने कहा कि मेरा भी यही सुझाव है कि उस समय बिजली के उपकरण जलाकर इलेक्ट्रॉनिक ऊर्जा न पैदा की जाए, क्योंकि यह राहु का कारण बनेगा, इससे बचना चाहिए। पीएम मोदी ने भी अपनी अपील में दीया, मोमबत्ती जलाने के दौरान घर की लाइटें बंद करने की अपील की है।

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