ट्रेन में शौचालय के पास सफर करने पर मजबूर हुए नेशनल चैंपियनशिप से लौटे खिलाड़ी

मुंबई। नेशनल चैंपियनशिप के तहत 1 गोल्ड सहित कुल 5 पदक जीतकर लौटे खिलाड़ियों को वापसी के वक्‍त ट्रेन में शौचालय के पास बैठकर सफर करना पड़ा।
अगर आप भी एक खिलाड़ी बनने का सपना देख रहे हैं या अपने बच्चों को खिलाड़ी बनाना चाहते हैं तो यह खबर शायद आपको दुख देगी। हाल ही में महाराष्ट्र के रेसलर यूपी के गोंडा के नंदिनी नगर में आयोजित हुई नेशनल चैंपियनशिप में हिस्सा लेने आए थे। चैंपियनशिप के खत्म होने के बाद जब ये पहलवान अपने घर लौटे तो उन्हें ट्रेन की बोगी में टॉइलट के पास बैठकर यात्रा को मजबूर होना पड़ा।
इन खिलाड़ियों की रिटर्न टिकट साकेत एक्सप्रेस में थी। जब सभी खिलाड़ी ट्रेन पकड़ने के लिए फैजाबाद स्टेशन पहुंचे तो उन्हें मालूम चला कि उनकी टिकटें कन्फर्म नहीं हुई हैं। खिलाड़ियों ने टीसी को सारी कहानी बताई और उनसे मदद की मांग की लेकिन टीसी ने इन खिलाड़ियों की कोई मदद करना तो दूर, खूब खरी-खोटी जरूर सुनाई। अंत में इन खिलाड़ियों को जनरल डिब्बे के टॉइलट के पास ही बैठने को मजबूर होना पड़ा। खिलाड़ियों के इस दल में महिला रेसलर्स भी थीं, जिन्हें टिकट कन्फर्म न होने के चलते इस यात्रा के दौरान और भी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
फैजाबाद से मुंबई तक के इस सफर में 30-35 घंटे का समय लगा और इस पूरी यात्रा के दौरान ये खिलाड़ी परेशानियों से जूझते हुए ही यहां पहुंचे। इस घटना का एक पहलू यह भी है कि जहां एक ओर इन खिलाड़ियों को टीसी के बुरे व्यवहार का सामना करना पड़ा, वहीं दूसरी ओर स्टेट रेसलिंग फेडरेशन के अधिकारी प्लेन या एसी ट्रेन में आराम से बैठकर अपने-अपने गंतव्य पर पहुंचे।
इन खिलाड़ियों को टिकट कन्फर्म न होने के चलते 400-500 से रुपये नुकसान भरपाई के लिए फेडरेशन की ओर दिए गए। लेकिन यह रकम आज के सामान्य मानकों के लिहाज से बहुत थोड़ी ही है। इस पूरे घटनाक्रम से दुखी इन रेसलरों ने पूछा है कि आखिर ऐसा कब होगा जब एसोसिएशन खिलाड़ियों को ऐसे हालात से निपटने के लिए पर्याप्त पैसा मुहैया कराएगा।
-एजेंसियां

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