केरल के बिजली विभाग में तैनात है PFI का चेयरमैन, दिल्‍ली दंगों में भी आया था नाम

नई दिल्‍ली। हाथरस में दलित युवती के साथ कथित गैंगरेप और मौत का मामला अब जातीय हिंसा की साजिश और सरकार की छवि बिगाड़ने के प्रयास में तब्दील होता दिख रहा है।
जातीय हिंसा भड़काने की साजिश में पॉप्युलर फ्रंट ऑफ इंडिया PFI का नाम आ रहा है। सरकार की ओर से कहा गया था कि हाथरस में जातीय हिंसा फैलाने के लिए बाहर से पैसा आया और मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो मॉरिशस से 50 करोड़ रुपया भेजा गया था।
केरल बिजली विभाग में कार्यरत है सलाम
पीएफआई के चेयरमैन का नाम ओएम अब्दुल सलाम है जो केरल के बिजली विभाग में काम करता है। केरल राज्य बिजली बोर्ड (केएसईबी) में सीनियर असिस्टेंट के रूप में कार्यरत सलाम इस वक्त मंजरी (मलप्पुरम) एसईबी सर्किल ऑफिस में तैनात है। सीएए-एनआरसी को लेकर देशभर में फैली हिंसा में जब पीएफआई का नाम आया तो अब्दुल सलाम के सरकारी कर्मचारी के रूप में काम करने पर सवाल उठे।
केरल राज्य बिजली बोर्ड ने दी यह सफाई
उस वक्त यह सवाल था कि क्या एक विवादों में रहने वाला संगठन का चेयरमैन किसी सरकारी पद पर रह सकता है?
इस पर राज्य बिजली बोर्ड के अधिकारियों ने इंकार किया, लेकिन साथ ही यह भी कहा गया था कि इस मामले में सलाम के खिलाफ कोई शिकायत या आपराधिक केस लंबित नहीं है, खासकर केरल में। यह भी कहा गया कि बिजली बोर्ड के सतर्कता विभाग ने इस मामले में पिछले साल कुछ छानबीन भी की थी लेकिन बाद में उन्हें रोक दिया गया था।
दिल्ली हिंसा में भी आया था नाम
पीएफआई का नाम नागरिकता कानून को लेकर विरोध प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा में सुर्खियों में आया था। दिल्ली में एंटी सीएए-एनआरसी हिंसा के दौरान जब ईडी ने सलाम को पूछताछ के लिए समन भेजा था तो उन्होंने ईडी को लेटर लिखकर कहा था, ‘मैं एक सरकारी कर्मचारी हूं और मुझे अपना बहुत जरूरी काम पूरा करना है इसलिए मैं जांच में शामिल नहीं हो सकता।’
6 साल में कई बार जा चुका है विदेश
सलाम ने 2000 में बिजली बोर्ड में नौकरी शुरू की थी। रिकॉर्ड में यह भी सामने आया है कि पिछले 6 साल में वह राज्य बिजली बोर्ड से इजाजत लेकर पर्सनल ट्रिप के नाम पर कई बार विदेश जा चुका है। पीएफआई के खिलाफ कई शिकायत है जिसमें एक आरोप यह भी है कि संगठन को पश्चिमी एशियाई देशों से लगातार फंडिंग मिलती है। संगठन के पदाधिकारियों की कई विदेश यात्राएं खुफिया एजेंसी के रडार पर हैं।
पीएफआई क्या है?
इसी साल फरवरी में सलाम को पीएफआई का चेयरमेन घोषित किया गया है। वह 2006 से इस संगठन से जुड़ा है। बता दें कि पीएफआई बाबरी विध्वंस के बाद बने केरल में तीन मुस्लिम संगठन नेशनल डिवलेपमेंट फ्रंट ऑफ केरल, कर्नाटक फोरम फॉर डिग्निटी और तमिलनाडु के मनिथा नीथि पसारी को मिलाकर 2006 में लॉन्च किया गया था। PFI के पॉलिटिकल फ्रंट का नाम SDPI है।
पीएफआई खुद को पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के हक में आवाज उठाने वाला संगठन बताता है। यह भी बताया जाता है कि संगठन की स्थापना 2006 में नेशनल डिवेलपमेंट फ्रंट (NDF) के उत्तराधिकारी के रूप में हुई थी। संगठन की जड़े केरल के कालीकट से हुई और इसका मुख्यालय दिल्ली के शाहीन बाग में स्थित है? पीएफआई का दावा है कि अब 22 राज्यों में उसकी यूनिट है। पीएफआई के अधिकतर नेता केरल से हैं और सदस्य बैन संगठन सिमी से हैं।
PFI का कब-कब आया नाम?
धर्मांतरण को लेकर कई मामलों में PFI का नाम आता रहा है। दिल्‍ली में इसी साल फरवरी में हुई हिंसा में इस संगठन की प्रमुख भूमिका होने की बात सामने आई। दिल्‍ली पुलिस के अनुसार, PFI जैसे संगठनों ने प्रदर्शनकारियों को पैसे मुहैया कराए। प्रवर्तन निदेशालय PMLA के तहत PFI फंडिंग की जांच भी कर रहा है। उत्‍तर प्रदेश सरकार ने तो PFI पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की थी। इसके बाद, सितंबर महीने में बेंगलुरु में हुई हिंसा में भी PFI के लोगों के शामिल होने की बात सामने आई।
हाथरस केस में पीएफआई का नाम क्यों आया?
हाथरस के चंदपा थाने में जाति आधारित संघर्ष की साजिश, सरकार की छवि बिगाड़ने के प्रयास और माहौल बिगाड़ने के आरोप में अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की है। इस मामले में चार लोगों को मथुरा पुलिस ने गिरफ्तार किया गया है जिसमें एक केरल का पत्रकार भी शामिल है। पत्रकार को पीएफआई से जुड़ा बताया जा रहा है। वहीं केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जॉर्नलिस्ट ने सादिक कप्पन नाम के गिरफ्तार पत्रकार को छोड़ने के लिए सीएम योगी को पत्र लिखा है। यूनियन ने कहा कि कप्पन हाथरस में मौजूदा हालात की रिपोर्टिंग के लिए गए थे।
-एजेंसियां

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