साहित्य के सात अजूबों में से एक माने जाते हैं फ़ारसी शायर शम्सउद्दीन मोहम्मद हाफ़िज़

Persian Shayar Shamsuddin Mohammad Hafeez
साहित्य के सात अजूबों में से एक माने जाते हैं फ़ारसी शायर शम्सउद्दीन मोहम्मद हाफ़िज़

मुंबई। शम्सउद्दीन मोहम्मद हाफ़िज़ फ़ारसी शायरी का ऐसा नाम जिसे शायद ही कोई इनकार कर सके.

या यूं कहें कि साहित्य में आज तक ऐसा कोई नाम हुआ ही नहीं तो कहना ग़लत ना होगा. यहां तक कि दूसरी भाषाओं के साहित्यकारों ने भी हाफ़िज़ का लोहा माना.

हाफ़िज़ की तारीफ़ में उन्होंने यहां तक कहा कि वे साहित्य के सात अजूबों में से एक हैं.

अमरीकी विचारक इमर्सन और जर्मनी के मशहूर कवि गेटे दोनों ही हाफ़िज़ से मुताल्लिक़ कही गई इस बात से इत्तेफ़ाक़ रखते हैं.

इमर्सन ने तो हाफ़िज़ के बारे में यहां तक कहा कि अगर कभी उन्हें किसी और की शख़्सियत का लबादा पहनने को कहा जाए तो वो हाफ़िज़ की शख़्सियत को अपनाना चाहेंगे.

हाफ़िज़ की नज़र बहुत पार की नज़र है. उनकी नज़र वहां जाकर ठहरती है जहां कभी किसी और की नज़र पहुंच ही नहीं सकती.
वो ज़िंदगी का ऐसा फ़लसफ़ा पेश करते हैं जिसकी कभी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता. इमर्सन हाफ़िज़ को शायरों का शायर क़रार देते हैं.

गेटे और इमर्सन दोनों ही महान कवियों ने हाफ़िज़ के कलाम का तर्जुमा अंग्रेज़ी और जर्मन भाषा में किया है. हाफ़िज़ के बारे दोनों की यही राय है कि हाफ़िज़ का कोई सानी नहीं है.

नीत्शे और आर्थर कानन डायल जैसे लेखक भी हाफ़िज़ की शायरी से इतने मुतासिर हुए कि उनकी तारीफ़ में क़सीदे पढ़े बग़ैर ना रह सके.

कानन डायल ने तो अपनी कहानियों के मशहूर किरदार शरलॉक होम्स के ज़रिए भी हाफ़िज़ का हवाला दिलाया है.

स्पेनिश भाषा के मशहूर कवि लोरका हाफ़िज़ को एक सूफ़ी शायर बुलाते हैं.

इसके अलावा जर्मनी के मशहूर संगीतकार जोहानेस ब्राम हाफ़िज़ से इस हद तक प्रभावित हुए कि उन्होंने हाफ़िज़ के बहुत से शेर पर नई धुन तैयार कर उन्हें अमर कर दिया.

आपको जानकर हैरानी होगी कि ब्रिटेन की मलिका विक्टोरिया जब भी मुश्किल में होती थीं तो फ़ाल-ए-हाफ़िज़ के ज़रिए उसका हल तलाशती थीं.

दरअसल सदियों पहले मध्य पूर्व में चलन था कि जब भी कोई किसी परेशानी में होता था तो वो हाफ़िज़ के पास सलाह लेने जाता था.

इस काम के लिए हाफ़िज़ के पास एक किताब थी जिसका नाम था फ़ाल-ए-हाफ़िज़. इसमें हर शब्द के कुछ नंबर होते थे.

पूछने वाले की परेशानी का जो सवाल बनता था, हाफ़िज़ उस सवाल के नंबरों को जोड़-भाग करते थे.

उस जोड़ भाग के बाद जो शेर निकलता था, उस शेर का मतलब ही उस परेशानी का हल माना जाता था. फ़ाल-ए-हाफ़िज़ में हर परेशानी का हल, सलाह, मशविरा और शुभकामनाएं लिखी हैं.

उस दौर में लोग अपनी परेशानियों के हल के लिए फ़ाल-ए-हाफ़िज़ का खूब सहारा लेते थे. हाफ़िज़ की शायरी में हर तरह के विषय पर शेर मौजूद हैं.

इस लेख को लिखने वाले डेनियल लिंडस्की के मुताबिक़ सूरज, रोशनी और कला की उपयोगिता का इस्तेमाल हाफ़िज़ से बेहतर कोई नहीं कर सकता था.

उनकी शायरी ज़रूरतमंदों और परेशानियों के अंधेरों में घिरे लोगों के लिए तसल्ली और उम्मीद की एक किरण बन कर आती है.
कला के साथ इश्क़ किया जाता है. इसमें वो ताक़त होनी चाहिए जो आपको ज़हनी और दिली सुकून दे. आपके अंदर की प्यास को बुझा सके.
पूर्व और पश्चिम के चाहे जितने बड़े शायर क्यों ना हो उसमें रूमी, माइकल एंजिलो, कबीर, मीरा, हाफ़िज़ और सेंट फ्रांसिस भी शामिल हैं.
सभी की शायरी में एक बात समान है कि ये इंसान को उसकी परेशानी की सही तस्वीर उसके सामने पेश करते हैं.

अपनी जिस कैफ़ियत को इंसान ख़ुद अल्फ़ाज़ नहीं दे पाता, उसे शायरी में बहुत ख़ूबसूरती से बहुत कम शब्दों में बयान कर दिया जाता है.
जो शायर आपकी परेशानियों का जितना बेहतर हल बताता जाता है वही आपकी नज़र में बड़ा शायर बनता चला जाता है. जैसे इमर्सन के लिए हाफ़िज़ उनकी दुनिया के सबसे बड़े बुद्धिजीवी हैं.
अगर आपने ज़िंदगी में कोई दर्द झेला है तो हाफ़िज़ की शायरी से आपको वो शिफ़ा मिल सकती है, जो आपके दर्द को कम कर देगी और ज़िंदगी का एक नया दरीचा आपके लिए खोल देगी.

डेनियल अब तक अपनी छह किताबों में हाफ़िज़ की क़रीब 700 कविताओं को जगह दे चुके हैं. उनकी हरेक कविता प्रेरणा देने वाली है.
हरेक कविता पढ़ने वाले के दिल के बोझ को कम करके उम्मीद की एक शमा रोशन कर जाती है.
हाफ़िज़ की शायरी आपके मिज़ाज को बहुत कोमल बना देती है. पढ़ने वाले का दिल मोम होने लगता है, दूसरों की ग़लतियों को बिना किसी शर्त के माफ़ करने लगता है.

हाफ़िज़ की शायरी पढ़ने वाले पर ऐसा असर डालती है कि वो कभी किसी को नुक़सान पहुंचाने का ख़्याल भी अपने ज़हन में नहीं ला सकता.

हाफ़िज़ एक ही ख़्याल के लिए इतने तरह के शब्दों का इस्तेमाल करते हैं कि लगता है हर शब्द एक अलग ही कहानी बयान कर रहा है.

उनका हर शब्द आपको अपना सा लगता है. जैसे हाफ़िज़ कहते हैं- अगर आपका महबूब नक़ाब उठाए और आप खुशी से घुटनों के बल ना गिर पड़ें, अगर किसी के एहसान से आपकी आंखें ना छलक आएं, अगर किसी चीज़ को छूने पर आपको अपने महबूब के वजूद का एहसास ना हो तो, इन परेशानियों के लिए हाफ़िज़ कहते हैं, मेरे शब्द एक दवा का काम करेंगे.

हाफ़िज़ के बारे में दो कहानियां बहुत प्रचलित हैं. एक मर्तबा कोई महिला हाफ़िज़ के पास आई और उसने पूछा कि ये कैसे पता लगाया जाए कि कोई शख़्स ख़ुदा को जानता है.

ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया भी फ़ारसी कवि हाफ़िज़ की शायरी की तारीफ़ करती थीं

हाफ़िज़ ने उस महिला की ओर देखा और कुछ पलों के लिए ख़ामोश हो गए. फिर बहुत विनम्रता से कहा जो शख़्स अपने हाथ से उस ज़ालिम चाक़ू को फेंक दे, जो तुम्हारी जान ले सकता है तो समझ लो कि उसने ख़ुदा को देख लिया है.

इसका अर्थ यह कि जो किसी की कोई नुक़सान पहुंचाने के ख़्याल से ही मुक्त हो जाए तो इसका मतलब है कि वो ख़ुदा के नज़दीक पहुंच गया है.

इसी तरह एक और कहानी बहुत प्रचलित है कि एक बार कोई छात्र हाफ़िज़ की कविताओं का तर्जुमा करना चाहता था. इसकी इजाज़त के लिए वो हाफ़िज़ के पास आया.

उसने हाफ़िज़ से पूछा कि आपकी शायरी को वो कौन सी ख़ासियतें हैं जिन्हें मैं अपनी किताब में लिख सकता हूं.

शम्सउद्दीन मोहम्मद हाफ़िज़ ने कहा मेरी शायरी की ख़ासियत बस यही है कि वो आपको दिल और दिमाग़ के बंद दरवाज़ों को खोल देती है. और उन्हें एक नई राह दिखाती है.

Courtsey:

डैनियल लैडिंस्की,

बीबीसी कल्चर.

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