पाकिस्‍तान के ग्‍वादर में जनविद्रोह, हजारों की तादाद में सड़कों पर उतरे लोग

पाकिस्‍तान ग्‍वादर को सिंगापुर या दुबई बनाना चाहता है लेकिन पिछले एक महीने से स्‍थानीय जनता हजारों की तादाद में सड़कों पर उतरी हुई है। यह वही जगह है जहां सीपीईसी प्रोजेक्‍ट के तहत चीन अरबों डॉलर का निवेश करके बंदरगाह बना रहा है। ग्‍वादर की जनता ‘ग्‍वादर को हक दो’ के नारे लगा रही है। इसके अलावा वे अवैध तरीके से मछली पकड़ने वाले जहाजों को रोकने की मांग कर रहे हैं, जो उनकी आजीव‍िका को तबाह कर रहे हैं।
ग्‍वादर की जनता इमरान सरकार से ईरान के साथ व्‍यापार संबंधों में छूट और शहर में सुरक्षा चेक प्‍वाइंट में ढील देने की भी गुहार लगा रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक ग्‍वादर में चल रहा विरोध प्रदर्शन इमरान सरकार और वहां की शक्तिशाली सेना के लिए खतरे की घंटी की तरह से है। ग्‍वादर में पहले भी इस तरह के विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं लेकिन ऐसा पहली बार है कि इतनी बड़ी तादाद में जनता ने सामूहिक तरीके से ऐक्‍शन लिया है।
बलूच लोगों के भविष्‍य पर कोई चर्चा तक नहीं हो रही
इस प्रदर्शन में उदारवादी इस्‍लामिक नेता, राष्‍ट्रवादी और बड़ी संख्‍या में महिलाएं और बच्‍चे हिस्‍सा ले रहे हैं जो अपने आप में इस शहर के लिए अप्रत्‍याशित है। बलूचिस्‍तान प्रांत में स्थित ग्‍वादर की सीमा से कुछ ही दूरी पर ईरान है और यह अरब सागर में स्‍ट्रेट ऑफ होर्मूज के बेहद करीब है। यह चीन के बेल्‍ट एंड रोड कॉरिडोर का प्रमुख केंद्र है। पाकिस्‍तान का दावा है कि ग्‍वादर और सीपीईसी चीन को अरब सागर तक पहुंच मुहैया कराकर इस पूरे इलाके के आर्थिक भूगोल को बदल देगा।
इस दावे के बीच शहर के बलूच लोगों के भविष्‍य पर कोई चर्चा तक नहीं हो रही है। इसको देखते हुए अब ग्‍वादर के लोग सड़कों पर उतरकर अपनी आवाज को बुलंद कर रहे हैं। इस भारी विरोध के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने रविवार को कहा कि वह ग्वादर तट के नजदीक मछली पकड़ने वाले अवैध जहाजों (ट्रॉलर) के खिलाफ ‘कड़ी कार्रवाई’ करेंगे। उन्होंने यह घोषणा स्थानीय लोगों के भारी विरोध प्रदर्शन के बाद की है। इस प्रदर्शन की वजह से सरकार और प्राधिकारियों को हजारों की संख्या में इलाके में अतिरिक्त पुलिस कर्मियों की तैनाती करनी पड़ी है।
चीन की इस योजना से आजीविका संकट में पड़ जाएगी
इमरान खान ने ट्वीट किया, ‘मैंने ग्वादर के मेहनती मछुआरों की वाजिब मांग पर संज्ञान लिया। ट्रॉलर (मछली पकड़ने वाले जहाजों) से अवैध तरीके से मछली पकड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री से भी बात करूंगा।’ इमरान खान के इस वादे के बाद भी ग्‍वादर के लोगों को उन पर भरोसा नहीं हो रहा है। वे इस तरह के वादे पिछले कई दशक से पाकिस्‍तानी हुक्‍मरानों से सुन रहे हैं। अब वे कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उन्‍हें अब यह डर सता रहा है कि पाकिस्‍तान और चीन की इस योजना से उनकी आजीविका संकट में पड़ जाएगी। ग्‍वादर पहले ओमान का कब्‍जा था और साल 1958 में पाकिस्‍तान सरकार ने उसे खरीद लिया था।
-एजेंसियां

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