मालदीव के लोगों ने इब्राहिम मोहम्मद सोलिह के पक्ष में जनादेश दिया

मालदीव के लोगों ने विपक्ष के साझे उम्मीदवार इब्राहिम मोहम्मद सोलिह के पक्ष में जनादेश दिया है. मालदीव में रविवार को भारी संख्या में लोग मतदान करने के लिए अपने घरों से निकले थे.
मतों की गिनती लगभग पूरी होने वाली है और इब्राहिम मोहम्मद सोलिह जिन्हें लोग प्यार से इबु कहते हैं, वो अपने प्रतिद्वंद्वी अब्दुल्ला यामीन से 17 फ़ीसदी मतों से आगे हैं.
59 साल के यामीन ने अभी तक हार स्वीकार नहीं मानी है लेकिन सोलिह ने राजधानी माले में जीत का दावा किया है.
उन्होंने कहा, ”यह ख़ुशी और उम्मीद का पल है. यह ऐतिहासिक है. मैं उन सबको धन्यवाद देता हूं, जिन्होंने लोकतंत्र की लड़ाई में साथ दिया.”
स्थानीय निगरानी समूह ट्रांसपैरेंसी मालदीव का कहना है कि अब तक के रुझानों में सोलिह को निर्णायक बढ़त मिल गई है.
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यामीन के लिए दूसरे कार्यकाल की लड़ाई पहले से ही मुश्किल लग रही थी.
यामीन के ख़िलाफ़ देश का पूरा विपक्ष एक मंच पर आ गया था. हालांकि कइयों को आशंका थी कि यामीन ने जिस तरह से देश के सुप्रीम कोर्ट, निर्वाचन आयोग और मीडिया पर अपना नियंत्रण कायम किया है उससे चुनावी नतीजे भी प्रभावित होंगे.
2013 में सत्ता में आने के बाद से यामीन ने कई ऐसे क़ानून बनाए जिनसे विपक्षी नेता या तो जेल में डाल दिए गए या उन्हें देश छोड़ना पड़ा. इसी साल फ़रवरी में सुप्रीम कोर्ट के पाँच जजों को गिरफ़्तार कर लिया गया था.
सोलिह चार पार्टियों के गठबंधन के नेता हैं. इन पार्टियों के ज़्यादातर नेता या तो क़ैद हैं या निर्वासित जीवन जी रहे हैं. सत्ताधारी पार्टी के एक सीनियर अधिकारी अहमद निहान ने अल-जज़ीरा से कहा है कि जो जनादेश होगा उसे स्वीकार किया जाएगा.
साढ़े तीन लाख आबादी वाले देश में ढाई लाख से ज़्यादा लोग मतदान करने के क़ाबिल हैं. रविवार को हुए मतदान में श्रीलंका और मलेशिया में भी मतदान केंद्र बनाए गए थे.
माले स्थित पत्रकारों का कहना है कि जब तक चुनाव आयोग आधिकारिक रूप से चुनावी नतीजे की घोषणा नहीं करता है तब तक सोलिह की जीत पक्की नहीं समझी जा सकती है.
मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नाशीद ने ट्वीट कर इस जीत के लिए सालिह को बधाई दी है. मोहम्मद नाशीद को भारत समर्थक माना जाता है.
अब्दु्ल्ला यामीन ने जब आपातकाल लगाया था तो नाशीद ने भारत से सैन्य मालदीव में सैन्य हस्तक्षेप का आग्रह किया था.
नाशीद ने ट्वीट कर कहा है, ”बधाई हो नवनिर्वाचित राष्ट्रपति सोलिह. आपने आज़ादी से मोहब्बत करने वालों और मालदीव के लोगों में उम्मीद जगाई है. लोकतंत्र एक ऐतिहासिक ज़रूरत है.”
मालदीव में लोकतंत्र का तर्जुबा महज़ एक दशक पुराना है. 2008 में मोहम्मद नाशीद देश के पहले निर्वाचित राष्ट्रपति बने थे और इसके साथ ही तीन दशक पुरानी तानाशाही का अंत हुआ था.
अब्दुल्ला यामीन को चीन का समर्थक माना जाता है. यामीन के सत्ता में आने के बाद से भारत की मालदीव में मौजूदगी लगातार कम होती गई.
यहां तक की मालदीव ने भारत के दिए दो हेलिकॉप्टरों को वापस ले जाने के लिए कह दिया है. इसके साथ ही यामीन ने भारतीय कंपनियों को कई प्रोजेक्टों के दिए कॉन्ट्रैक्ट को भी वापस ले लिया था.
क्या यामीन की हार भारत की जीत है?
मालदीव अपने ख़ूबसूरत बीचों के लिए जाना जाता है. दक्षिणी-पश्चिमी तट पर स्थित द्वीपों का यह छोटा सा देश भारत के लिए रणनीतिक रूप से काफ़ी अहम है. अब्दुल्ला यामीन के कार्यकाल में चीन से यहां बेशुमार निवेश हुए हैं.
सऊदी अरब से भी मालदीव में यामीन के कार्यकाल में काफ़ी निवेश हुए. मालदीव और चीन की यारी भारत और अमरीका के लिए झटके की तरह रही है. मालदीव में दो चीज़ें एक साथ हुईं. एक तरफ़ चीन की मौजूदगी बढ़ी तो दूसरी तरफ़ देश में लोकतांत्रिक ढांचे भी कमज़ोर हुए.
मालदीव जहां स्थित है वो भारत के लिए काफ़ी अहमियत रखता है. मालदीव के बगल के ही समुद्री रास्ते से भारत तेल लाता है.
कहा जा रहा है कि चीन ने श्रीलंका में महिंदा राजपक्षे के रहते जो किया वही काम यामीन के कार्यकाल में चीन ने मालदीव में किया. मालदीव को सबसे ज़्यादा विदेशी निवेश चीन से मिल रहा है.
यहां तक कि मालदीव की कंपनियों ने अपने विज्ञापन में कह दिया कि भारतीय नौकरी के लिए आवेदन नहीं करें क्योंकि उन्हें वर्क वीज़ा नहीं मिलेगा.
इस साल फ़रवरी महीने में मालदीव के राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने आपातकाल लगाने की घोषणा की थी तो भारत ने इसका कड़ा विरोध किया था और उसके बाद से ही दोनों देशों के संबंधों में कड़वाहट आती गई.
दिसंबर 2017 में चीन और मालदीव के बीच 12 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए थे. इनमें चीन की महत्वाकांक्षी योजना वन रोड वन बेल्ट के तहत कई समझौते हुए हैं. चीन का उद्येश्य हिन्द महासागर में आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को बढ़ाना है.
हिन्द महासागर में चीन के विस्तार का भारत विरोध कर रहा है. दूसरी तरफ़ चीन बड़े प्रोजेक्टों पर हिन्द महासागर में काम कर रहा है. इनमें ख़ासकर नए पोर्ट का निर्माण मुख्य तौर पर शामिल है.
भारत को हेलिकॉप्टर ले जाने के लिए कहा था
एशियाई सुरक्षा पर काम कर रही थिंक टैंक सिक्यॉरिटी रिस्क ऑफ़ एशिया के प्रमुख राहुल भोसले ने इस मसले पर आइरिश टाइम्स से कहा है कि मालदीव की तरफ़ से भारत को हेलिकॉप्टर ले जाने के लिए कहना भारत की सैन्य और राजनयिक नीतियों के लिए तगड़ा झटका है.
उन्होंने कहा कि इससे साफ़ पता चलता है कि इस इलाक़े में भारत चीन का सामना नहीं कर पा रहा है. मार्च 2015 में मोदी को मालदीव जाना था, लेकिन भारत समर्थक नेता मोहम्मद नाशीद को जेल में डाले जाने के बाद इस दौरे को रद्द कर दिया गया था.
चीन अगर मालदीव में अपना पैर जमा लेता है तो वो भौगोलिक रूप से भारत के और क़रीब आ जाएगा. इसके साथ ही मालदीव अंतर्राष्ट्रीय समुद्री मार्ग के पास है और भारत तेल का आयात इसी मार्ग से करता है. अगर मालदीव में चीन में नेवल बेस बना लेता है तो भारत की सुरक्षा के लिहाज से ख़तरा बढ़ेगा.
मालदीव के चुनावी नतीजे का भारत ने भी स्वागत किया है. भारत ने कहा है, ”हम मालदीव में सफलतापूर्वक आयोजित किए गए तीसरे राष्ट्रपति चुनाव का स्वागत करते हैं. शुरुआती सूचना के अनुसार चुनाव में इब्राहिम मोहम्मद सोलिह को जीत मिली है. हम उन्हें बधाई देते हैं और उम्मीद है कि चुनाव आयोग आधिकारिक रूप से इसकी घोषणा करेगा.”
-BBC

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