Fake News फैलाने में भारत के लोग सबसे आगे

लखनऊ। Fake News फैलाने का भी देश में बड़ा बाजार काम कर रहा है। इसमें भारत सबसे आगे है।
लखनऊ विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस ऐंड टेक्नोलॉजी इन मास कम्युनिकेशन में फैक्ट्स चेकिंग ऐंड ऑनलाइन वेरिफिकेशन ऑन सोशल मीडिया फ्लेटफॉर्म विषय पर वर्कशॉप हुई। इसमें एक्सपर्ट निमिष कपूर ने बताया कि 50 करोड़ से ज्यादा इंटरनेट यूजर हैं। ऐसे में अफवाहों को रोकना आज चुनौती बन गया है।
गूगल पर रिवर्स इमेज सर्च से फेक फोटो और वीडियो वेरिफिकेशन से वीडियो कंटेंट की सच्चाई जांची जा सकती है। यू-ट्यूब डेटा व्यूवर टूल्स से अपलोड वीडियो की सत्यता जन सकते हैं। इस मौके पर विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक और संस्थान के निदेशक प्रोफेसर ए के शर्मा, डॉ. आर सी त्रिपाठी, जूलॉजी विभाग की प्रोफेसर अमिता कनौजिया, यूपी डीएसटी की जॉइंट डायरेक्टर डॉ. पूजा यादव और डॉ. बाल गोविंद वर्मा मौजूद रहे।
भारत में हो चुकी हैं बड़ी घटनाएं
भारत में वॉट्सऐप के जरिए Fake News और अफवाहें फैलने के बाद लिंचिंग जैसी घटनाएं तक सामने आ चुकी हैं। सरकार ने वॉट्सऐप को चेतावनी दी कि वह ‘गैर-जिम्मेदार और विस्फोटक संदेशों’ को अपने प्लेटफॉर्म पर फैलने से रोके। इसके बाद, वॉट्सऐप ने Fake News को रोकने की दिशा में कुछ कदम भी उठाए। अखबारों में फुल पेज का विज्ञापन देकर वॉट्सऐप ने यूजर्स को Fake News के प्रति जागरूक किया।
इसके अलावा, मेसेज फॉरवर्डिंग की सीमा तय की ताकि थोक के भाव में किसी संदेश को फॉरवर्ड न किया जा सके। वॉट्सऐप ने एक और प्रमुख फीचर लॉन्च किया, जिससे यह पता चल सके कि रिसीव किया गया मेसेज फॉरवर्डेड है या ऑरिजिनल।
-एजेंसियां

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