लोकनायक और नानाजी जैसे लोगों ने अपना जीवन देश के नाम समर्पित कर दिया: पीएम

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण और नानाजी देशमुख के जयंती के अवसर पर दोनों हस्तियों को याद किया। उन्होंने कहा कि लोकनायक और नानाजी जैसे लोगों ने अपना जीवन देश के नाम समर्पित कर दिया लेकिन राजनीतिक पदों से हमेशा दूर रहे। उन्होंने पटना में जेपी और नानाजी देशमुख से जुड़े एक प्रसंग को भी याद किया।
नानाजी ने बचाई थी जेपी की जान
पीएम ने कहा, ‘जब भ्रष्टाचार के खिलाफ जयप्रकाश जी जंग लड़ रहे थे तो दिल्ली की सल्तनत में खलबली मच गयी। उन्हें रोकने के लिए षड्यंत्र होते थे। पटना के एक सार्वजनिक कार्यक्रम में जेपी पर हमला हुआ। उनके बगल में नानाजी देशमुख खड़े थे। नानाजी ने अपने हाथों पर मृत्युदंड के रूप में आए प्रहार को झेल लिया। हाथ की हड्डियां टूट गईं। वो ऐसी घटना थी कि देश का ध्यान नानाजी देशमुख की तरफ गया।’
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘इन दोनों महापुरुषों ने अपने जीवनकाल में देश के संकल्प के लिए स्वयं को सौंप दिया। इन दोनों के जीवन का पल-पल मातृभूमि के लिए, देशवासियों के कल्याण के लिए था और आजीवन इसमें जुटे रहे। 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन तीव्रता पर पहुंचा ऐसे समय में जयप्रकाश जी लोहिया जी जैसे युवाओं ने आगे आकर आंदोलन की डोर संभाली। उस कालखंड में वे लोग प्रेरणा का स्त्रोत बन गए।’
सत्ता के गलियारों से दूर रहे
जेपी और नानाजी देशमुख के सामाजिक जीवन से जुड़े कार्यों का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा, ‘सत्ता के गलियारों में लोग जगह ढूंढ़ते थे जयप्रकाश जी ने सत्ता से खुद को दूर रखा। उन्होंने और उनकी श्रीमती प्रभादेवी ने ग्रामोत्थान के मार्ग को चुना। नानाजी देशमुख को देश ज्यादा जानता नहीं था उन्होंने अपना जीवन दे दिया था। उन्होंने संसाधनों को ग्राम विकास के काम में लगाया। नानाजी देशमुख को मंत्री पद के लिए मोराराजी की सरकार में आमंत्रित किया गया, लेकिन उन्होंने विनम्रतापूर्वक इंकार कर दिया।’
ग्राम सेवा में लगे रहे नानाजी
प्रधानमंत्री मोदी ने नानाजी को ग्राम सेवा में लगे रहने वाला कार्यकर्ता बताया। उन्होंने कहा, ‘नानाजी देशमुख ने स्वयं को राजनीतिक जीवन से निवृत कर करीब साढे 3 दशक तक जीवन चित्रकूट को केंद्र बनाकर ग्रामीण विकास के लिए खपा दिया। नानाजी के जन्मशती के अवसर पर भारत सरकार इन महापुरुषों के सपनों के आधार पर उस दिशा में आगे बढ़ रही है। गांव आगे कैसे बढ़ें, गरीबी से मुक्त कैसे बनें, बीमारी से मुक्त कैसे बनें, जातिवाद से मुक्त हो उस दिशा में प्रयास कर रहे हैं।’
-एजेंसी