जीवन का हिस्सा मान Back pain को अनदेखा कर रहे लोग

आगरा। जिंदगी के किसी न किसी मोड़ पर हम सभी Back pain का अनुभव करते हैं और कई लोगों को यह Back pain लंबे समय से परेशान करता रहता है। पीठ में दर्द गलत तरीके से बैठने के कारण विकसित होता है, जिससे रीढ़ की हड्डी बुरी तरह प्रभावित होती है। लेकिन वर्तमान में जीवनशैली में कई बदलाव आएं हैं, जहां हम सारा दिन कुर्सी पर बैठे रहते हैं। इससे हमारी रीढ़ गंभीर रूप से प्रभावित होती है जिससे पीठ दर्द की समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं।

 People ignoring back pain as part of life
नई दिल्ली स्थित, मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत के वरिष्ठ सलाहकार और स्पाइन सर्जन, डॉक्टर कपिल जैन

नई दिल्ली स्थित, मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत के वरिष्ठ सलाहकार और स्पाइन सर्जन, डॉक्टर कपिल जैन ने बताया कि, “यह दर्द पीठ के निचले हिस्से, बीच में और पीठ के ऊपरी भाग में हो सकता है। दर्द चाहे किसी भी उम्र में शुरू हो, इसे जीवन का हिस्सा समझने की भूल नहीं करनी चाहिए। इस दर्द से बचने के कई उपाय हैं। पीठ दर्द का सबसे आम कारण मैकेनिकल लो बैक पेन और कटिस्नायुशूल है। मैकेनिकल पीठ दर्द में व्यक्ति को जांघ, नितंब और पीठ के निचले हिस्से में दर्द का अनुभव होता है, जबकि कटिस्नायुशूल में दर्द केवल एक विशेष क्षेत्र तक ही सीमित होने के बजाय एक या दोनों पैरों में होता है।”

पीठ के निचले भाग में दर्द वाले लगभग 95% रोगियों को लक्षणों के पहले महीने के दौरान किसी विशेष निदान परीक्षण की आवश्यकता नहीं होती है। कुछ ऐसे संकेत हैं जो गंभीर स्थिति को दर्शाते हैं, जिसके लिए व्यक्ति को तुरंत न्यूरोसर्जन से परामर्श करना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति उम्र के अनुसार (20 वर्ष से कम या 50 वर्ष से अधिक आयु) पीठ के दर्द का अनुभव करता है, आराम के साथ दर्द कम नहीं होता है, बिना कारण वजन कम होना और मूत्र या आंत की समस्या हो तो उसे तत्काल परीक्षण की आवश्यकता है।

डॉक्टर कपिल जैन ने आगे बताया कि, “यह निराशाजनक बात है कि दर्द के मूल कारण और इसे ठीक करने के उपायों के बारे में सोचने की बजाय लोग इसे जीवन का सामान्य हिस्सा मानकर स्वीकार कर लेते हैं। पीठ या गर्दन के दर्द को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। प्रारंभिक इलाज से इसे कुछ ही समय में ठीक किया जा सकता है। शुरुआती निदान और सही उपचार की मदद से सर्जरी के जोखिम से बचा जा सकता है।”

एक सक्रिय जीवनशैली के साथ संतुलित आहार के सेवन और बैठने, चलने और झुकने के दौरान सतर्कता से रीढ़ की हड्डी संबंधी इन समस्याओं में से अधिकांश को रोका जा सकता है। प्रारंभिक मूल्यांकन का प्रमुख लक्ष्य सामान्य स्पाइनल डिसॉर्डर को गंभीर और जरूरी समस्याओं जैसे कि स्पाइनल इंफेक्शन या स्पाइनल ट्यूमर के बीच अंतर पहचानना है।

पीठ के निचले हिस्से का दर्द इसके सटीक कारण पर निर्भर करता है। उदाहरण, गंभीर मोच के लिए न्यूनतम उपचार की आवश्यकता होती है, दूसरी तरफ डिस्क के खिसकने, पीठ के निचले हिस्से की रीढ़ के संकुचित होने और स्पोंडिलोलिस्थीसिस आदि में सर्जरी की आवश्यकता होती है। पीठ के निचले हिस्से में दर्द वाले केवल 5% मरीजों को सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है। आज के आधुनिक युग में पीठ के लिए सर्जरी बेहद सुरक्षित विकल्प है।

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