लोगों को ज़्यादा लुभाती हैं रोमांस पर लिखी गई किताबें

रोमांस पर लिखी गई किताबें लोगों को ज़्यादा लुभाती रही हैं. अंग्रेज़ी का रोमांटिक नॉवेल ‘फ़िफ्टी शेड्स ऑफ ग्रे’ दुनिया भर में खूब पसंद किया गया. इस एक किताब की बिक्री ने इसकी लेखिका को करोड़पति बना दिया है.
इस किताब की लेखिका ई. एल जेम्स का कहना है कि ई-बुक्स के चलन ने रोमांस पर किताबें लिखने वालों को अतिरिक्त कमाई का बहतरीन ज़रिया दिया है.
एक रिसर्च बताती है कि रोमांटिक किताबें लिखने वालों की तुलना में दीगर मसलों पर लिखने वालों की कमाई में क़रीब 30 फीसदी की कमी आई है.
एक रिसर्च तो ये भी बताती है कि रोमांस पर लिखने वालों की कमाई का ये इकलौता ज़रिया नहीं है. वो ज़्यादा रोज़गार कमाने के दूसरे विकल्पों पर भी काम करते हैं जबकि गंभीर विषयों पर लिखने वालों का काम ज़्यादा वक़्त की मांग करता है लिहाज़ा उनके पास कमाई के दूसरे ज़रियों पर काम करने का मौक़ा नहीं है. यही वजह है कि उनकी कमाई भी घट रही है.
किताबें इंसान की सबसे अच्छी दोस्त होती हैं. और एक अच्छे दोस्त की तलाश तो सभी को होती है. एक ज़माना था जब लोग अपने शौक़ के लिए किताबें लिखते थे.
अपनी ज़िंदगी के तजुर्बे, समाज को देखने का नज़रिया और अपनी सोच को किताब की शक्ल में सबके सामने लाते थे लेकिन आज ये एक बड़ा बिज़नेस है.
अब किताबों की दुनिया में एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ सी लग गई है. एक अच्छी किताब लिखना हंसी-खेल नहीं है. लेखक को अपना क़ीमती वक़्त देना पड़ता है. तब कहीं जाकर एक अच्छे दोस्त की शक्ल में कोई किताब उसके चाहने वालों तक पहुंचती है लिहाज़ा लेखक भी उम्मीद करता है कि लोग ना सिर्फ उसके काम को सराहें बल्कि काम का मुनासिब मेहनताना भी मिले.
आज हम डिजिटल वर्ल्ड में जी रहे हैं. सारी दुनिया आपके फोन, लैपटॉप, कम्प्यूटर में समाई हुई है. आज अगर हम सबसे ज़्यादा कहीं वक़्त गुज़ारते हैं तो वो है हमारा फ़ोन. लोगों की इसी कमज़ोरी को अब लेखकों ने भी समझ लिया है.
अगर उन्हें कोई प्रकाशक नहीं मिलता है तो वो ऑनलाइन ही अपनी किताब मुहैया करा देते हैं. यहां उन्हें उनके काम के क़दरदान भी मिल जाते हैं.
दरअसल, रोमांस पर लिखने वाले लेखक आम तौर पर फ़्रीलांस काम करते हैं. अमरीका में आज क़रीब एक तिहाई लोग फ्रीलांस काम करके रोज़ी कमा रहे हैं. 2016 में ही क़रीब 57.3 मिलियन लोग फ्रीलांस काम कर रहे थे. बढ़ते वक़्त के साथ इसमें और इज़ाफ़ा हुआ.
अर्थशास्त्री लॉरेंस कात्ज़ और एलन क्रूगर के मुताबिक़ 2005 से 2015 के दरमियान अमरीका में जितनी नौकरियां पैदा हुई हैं, उनमें बड़ी संख्या फ़्रीलांस काम करने वालों की है.
अर्थशास्त्री तो यहां तक कहते हैं कि जिन्होंने अभी फ़्रीलांस काम शुरू नहीं किया है, वो भी बहुत जल्द ये काम शुरू कर देंगे. 2017 तक अमरीका की लगभग आधी आबादी अतिरिक्त कमाई के इसी विकल्प पर काम करती नज़र आएंगी लिहाज़ा गंभीर विषयों पर लिखने वाले इनसे कुछ गुर सीख सकते हैं.
कुछ जानकार अर्थशास्त्रियों की इस राय से सहमत नहीं. उनका कहना है कि फ़्रीलांस कमाई का स्थाई ज़रिया नहीं. ये बात ठीक है कि फ़्रीलांस काम करने वाले अपनी मर्ज़ी और सहूलियत के मुताबिक़ काम कर सकते हैं. लेकिन इसमें अच्छी कमाई की गारंटी नहीं है.
रोमांस लेखकों के कामयाबी की वजह
कुछ जानकारों की राय तो ये भी है कि गंभीर मुद्दों पर लिखने वालों की कमाई में कमी नहीं आई है. रोमांस पर लिखने वाले सभी लेखक बहुत अच्छी कमाई कर रहे हैं, ऐसा भी नहीं है. 2014 में रोमांस पर लिखने वालों की आमदनी दस हज़ार डॉलर सालाना से भी कम थी जबकि 2008 में सिर्फ़ 6 फीसदी लेखक ही एक लाख डॉलर तक कमा रहे थे, जो कि 2014 के मुक़ाबले 15 फीसदी ज़्यादा थी.
मोटे तौर पर कहा जा सकता है कि इन लेखकों की कमाई इसलिए बढ़ रही है क्योंकि ऑनलाइन इनकी किताबें ज़्यादा बिक रही हैं लेकिन इनकी कामयाबी के पीछे वजह क्या है?
1970 में अमरीका में रोमांस पर लिखने वाले नए लेखकों को जब बड़े लेखकों ने नकार दिया, तो उन सभी ने मिलकर एक संस्था बनाई. इसका नाम था, ‘रोमांस राइटर्स ऑफ अमरीका’. आज क़रीब दस हज़ार लेखक इस के सदस्य हैं. 1980 में जब इस संस्था ने काम करना शुरू किया तो नए लिखने वाले को इन्होंने जगह दी.
इसी तरह दूसरी संस्थाएं भी खुलीं. जैसे ‘ऑथर्स गिल्ड’, ‘मिस्ट्री राइटर्स ऑफ अमरीका’, ‘साइंस फिक्शन एंड फैन्टेसी राइटर ऑफ़ अमरीका’.
लेकिन इन संस्थाओं का सदस्य बनने के लिए कुछ शर्तें थीं. ये संस्थाएं उन्हीं लेखकों को सदस्यता देती थीं जिनकी कोई किताब किसी बड़े प्रकाशक ने छापी हो. या, वो किसी किताब की रॉयल्टी के मालिक हों.
वैसे भी ज़्यादातर गंभीर विषयों पर लिखने वाले ही इन संस्थाओं के सदस्य होते थे. रोमांस पर लिखने वालों के लिए जगह थी ही नहीं.
‘रोमांस राइटर्स ऑफ़ अमरीका’ नए लिखने वालों को ना सिर्फ़ मंच देता है बल्कि उनका हुनर निखारने के लिए कई तरह की वर्कशॉप भी आयोजित करता है.
तजुर्बेकार लेखक उनकी सरपरस्ती करते हैं. साथ ही इन लेखकों को ऑनलाइन अपना काम प्रकाशित करने का मौक़ा देते हैं. कुछ लेखकों ने तो ऑनलाइन सेल्फ़ पब्लिशिंग एडवाइज़री ग्रुप बना लिया हैं और नए लेखकों को सलाह देते हैं.
ऐसा नहीं है कि ये तजुर्बेकार लेखक नौसिखयों को सिर्फ़ सलाह मशवरा देते हैं, बल्कि उनकी राय जानकर उन पर अमल भी करते हैं. इस तरह दोनों अपने काम में निखार पैदा करते हैं.
फ्रीलांस काम करने वाले लेखक इन तजुर्बेकारों से फ़ायदा हासिल करके अपनी आमदनी भी बढ़ा सकते हैं.
-BBC