पेगासस जासूसी केस: इसराइली कंपनी ने कहा, दुर्घटना की दोषी कार कंपनी नहीं… नशा करने वाला ड्राइवर होता है

पेगासस स्पाइवेयर की निर्माता कंपनी का कहना है कि “हैकिंग के लिए हमारे ग्राहकों को दोष दिया जाये, हमें नहीं.”
कंपनी का कहना है कि “हैकिंग के लिए उसे दोष देना ठीक वैसा ही है, जैसे शराब पीकर गाड़ी चलाने वाले की दुर्घटना होने पर कार निर्माता कंपनी को दोष देना.”
इस सॉफ़्टवेयर (स्पाइवेयर) को बनाने वाली इसराइल की सर्विलांस कंपनी, एनएसओ को इस मौजूदा हैकिंग प्रकरण के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आलोचना का सामना करना पड़ा है.
कुछ मीडिया संस्थानों ने एक रिपोर्ट जारी कर यह दावा किया है कि पेगासस की मदद से तमाम समाजसेवियों, पत्रकारों और राजनेताओं की जासूसी की गई.
बताया गया है कि 50 हज़ार फ़ोन नंबरों की एक लिस्ट लीक हो जाने के बाद इस मामले में जाँच शुरू हुई थी.
विशेषज्ञों के अनुसार, पेगासस आईफ़ोन या एंड्रॉएड, किसी भी तरह के फ़ोन की जासूसी करने में सक्षम है.
ये स्पाइवेयर फ़ोन पर अपना कब्ज़ा जमा लेता है और जासूसी करने वाले को यह टार्गेट के फ़ोन से मैसेज, फ़ोटो, इमेल, कॉल के रिकॉर्ड समेत कैमरे और माइक्रोफ़ोन का एक्सेस भी दे सकता है.
लेकिन पेगासस को बनाने वाली कंपनी इस बात पर ज़ोर देती रही है कि इस स्पाइवेयर का निर्माण अपराधियों और चरमपंथियों की जासूसी के लिए किया गया था.
कंपनी के मुताबिक़ इसे ज़्यादातर विभिन्न देशों की सेनाओं और सरकारी एजेंसियों को ही बेचा गया है, वो भी यह सुनिश्चित करने के बाद कि इसके ग्राहक देश में मानवाधिकारों की स्थिति अच्छी हो.
लेकिन कुछ मीडिया संस्थानों के एक समूह ने, जिसका नेतृत्व एक फ़्रांसीसी मीडिया समूह कर रहा है, दर्जनों ऐसी ख़बरें प्रकाशित की हैं जिनमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जासूसी किये जाने का दावा किया गया है.
यहाँ तक कि इस फ़्रांसीसी मीडिया संस्थान ने अपनी रिपोर्ट में फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के नंबर को भी निशाना बनाये जाने की बात कही है.
एनएसओ ग्रुप का कहना है कि उसे बताया गया कि ये लिस्ट कंपनी के साइप्रस सर्वर को हैक करके हासिल की गई.
लेकिन कंपनी के प्रवक्ता ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि “पहली बात तो ये कि साइप्रस में हमारा कोई सर्वर नहीं है. और दूसरी ये कि हमारे पास हमारे ग्राहकों का कोई डेटा नहीं रहता.”
इसके बाद उन्होंने कहा कि “यह समझने की ज़रूरत है कि हमारे सभी ग्राहक एक दूसरे से जुड़े नहीं हैं. सभी ग्राहकों का अपना-अपना डेटा बेस है. तो इस तरह की किसी लिस्ट के होने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता.”
उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि जितनी संख्या में नंबर बताये गए हैं, उस तरह पेगासस काम नहीं करता.
उन्होंने कहा, “हमारी जानकारी के अनुसार हमारे ग्राहकों के निशाने पर हर साल जासूसी के लिए कोई सौ टारगेट ही होती हैं.”
कंपनी के प्रवक्ता ने बताया कि “कंपनी शुरू होने से लेकर अब तक भी हमारे कुल पचास हज़ार टारगेट नहीं होंगे.”
सुरक्षा सेवाएं
पिछले कुछ वर्षों में कई बार इस कंपनी पर जासूसी करने में मदद करने के आरोप लगे हैं. कहा जाता रहा है कि कंपनी ने कुछ दमनकारी सरकारों को भी पेगासस स्पाइवेयर बेचा, जिसकी मदद से उन्होंने सामान्य और निर्दोष लोगों की भी जासूसी की.
लेकिन कंपनी इन आरोपों से इंकार करती है.
कंपनी के प्रवक्ता का कहना है कि वो नियमित रूप से इसकी जाँच नहीं करते कि किसे लक्षित किया गया है, लेकिन कंपनी के पास ऐसा करने का सिस्टम मौजूद है.
इसी महीने की शुरुआत में एनएसओ ग्रुप ने अपनी ‘पारदर्शिता रिपोर्ट’ लॉन्च करते हुए कहा था कि “हमें ख़ुद के लिए उच्च मानक रखने चाहिए. साथ ही मानव अधिकारों और गोपनीयता के साथ सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नेतृत्व और पारदर्शिता के साथ काम करना चाहिए.”
लेकिन बुधवार को कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, “अगर मैं एक कार निर्माता हूँ और आप मुझसे कार ख़रीदते हैं, जिसके बाद आप नशे में गाड़ी चला रहे हैं और आप किसी को मार देते हैं या दुर्घटना कर देते हैं तो आप कार निर्माता के पास नहीं जायेंगे, बल्कि ड्राइवर को पकड़ेंगे.”
उन्होंने कहा कि “हम सरकारों को पेगासस बेच रहे हैं. ये काम हम पूरी ज़िम्मेदारी से करते हैं और ये सब कुछ क़ानूनी ढंग से किया जाता है.”
कंपनी के प्रवक्ता ने बताया, “अगर हमें पता चलता है कि हमारा कोई ग्राहक पेगासस का ग़लत इस्तेमाल कर रहा है तो वो हमारा ग्राहक नहीं रह जायेगा. लेकिन पेगासस के दुरुपयोग के मामले में सभी उंगलियाँ ग्राहक पर उठनी चाहिए. सभी आरोप ग्राहक पर लगने चाहिए.”
‘एक संयोग’
बताया गया है कि जिन लोगों के मोबाइल नंबर इस लिस्ट में हैं, उनमें से 67 लोग अपना फ़ोन फ़्रांसीसी मीडिया संस्थान ‘फ़ॉरबिडन स्टोरीज़’ को फ़ॉरेंसिक जाँच के लिए देने को तैयार हो गये थे.
इनमें से 37 लोगों के फ़ोन में एमनेस्टी इंटरनेशनल सिक्योरिटी लैब्स को पेगासस स्पाइवेयर द्वारा संभावित रूप से टारगेट बनाये जाने के सबूत मिले हैं.
लेकिन एनएसओ ग्रुप ने कहा है कि उसे इसकी जानकारी नहीं है कि सूची में दिये गए कुछ मोबाइल फ़ोनों में स्पाइवेयर के अवशेष कैसे हैं.
कंपनी के प्रवक्ता का कहना है कि “ये महज़ एक संयोग हो सकता है.”
-BBC

50% LikesVS
50% Dislikes

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *