वाशिंगटन में भारत का चेहरा बनेंगी मथुरा की Pawani Khandelwal

मथुरा। मथुरा की 24 वर्षीया Pawani Khandelwal देशभर से अकेली महिला है जिन्हें वाशिंगटन में २२ मार्च से होने जा रहे वर्ल्ड इकनोमिक आर्डर के प्रोग्राम के लिए चुना गया है |

यह कार्यक्रम Washington और शिकागो में फ्रेडरिक नौमन फाउंडेशन द्वारा महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया जाएगा। सप्ताह भर चलने वाले कार्यक्रम में Pawani Khandelwal  महिला संचालित उद्यम, मेंटरशिप, नेटवर्किंग और महिलाओं के लिए वित्त पोषण के अवसर, महिलाओं की सामाजिक अपेक्षाओं और दायित्वों, उद्यमशीलता कौशल निर्माण और शिक्षा, आदि विषयों पर बोल और चर्चा करेंगे।

यह एक फुल्ली फंडेड प्रोग्राम है जिसके लिए दुनिया भर से केवल 10 महिलाओं को एक कठिन स्क्रीनिंग प्रक्रिया के माध्यम से इस कार्यक्रम के लिए चुना गया है। जिन अन्य देशों से महिलाएं भाग ले रही हैं वे जर्मनी, जॉर्जिया, मोरक्को, ग्रीस, बुल्गारिया, तुर्की और कैंबोडिया हैं।

Pawani Khandelwal मथुरा के एक सोशल इंटरप्रेन्योर और एक्टिविस्ट हैं, जो पूरे भारत में संचालित आत्मनिर्भर लर्निंग महिलाओं के लिए एक दोपहिया ड्राइविंग स्कूल चलाती हैं और एक नॉन फॉर प्रॉफिट संगठन भी जिसे आत्मनिर्भर महिला संघ कहा जाता है जो महिला उद्यमिता को बढ़ावा देता है।

आत्मनिर्भर स्कूटर ड्राइविंग स्कूल फॉर वीमेन के बारे में-

आत्मनिर्भर स्कूटर ड्राइविंग स्कूल फॉर वीमेन, मथुरा की रहने वाली 23 वर्षीया पावनी खंडेलवाल की एक पहल है। उनका उद्देश्य छोटे शहरों की महिलाओं को सशक्त एवं आत्मनिर्भर करने के उद्देश्य से उन्हें अपनी छोटी-बड़ी जरूरतों के लिए किसी की राह न देखनी पड़े।

कुछ महीने पूर्व पावनी की माताजी को स्कूटी सीखनी थी, परंतु उन्हें महिला ट्रेनर ढूंढने में मुश्किल हुई। यह सोच कर कि ऐसी कितनी ही अन्य महिलाएं होंगी, जिनका स्कूटी सीखना सपना होगा या जरूरत होगी, पावनी ने आत्मनिर्भर स्कूल की शुरुआत कर दी।

खास बात ये है कि आत्मनिर्भर में न सिर्फ ट्रेनर, बल्कि कंपनी की सभी एंप्लाइज महिलाएं हैं। आत्मनिर्भर न सिर्फ महिलाओं को स्कूटी चलाना सिखाकर आत्मनिर्भर बना रहा है, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को रोजगार प्रदान करके उन्हें भी आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प लिए हुए है। सबसे अच्छी बात यह है कि महिला ट्रेनर स्टूडेंट को घर से पिक करती है एवं घर पर ही ड्राप करती हैं। ट्रेनिंग भी महिला स्टूडेंट की समय सुविधा को ध्यान में रखकर दी जाती है। अब तक 100 से अधिक महिलाएं पिछले दो महीने में आत्मनिर्भर स्कूल से स्कूटी चलना सीख चुकी हैं, जिसमें 20 से 60 साल तक की महिलाएं शामिल हैं। ट्रेनिंग के बाद स्टूडेंट्स को आत्मनिर्भर ड्राइविंग स्कूल की ओर से एक सर्टिफिकेट भी दिया जाता और ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में भी सहायता की जा रही है।

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