अब आम समस्‍या बनता जा रहा है Panic attack

नई दिल्ली। डायग्‍नोस्टिक एंड स्‍टेटिस्‍टीकल मैन्‍युअल ऑफ मेंटल डिसऑर्डर नाम के जर्नल में बताया गया है कि Panic attack भय के बीच उत्‍पन्‍न होने वाली ऐसी समस्‍या है जो कुछ ही मिनटों में चरम पर पहुंच जाती है।
कुछ हफ्ते पहले की बात है, ‘डेंटिस्‍ट के यहां सर्जरी करवा रहे एक व्‍यक्‍ति को अचानक से घबराहट होने लगी। उसका दिल तेजी से धड़कने लगा, आंखों के सामने अंधेरा छा गया और लगने लगा कि वह कुर्सी से गिर जाएगा। डेंटिस्‍ट ने उसे नींबू पानी दिया, डेंटिस्‍ट को लगा कि उसका ब्‍लड प्रेशर लो हो गया है। हालांकि धीरे-धीरे सब कुछ सामान्‍य हो गया। डेंटिस्‍ट के पास से काम अधूरा छोड़कर वह घर लौट आया।
यह व्‍यक्‍ति भी एक मनोरोग चिकित्सक था, मगर तब भी उसे विश्‍वास नहीं हो रहा था कि उसके साथ जो हुआ, वह एक Panic attack था।’
पैनिक अटैक अब सामान्‍य लोगों के बीच होने वाली आम समस्‍या बन चुकी है। एक स्‍टडी में पता लगा है कि शहरों में रहने वाले 30 फीसद लोग जिंदगी में कम से कम एक बार पैनिक अटैक का सामना कर चुके हैं।
Panic attack को ऐसे पहचानें
डायग्‍नोस्टिक एंड स्‍टेटिस्‍टीकल मैन्‍युअल ऑफ मेंटल डिसऑर्डर नाम के जर्नल में बताया गया है कि पैनिक अटैक भय के बीच उत्‍पन्‍न होने वाली ऐसी समस्‍या है जो कुछ ही मिनटों में चरम पर पहुंच जाती है। पैनिक अटैक आने पर दिखेंगे ये लक्षण:
-Panic attack के वक्‍त व्‍यक्ति को अचानक से घबराहट होने लगती है।
-हर्ट बीट अचानक तेज हो जाती है।
-तेजी से पसीना आने लगता है और हाथ-पैर कांपने लगते हैं।
-सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। गला सूखने लगता है।
-उल्‍टी और पेट में दर्द भी होने लगता है। आंखों के सामने अंधेरा छाने लगता और चक्‍कर आते हैं।
-कई मामलों में व्‍यक्ति खुद को ही नहीं पहचान पाता। मर जाने का भय सताने लगता है।
इन उपायों से मिलेगी फौरन राहत
-जब आपको कभी अचानक से घबराहट होने लगे या फिर चक्‍कर आने लगे तो आप गहरी सांसें लेना शुरू कर दें।
-नाक के द्वारा जल्‍दी-जल्‍दी सांस लें। उसके बाद सांस को थोड़ा सा रोककर फिर से लंबी-लंबी सांस लें।
-मुंह से भी ऑक्‍सीजन लेने की कोशिश करें। कुछ देर से मुंह से सांस रोककर फिर से मुंह में ऑक्‍सीजन भरें।
मन में नकारात्‍मक विचारों को आने से रोकें
-Panic attack आने पर व्‍यक्ति के मन में नकारात्‍मक विचार सबसे पहले आने लगते हैं जबकि उस दौरान खुद को संभालते हुए नकारात्‍मक विचार आने से खुद को रोकना चाहिए।
-लोगों को लगता है कि वह बेहोश हो जाएंगे। बता दें कि ब्‍लड प्रेशर लो होने पर व्‍यक्ति बेहोश होता है, लेकिन पैनिक अटैक ब्‍लड प्रेशर लो नहीं हाई हो जाता है तो बेहोश होने की कोई आशंका नहीं है।
– लोगों को लगता है कि उनका खुद पर से कंट्रोल खो चुका है जबकि ऐसा सोचने की बजाए हम जहां पर हैं वहीं हमें आराम से बैठ जाना चाहिए।
-कई मामलों में तो लोग पैनिक अटैक को हार्ट अटैक मानकर डर जाते हैं कि वह मर जाएंगे जबकि ऐसा नहीं है। Panic attack में मौत की कोई आशंका नहीं होती।
-एजेंसी

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