पाकिस्तान की ईसाई महिला आसिया बीबी जेल से रिहा

आसिया बीबी के वकील ने ये जानकारी दी है कि ईशनिंदा के आरोप से बरी हुईं पाकिस्तान की ईसाई महिला आसिया बीबी को जेल से रिहा कर दिया गया है.
कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि ईसाई महिला आसिया बीबी विमान में सवार होकर पाकिस्तान से जा चुकी हैं लेकिन वह कहां गई हैं यह अभी साफ़ नहीं है.
आसिया बीबी को निचली अदालत ने ईशनिंदा के आरोप में मौत की सज़ा दी थी. सज़ा सुनाए जाने के आठ साल बाद हाल ही में पाकिस्तान की सर्वोच्च अदालत ने उन्हें बरी कर दिया.
सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद पाकिस्तान में कट्टरपंथी मुसलमानों ने व्यापक प्रदर्शन किए थे. इन प्रदर्शनों के बाद सरकार ने कहा था कि वो आसिया बीबी को देश छोड़कर नहीं जाने देगी.
प्रदर्शनकारियों को शांत करने के लिए पाकिस्तान की सरकार ने कहा था कि वो आसिया बीबी को देश से बाहर जाने से रोकने के लिए क़ानूनी कार्यवाही करेगी.
आसिया बीबी के पति ने अपने परिवार की जान को ख़तरा बताते हुए कई देशों से शरण भी मांगी थी. कई देशों ने उनके परिवार को शरण देने का प्रस्ताव दिया था.
उनके वकील सैफ़-उल-मुलूक का कहना है कि मुल्तान शहर की जेल से उन्हें रिहा कर दिया गया है.
आसिया बीबी के ख़िलाफ़ क्या था मामला?
आसिया बीबी के ऊपर एक मुस्लिम महिला के साथ बातचीत के दौरान पैग़ंबर मोहम्मद के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप था.
हालांकि, पैग़ंबर मोहम्मद के अपमान के आरोप का आसिया बीबी पुरज़ोर खंडन करती रही हैं.
पाकिस्तान में ईशनिंदा एक बहुत संवेदनशील विषय रहा है. आलोचकों का कहना है कि इस क़ानून का ग़लत इस्तेमाल कर अक्सर अल्पसंख्यकों को फंसाया जाता है.
ये पूरा मामला 14 जून, 2009 का है जब एक दिन आसिया नूरीन अपने घर के पास फालसे के बगीचे में दूसरी महिलाओं के साथ काम करने पहुँची तो वहाँ उनका झगड़ा साथ काम करने वाली महिलाओं के साथ हुआ.
ईशनिंदा क़ानून को आम समाज का भी पुरज़ोर समर्थन मिला हुआ है.
कट्टरपंथी राजनेताओं ने भी अक्सर अपने लिए समर्थन जुटाने की ख़ातिर ईशनिंदा करने वालों को कड़ी से कड़ी सज़ा दिए जाने का समर्थन किया है.
हालांकि, आलोचकों का कहना है कि इस क़ानून का इस्तेमाल अक्सर निजी बदलों को लेने में किया जाता है जिनमें काफ़ी कमज़ोर सबूतों के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी ठहरा दिया जाता है.
इस क़ानून के तहत दोषी ठहराए जाने वाले लोगों में मुस्लिम समाज और अहमदी समुदाय के सदस्य शामिल हैं.
लेकिन 1991 के बाद से ईसाई समुदाय के कई लोग इस क़ानून के तहत दोषी ठहराए गए हैं. जबकि पाकिस्तान की जनसंख्या में ईसाई समुदाय सिर्फ़ 1.6 फीसदी है.
-BBC

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