पाकिस्‍तान: ‘तालिबान खान’ के नाम से चर्चित इमरान का प्रधानमंत्री बनना लगभग तय

इस्लामाबाद। लाहौर में जन्मे, ऑक्सफोर्ड से पढ़ाई करने वाले और वर्ल्ड कप जीतने वाली पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के कप्तान इमरान खान क्या पाक के अगले पीएम बनने जा रहे हैं?
3 शादियां करके भारतीय उपमहाद्वीप में प्लेबॉय की छवि बनाने वाले इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी (पीटीआई) वोटों की गिनती के साथ मजबूत होती जा रही है।
25 जुलाई को पाकिस्तान में हुए मतदान के बाद वोटों की गिनती जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है पाकिस्तान के उदारवादी धड़े के बीच ‘तालिबान खान’ के नाम से चर्चित इमरान का पीएम बनना भारत के लिहाज से कैसा रहेगा? क्या भारत को नुकसान होने जा रहा है? क्या भारत के लिए चिंता की बात है?
ऐसे सवाल अब तेजी से सामने उठ रहे हैं। इमरान खान और तालिबान खान का क्या कनेक्शन है, इस पर बाद में आएंगे। इस बीच पाकिस्तानी मीडिया के एक धड़े ने तो आरोप भी लगाना शुरू कर दिया है कि इमरान की मजबूती देख भारत में उनके खिलाफ कैंपेन शुरू कर दिया गया है। अब इसमें कोई शक नहीं रह गया है कि इमरान खान ने नवाज शरीफ के नेतृत्व वाली पीएमएल नवाज को पीछे छोड़ दिया है। अगर आप चुनावी रैलियों में इमरान के भाषणों की पड़ताल करें तो आपको इस बात के संकेत दिख सकते हैं कि भारत के प्रति उनका क्या रुख होने जा रहा है।
‘भारत और मोदी को प्यारे हैं नवाज’ बोलने वाले इमरान भारत के लिए हानिकारक?
नवाज शरीफ की पार्टी ने इमरान पर आरोप लगाया कि सेना और आईएसआई के साथ मिलकर वह गलत तरीके से चुनाव जीतने की कोशिश कर रहे हैं। चुनाव के लिए वोटिंग से ठीक पहले इमरान ने इसको मुद्दा बनाया और कहा कि नवाज शरीफ भारत के खिलाफ बहुत सॉफ्ट हैं। इमरान ने लोगों को यह कहते हुए उकसाया कि, ‘भारत और मोदी को नवाज प्यारे हैं लेकिन वे हमारी सेना से नफरत करते हैं। अब उन्हें इस बात की चिंता है कि अगर इमरान सत्ता में आया तो पाकिस्तान के लिए काम करेगा।’
इमरान खान इससे पहले भी नवाज शरीफ को आधुनिक मीर जाफर कह मोदी की भाषा बोलने वाला बता चुके हैं। इमरान ने अपने पूरे कैंपेन में काफी उग्र तरीके से कश्मीर का मुद्दा उठाया है। भारत को कश्मीर में हिंसा का जिम्मेदार बताया है। यहां तक कि भारत की सर्जिकल स्ट्राइक के बाद इमरान ने काफी तीखे तेवर दिखाते हुए कहा था कि ‘मैं नवाज शरीफ को बताऊंगा कि मोदी को कैसे जवाब देना है।’ अब जिस तरह से इमरान ने भारत के खिलाफ पाकिस्तानी जनता को अपना स्टैंड दिखाया है, वह इसी ओर इशारा कर रहा है कि पड़ोसी मुल्क के प्रति उनकी नीति भारत के लिए हानिकारक हो सकती है।
सेना के पसंदीदा इमरान का ‘तालिबान खान’ वाला संस्करण
पाकिस्तान में भी एक उदारवादी धड़ा बसता है। इस उदारवादी धड़े के बीच पिछले कुछ सालों से इमरान खान एक अलग नाम से भी जाने जाते हैं। यह नाम है ‘तालिबान खान’।
दरअसल, पाकिस्तान के कट्टरपंथी धड़ों का समर्थन करने की वजह से इमरान को यह नया नाम मिला है। इमरान की इस तरह की राजनीति नई नहीं है। 2013 में अमेरिकी ड्रोन हमले में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) का कमांडर वली-उर-रहमान मारा गया था। उस समय इमरान ने उसे ‘शांति समर्थक’ के खिताब से नवाजा था।
इमरान का यह तालिबान प्रेम पिछले सालों में इस कदर सार्वजनिक रहा है कि गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर पश्चिम प्रांत खैबर पख्तुनख्वा में उनकी प्रांतीय गठबंधन सरकार ने 2017 में हक्कानी मदरसे को 30 लाख डॉलर की मदद दी। हक्कानी मदरसे को एक तरह से तालिबान का बैक बोन कहा जाता है। पूर्व तालिबान चीफ मुल्ला उमर समेत अन्य नेताओं ने यहीं से शिक्षा हासिल की थी। इमरान को पाकिस्तानी सेना का फेवरिट माना जा रहा है। पाकिस्तानी की राजनीति में काफी अंदर तक धंसी इस मुल्क की सेना कभी भी भारत के साथ अच्छे संबंधों की हिमायती नहीं रही है।
ऐसे में इस बात की आशंका है कि इमरान के हाथ में अगर सत्ता आई तो पाकिस्तान में कट्टरपंथियों को उभार मिलेगा। ये कट्टरपंथी पाकिस्तान में बैठ भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम देते हैं। ऐसे में इनके मजबूत होने की आशंका मात्र ही भारत के लिए खतरनाक नजर आती है। इमरान खान के उलट नवाज शरीफ भारत के साथ वार्ता के पक्षधर रहे हैं। भारत में नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद नवाज शरीफ उन नेताओं में शामिल थे जो शपथ ग्रहण समारोह में आए।
इसी तरह 2015 में मोदी अपनी अफगानिस्तान यात्रा के दौरान अचानक पाकिस्तान पहुंच गए। वहां उन्होंने नवाज से एक ऐसी मुलाकात की जो पहले से तय नहीं थी। इमरान खान ने इस मुलाकात पर टिप्पणी करते हुए ‘हितों का टकराव’ बताया था। हालांकि तब इमरान खान ने यह भी कहा था कि वह दोनों देशों के बीच संबंधों में गर्माहट का स्वागत करते हैं। ऐसे में अगर पाकिस्तान में इमरान की ताजपोशी हुई तो तमाम आशंकाओं के बीच उम्मीद तो की ही जा सकती उन्हें 2015 में रिश्ते की जो गर्माहट पसंद थी, वह आज और कल भी रास आएगी।
-एजेंसी

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