पाकिस्‍तान: नवाज शरीफ के कबूलनामे ने शुरू कराई मुंबई हमलों की सुनवाई

इस्लामाबाद। पाकिस्तान की आतंकरोधी अदालत (ATC) ने साल 2008 के मुंबई हमलों की सुनवाई बुधवार को दोबारा शुरू कर दी। कोर्ट ने इस मामले में पिछले दो पाकिस्तानी अभियोजन गवाहों को अपने बयान दर्ज करने के लिए भी बुलाया।
पूर्व पाकिस्तानी पीएम नवाज शरीफ के 26/11 हमलों को लेकर कबूलनामे के बाद यह 10 साल पुराना केस फिर से शुरू हुआ है। दरअसल, नवाज शरीफ ने एक इंटरव्यू में माना था कि यह हमला पाकिस्तानी आतंकियों ने किया था और इसकी सुनवाई में देरी के लिए सरकार और सेना को जिम्मेदार ठहराया था।
कोर्ट ने बुधवार को सरकारी अधिकारियों को निर्देश दिया है कि 27 भारतीय गवाहों की मौजूदगी के संबंध में सभी जानकारियां अगली सुनवाई तक अदालत को दी जाएं।
ATC जज शाहरुख अर्जुमंद ने कहा, ‘फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) और गृह तथा विदेश मंत्रालय को लगातार नोटिस जारी करने के बावजूद जनवरी 2016 से अब तक कोर्ट को भारतीय गवाहों के बारे में जानकारी नहीं दी गई है।’
कोर्ट ने कहा, ‘अब केस अपने आखिरी चरण में है और सिर्फ 2 पाकिस्तानी अधिकारियों के बयान दर्ज करने बाकी हैं इसलिए FIA के डायरेक्टर जनरल, गृह मंत्री और विदेश मंत्री को नोटिस जारी किया गया था कि वे अपना ठोस और आखिर जवाब कोर्ट में दर्ज करें तथा 27 भारतीय गवाहों की मौजूदगी के बारे में भी बताएं ताकि सुनवाई को जल्द से जल्द पूरा किया जा सके।’
बता दें कि त्वरित न्याय के लिए बनी ATC अभी तक इस केस में एक भी पाकिस्तानी आरोपी को सजा नहीं दे पाई है।
बीते साल अभियोजन पक्ष ने 68 पाकिस्तानी गवाहों के बयान दर्ज किए थे।
जनवरी 2016 में इस्लामाबाद ने नई दिल्ली से कहा था कि वे इस केस के सभी गवाहों को पाकिस्तान भेजे ताकि जांच पूरी की जा सके। हालांकि, भारत ने पाकिस्तान से पहले मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद पर केस दर्ज कर सुनवाई शुरू करने को कहा था, जिसके खिलाफ पहले ही पर्याप्त सबूत दिए जा चुके हैं। सितंबर, 2016 में भारत मुंबई हमलों से जुड़े सबूत पाकिस्तान से साझा करने को राजी हो गया था।
साल 2008 में हुए मुंबई हमले में मुख्य आरोपी जुकीउर रहमान लखवी है। इसके अलावा अब्दुल वाजिद, मजहर इकबाल, हमद आमीन सादिक, शाहिद जमील रियाज, जमील अहमद और युनूस अंजुम पर भी साल 2009 से ATC में मुकदमा चल रहा है। बीते साल FIA ने सुफयान जफर को भी गिरफ्तार किया था, जिसने इस हमले के लिए कथित तौर पर धन मुहैया कराया था।
अप्रैल 2015 में लाहौर हाई कोर्ट ने लखवी को 5 साल जेल में रहने के बाद बेल दे दी थी। बुधवार को कोर्ट ने लखवी की पेशी से छूट वाली याचिका को भी स्वीकार कर लिया। हमले के वक्त लखवी प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कल-ए-तैयबा का संचालक था। मुंबई हमलों में 166 लोगों की जान गई थी।
-एजेंसी

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