पाकिस्तान ने 11 खूंखार आतंकियों को दी फांसी

इस्लामाबाद । पाकिस्तान में आतंकवादियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की खबर सामने आ रही है। पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने 11 खूंखार आतंकवादियों को फांसी दिए जाने की पुष्टि की है। इन्हें विशेष सैन्य अदालतों ने 60 लोगों की जान लेने पर यह सजा सुनाई थी। मारे गए लोगों में 26 आम नागरिक, 24 सशस्त्र बलों के जवान, सीमांत सिपाहीं व पुलिस अधिकारी शामिल थे।

इनके हमलों में 142 लोग घायल भी हुए थे। मीडिया से आई खबर के मुताबिक, इनके ठिकानों से हथियार और गोला बारूद भी बरामद किया गया था। खबरों के मुताबिक, ये आतंकी सुरक्षा बलों पर हमले व मलकंद यूनिवर्सिटी में हमला कर मासूमों की जान लेने की वारदातों में शामिल थे। मारे गए नागरिकों में खैबर पख्तूनख्वा विधानसभा के एक सदस्य भी शामिल थे। इन सभी ने ट्रायल कोर्ट में अपना अपराध कुबूल किया था। तीन अन्य को कारावास मिला है।

उनके अलावा तीन अन्य दोषियों को सैन्य अदालत के द्वारा आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। बयान के मुताबिक, ये सभी 2014 में पेशावर में स्कूली हमले के दोषी थे। हालांकि सुरक्षा कारणों के चलते अदालती कार्रवाही और सजा दिए जाने के स्थान के विवरण का खुलासा नहीं किया गया है।

अमेरिका का दबाव

अमेरिका ने हमेशा से आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने पर पाकिस्तान की निंदा की है। कुछ समय पहले अमेरिकी सेना के वरिष्ठ कमांडर ने कहा था कि पाकिस्तान ने तालिबान और हक्कानी नेटवर्क जैसे आतंकी संगठनों के खिलाफ अभी तक निर्णायक कार्रवाई नहीं की है। ऐसे में पाकिस्तान को अमेरिकी सुरक्षा सहायता पर रोक जारी रहेगी।
जनरल जोसफ वोटेल की टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ अधिक कार्रवाई करने के लिए पाकिस्तान पर दबाव बढ़ाया है। पिछले महीने की शुरुआत में अमेरिका ने आतंकी संगठनों को पनाह देने को लेकर पाकिस्तान को दो अरब डॉलर (करीब 13049 करोड़ रुपये) की सुरक्षा सहायता रोक दी थी। वोटेल ने कहा, ‘मौजूदा स्थिति वैसी ही है। हमें उम्मीद है, भविष्य में हमें इसकी समीक्षा करनी होगी।’

अमेरिकी सेंट्रल कमान के कमांडर वोटेल ने अमेरिकी संसद के उच्च सदन सीनेट की सशस्त्र सेवा समिति के सामने यह बात कही। उनसे पाकिस्तान को अमेरिकी सुरक्षा सहायता रोकने के भविष्य के बारे में पूछा गया था। वोटेल ने कहा कि पाक से संचार, सूचना आदान-प्रदान और मांगी गई विशेष जानकारी में सहयोग बढ़ा है। लेकिन आतंकवाद के खिलाफ खासकर अफगान तालिबान या हक्कानी नेटवर्क के खिलाफ अभी तक पाकिस्तान ने निर्णायक कार्रवाई नहीं की है।

-एजेंसी

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