पाकिस्‍तान: अपने ही बिछाए जाल में फंस गए जनरल बाजवा, चारों तरफ से लानत

इस्‍लामाबाद। पाकिस्‍तानी सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा अपने ही बिछाए जाल में फंसते जा रहे हैं और पाकिस्‍तान में उनके खिलाफ थू-थू होने लगी है।
पाकिस्‍तानी सेना प्रमुख ने राजनीतिक दलों को नसीहत दी थी कि वे सेना को राजनीति में न घसीटें। नेताओं को संयम बरतने की सीख देने वाले जनरल बाजवा खुद ही पाक सियासत में आकंठ डूबे हुए हैं। यही नहीं, पाकिस्‍तानी राजनीति को अस्थिर करने की उनकी नापाक साजिश अब परत दर परत खुलने लगी है।
पाकिस्‍तानी राजनीति में पिछले दिनों तूफान लाने वाले जमीयत उलेमा-ए-इस्‍लाम के नेता गफूर हैदरी ने खुलासा किया है कि जब वह इस्‍लामाबाद में आजादी मार्च कर रहे थे, उस समय जनरल बाजवा ने खुद उन्‍हें बुलाया था। इस मुलाकात के दौरान जनरल बाजवा ने कहा कि आप आजादी मार्च न निकालें। हम नवाज शरीफ के खिलाफ जो कुछ कर रहे हैं, उसमें आप हस्‍तक्षेप न करें।
खुलासे के बाद अब पाकिस्‍तानी सेना प्रमुख की देश में ही थू-थू
पाकिस्‍तान के सामा टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक इस बैठक के दौरान आर्मी चीफ ने यह भी जानना चाहा कि मौलाना फजलुर्रहमान कहीं उनके इस्‍तीफे की तो मांग नहीं कर रहे हैं। जनरल बाजवा ने मौलाना से कहा कि वह धार्मिक कार्ड न खेलें। इस खुलासे के बाद अब पाकिस्‍तानी सेना प्रमुख की देश में ही थू-थू हो रही है। पाकिस्‍तान की चर्चित पत्रकार मरियाना बाबर ने कहा कि बाजवा कहते हैं क‍ि सेना राजनीति में हस्‍तक्षेप नहीं करती है, लेकिन क्‍या नवाज शरीफ एक एलियन हैं ?
मरियाना ने सेना प्रवक्‍ता से पूछा कि क्‍या आप अपने बॉस को यह दिखाएंगे और असत्‍य ट्वीट करने से परहेज करेंगे। खाकी यूनिफार्म की हम इज्‍जत करते हैं, इसलिए इसका अपमान नहीं करिए। हम अपनी सेना को प्‍यार करते हैं। राजनीति में हस्‍तक्षेप की जांच के लिए संयुक्‍त जांच कमेटी का गठन करिए। बता दें कि इन दिनों पाकिस्‍तानी सेना प्रमुख इ‍न दिनों अपनी गुप्‍त बैठक को लेकर विवादों में हैं। इस बैठक में गिलगित-बाल्टिस्‍तान को लेकर चर्चा होनी थी।
बताया जा रहा है कि पाकिस्‍तान के गिलगित प्‍लान के पीछे पाकिस्‍तानी सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा का हाथ है। पाकिस्‍तानी मीडिया के मुताबिक सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने गिलगित को लेकर पिछले दिनों देश की सभी बड़ी पार्टियों के नेताओं को सेना मुख्‍यालय रावलपिंडी में आयोजित दावत में बुलाया था। इसमें नवाज शरीफ के भाई शाहबाज शरीफ, आस‍िफ अली जरदारी के बेटे बिलावल भुट्टो जरदारी समेत पाकिस्‍तानी सियासत के कई दिग्‍गज नेता शामिल हुए थे। इस दौरान आईएसआई के प्रमुख भी मौजूद थे।
सेना राजनीतिक मामलों में हस्‍तक्षेप कर रही: बिलावल
बाजवा ने गिलगित को प्रांत बनाए जाने के मुद्दे पर चर्चा की लेकिन उसी दौरान उनकी बिलावल भुट्टो और शाहबाज शरीफ से बहस हो गई। बाजवा ने कहा कि पीओके पर भारत की कार्यवाही का डर है और चीन इस इलाके में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है। ऐसे में हम गिलगित को एक नया प्रांत बनाना चाहते हैं। पाकिस्‍तानी सेना प्रमुख चाहते थे कि गिलगित को प्रांत बनाने के लिए राजनीतिक दल उनका समर्थन करें। इसी दौरान बिलावल ने राजनीतिक मामले में सेना के हस्‍तक्षेप का मुद्दा उठा दिया। बिलावल भुट्टो ने कहा कि इसी तरह के हालात वर्ष 1971 में थे और उस समय भी सेना राजनीतिक मामलों में हस्‍तक्षेप कर रही थी।
उधर, नवाज शरीफ की बेटी मरियम नवाज शरीफ और पाकिस्तान मुस्लिम लीग (PMLN) की उपाध्यक्ष मरयम नवाज ने कहा है कि यह एक सरकारी मुद्दा है और इस पर फैसला संसद में होगा, न कि सेना मुख्यालय। मरयम ने अपनी पार्टी के किसी नेता के इस बैठक में शामिल होने से इंकार किया है। उनका कहना है कि यह राजनीतिक मुद्दा है और इसे संसद में सुलझाना चाहिए, न कि सेना के मुख्यालय में। मरयम ने कहा है कि मुख्यालय को राजनीतिक नेताओं को ऐसे मुद्दों पर नहीं बुलाना चाहिए और न ही नेताओं को वहां जाना चाहिए।
-एजेंसियां

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