पीओके में Sharada Peeth कॉरिडोर को पाकिस्‍तान ने दी मंजूरी

नई दिल्‍ली। पाकिस्तान ने अब Sharada Peeth कॉरिडोर को खोलने का निर्णय लिया है। सिख श्रद्धालुओं के लिए उनके पहले गुरु गुरुनानक देव की कर्मस्थली करतारपुर तक पहुंचना आसान हो, इसके लिए भारत और पाकिस्तान ने करतारपुर कॉरिडोर बनाने का निर्णय लिया था। दोनों देशों के इस फैसले से सिख श्रद्धालुओं के लिए पवित्र गुरुद्वारा ननकाना साहिब जाना आसान हो जाएगा। इसके साथ ही पाकिस्तान ने अब Sharada Peeth कॉरिडोर को खोलने का निर्णय लिया है।

पीओके में 5000 साल पुराने मंदिर के दर्शन कर सकेंगे श्रद्धालु

पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक पाक सरकार ने शारदा पीठ कॉरिडोर को खोलने के लिए हरी झंडी दिखा दी है। बता दें कि कश्मीरी पंडितों का एक समूह शारदा पीठ को खोलने की मांग कर रहा है। यह एक महत्वपूर्ण मंदिर है जो लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) में आता है। यही नहीं, जम्मू-कश्मीर की मुख्यधारा में रहे राजनीतिक दल जैसे पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) भी इसे लेकर अपनी आवाज उठाती रही है।

पाकिस्तान ने हिंदुओं के पवित्र धर्मस्थल शारदा पीठ पर कॉरिडोर बनाने को मंजूरी दे दी है। शारदा पीठ मंदिर पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में स्थित है। यह कश्मीर के कुपवाड़ा से करीब 22 किलोमीटर दूर है। पाक मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बारे में जल्द ही ऐलान किया जा सकता है। शारदा पीठ हिंदुओं का 5 हजार साल पुराना धर्मस्थल है। इसे महाराज अशोक ने 237 ईसा पूर्व में बनवाया था।

कश्मीर में रहने वाला हिंदू समुदाय लंबे समय से इस कॉरिडोर को बनाने की मांग कर रहा था। यही नहीं, जम्मू-कश्मीर की मुख्यधारा में रहे राजनीतिक दल जैसे पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) भी इसे लेकर अपनी आवाज उठाती रही है। लाइन ऑफ कंट्रोल से इस पीठ की दूरी 10 किलोमीटर है।

देवी के 18 शक्ति पीठों में से एक शारदा पीठ
श्रीनगर से करीब 130 किलोमीटर की दूरी पर स्थित शारदा पीठ देवी के 18 शक्ति पीठों में से एक है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार यहां देवी सती का दायां हाथ गिरा था। इस मंदिर को ऋषि कश्यप के नाम पर कश्यपपुर के नाम से भी जाना जाता था। शारदा पीठ में देवी सरस्वती की आराधना की जाती है। वैदिक काल में इसे शिक्षा का केंद्र भी कहा जाता था। मान्यता है कि ऋषि पाणीनि ने यहां अपने अष्टाध्यायी की रचना की थी।

कैसे उठी शारदा पीठ कॉरिडोर की मांग?
1947 में भारत और पाक के अलग होने के बाद हिंदू श्रद्धालुओं को मंदिर के दर्शन में परेशानी आने लगी। 2007 में कश्मीरी अध्येता और भारतीय संस्कृति संबंध परिषद के क्षेत्रीय निदेशक प्रोफेसर अयाज रसूल नज्की ने इस मंदिर का दौरा किया था। इसके बाद से ही भारतीय श्रद्धालुओं को दर्शन की अनुमति की मांग उठने लगी। कश्मीरी पंडितों को मंदिर के दर्शन की इजाजत दिलवाने के लिए बनी शारदा बचाओ कमेटी ने इसके लिए भारत सरकार के साथ-साथ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को भी पत्र लिखा। इसमें मांग की गई थी कि श्रद्धालुओं को मुजफ्फराबाद के रास्ते मंदिर के दर्शन की अनुमति दी जाए।

पांच हजार साल पुराना है मंदिर का इतिहास
शारदा पीठ मंदिर पाक प्रशासित कश्मीर (पीओके) में स्थित है। कश्मीर के कुपवाड़ा से करीब 22 किलोमीटर दूर स्थित इस मंदिर के विषय के बारे में माना जाता है कि शारदा पीठ मंदिर हिंदुओं का करीब पांच हजार साल पुराना धर्मस्थल है। इतिहासकारों के मुताबिक महाराज अशोक ने इसे 237 ईसा पूर्व में इसका निर्माण कराया था।
-एजेंसी

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