पाकिस्‍तान: 70 साल के इतिहास में कोई प्रधानमंत्री नहीं कर पाया अपना कार्यकाल पूरा

पाकिस्तान में 1947 से अब तक 70 साल के इतिहास में 17 प्रधानमंत्री (नवाज शरीफ और बेनजीर भुट्‌टो के सभी कार्यकाल एकसाथ) बने और इनमें कोई भी 5 साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया। तीन बार लोकतांत्रिक रूप से चुनी सरकार का सेना ने तख्तापलट किया, एक प्रधानमंत्री की हत्या हुई जबकि एक को फांसी की सजा दी गई। 12 प्रधानमंत्रियों को अलग-अलग आरोप लगाकर सत्ता से बेदखल कर दिया गया। पिछले साल भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते नवाज शरीफ को भी उनके पद से हटा दिया गया। इसी के साथ पाक के इतिहास में वह 17वें ऐसे प्रधानमंत्री बने, जो अपना कार्यकाल पूरा करने में नाकाम रहे।
1947 में आजादी के बाद पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री बने लियाकत अली खान की रावलपिंडी में हत्या कर दी गई थी। वह अपने कार्यकाल के 4 साल पूरे कर पाए थे। इसके बाद प्रधानमंत्री बने ख्वाजा नजीमुद्दीन को सिर्फ 18 महीने बाद 1953 में ही गवर्नर जनरल मलिक गुलाम मोहम्मद के आदेश पर पद छोड़ना पड़ा था। अगले प्रधानमंत्री मोहम्मद अली बोगरा बने। इस बार भी पाकिस्तान के नए और आखिरी गवर्नर इस्कंदर मिर्जा ने 1955 में उनकी सरकार को नाकाम बताते हुए सत्ता से बेदखल कर दिया।
राष्ट्रपति पद बनने के बाद भी विवाद जारी रहा : 1955 में पाकिस्तान में संविधान लागू किया गया। इसमें गवर्नर पद को खत्म कर इस्कंदर मिर्जा को पहला राष्ट्रपति घोषित किया गया। इसके बाद प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के बीच विवादों का दौर शुरू हुआ। 1955 में चौधरी मोहम्मद अली पाक के प्रधानमंत्री बने। एक साल बाद सितंबर 1956 में उन्होंने राष्ट्रपति मिर्जा से विवाद के बाद इस्तीफा दे दिया। इसके बाद 1956 में अवामी लीग से चुनकर आए हुसैन शाहिद सुहरावर्दी को प्रधानमंत्री चुना गया, लेकिन राष्ट्रपति से विवाद के बाद उन्हें भी एक साल में ही हटा दिया गया। इस्कंदर मिर्जा ने इब्राहिम इस्माइल चुंद्रिगर को प्रधानमंत्री बनाया लेकिन सिर्फ दो महीने बाद ही चुंद्रिगर ने दिसंबर 1957 में इस्तीफा दे दिया। मिर्जा ने पाकिस्तान के सातवें प्रधानमंत्री के रूप में फिरोज खान नून को नियुक्त किया।
पहला सैन्य तख्तापलट, 15 साल तक बिना प्रधानमंत्री के रहा पाक : देश में लगातार बिगड़ते राजनीतिक हालात को देखते हुए 1958 में जनरल अयूब खान ने सैन्य तख्तापलट को अंजाम दिया। प्रधानमंत्री को पद से हटा दिया। राष्ट्रपति को इस्तीफा देने के लिए मजबूर कर दिया। इसके बाद अयूब खान खुद राष्ट्रपति बन गए और प्रधानमंत्री पद 13 साल (1958 से 1971) के लिए खत्म कर दिया गया।
दूसरा सैन्य तख्तापलट, प्रधानमंत्री को फांसी : 1971 में भारत से जंग हारने और बांग्लादेश के आजाद होने के बाद पाकिस्तान में सेना का राज खत्म हुआ और जुल्फिकार अली भुट्टो देश के राष्ट्रपति बने। इस दौरान नूरुल अमीन 8वें प्रधानमंत्री घोषित किए गए, लेकिन 13 दिन ही पद पर रहे। इसके दो साल बाद 1973 में पाकिस्तान का नया संविधान प्रभावी हुआ और भुट्टो ने इसमें अपने लिए प्रधानमंत्री पद चुना। हालांकि, 1977 में ही एक बार फिर जनरल जिया उल-हक ने सैन्य तख्तापलट किया और खुद को राष्ट्रपति घोषित कर लिया। 1979 में हक ने भुट्टो पर चुनाव में हेराफेरी करने का आरोप लगाया और उन्हें फांसी दे दी।
बेनजीर बनीं प्रधानमंत्री, 20 महीने चली सरकार : 1977 से 1985 तक पाकिस्तान में सैन्य शासन रहा। इस दौरान सेना ने ही 1985 में मोहम्मद खान जुनेजो को देश का 10वां प्रधानमंत्री बनाया लेकिन जुनेजो की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के चलते सेना ने मई 1988 में उनकी सरकार हटा दी। अगस्त 1988 में जिया-उल-हक की मौत के साथ ही देश में सेना का राज खत्म हुआ और चुनाव में जुल्फिकार भुट्टो की बेटी बेनजीर भुट्टो को प्रधानमंत्री पद मिला। उनकी सरकार सिर्फ 20 महीने ही चल पाई। 1990 में राष्ट्रपति गुलाम इशहाक खान ने उन्हें सत्ता से बेदखल कर दिया। 1990 में नवाज शरीफ पाकिस्तान के 12वें प्रधानमंत्री बने। 1993 तक सरकार में रहने के बाद इशहाक खान ने उनकी सरकार भी गिरा दी। 1993 से 1999 तक नवाज शरीफ 2 बार और बेनजीर भुट्‌टो एक बार सत्ता में रहे।
तीसरा सैन्य तख्तापलट, 11 साल में बदले 7 प्रधानमंत्री : 1999 में कारगिल युद्ध के बाद पाकिस्तान के तत्कालीन आर्मी चीफ जनरल परवेज मुशर्रफ ने देश में इमरजेंसी लगा दी और नवाज सरकार का तख्तापलट कर दिया। ये इमरजेंसी करीब 3 साल तक चली, जिसके बाद 2002 में देश में फिर चुनाव कराए गए। उस वक्त 13वें प्रधानमंत्री के रूप में जफरुल्लाह खान जमाली ने शपथ ली। इसके बाद 2004 में चौधरी सुजात हुसैन प्रधानमंत्री बने। महज एक महीने 27 दिन बाद ही पाकिस्तान को शौकत अजीज 15वें प्रधानमंत्री के रूप में मिले। 2008 में मुशर्रफ के राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) की सरकार बनी। प्रधानमंत्री चुने गए यूसुफ रजा गिलानी 2012 तक 4 साल का कार्यकाल पूरा कर पाकिस्तान के दूसरे लंबे कार्यकाल वाले प्रधानमंत्री बने। सुप्रीम कोर्ट की अवज्ञा मामले में गिलानी को हटा दिया गया। 2012 में राजा परवेज अशरफ को 17वां प्रधानमंत्री चुना गया।
शरीफ की सत्ता में वापसी, भ्रष्टाचार के चलते विदाई : 2013 के आम चुनाव में शरीफ की पार्टी पीएमएल-नवाज ने जीत हासिल की और चौथी बार सरकार बनाई। हालांकि, 2017 में पनामा पेपरगेट में नाम सामने आने के बाद उन्हें अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ गई।
-एजेंसी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »