पद्मभूषण महाकवि गोपालदास नीरज की अस्थियां गंगा में विसर्जित

न जन्म कुछ, न मृत्यु कुछ बस इतनी सिर्फ बात है,
किसी की आंख खुल गई, किसी को नींद आ गई

काव्यमंच से कभी इन पंक्तियों को पढ़ने वाले पद्मभूषण महाकवि गोपालदास नीरज की अस्थियां मंगलवार को हरिद्वार में विसर्जित कर दी गईं। विसर्जन से पहले अस्थि कलश बेटे नीरज गुंजन के हरिद्वार स्थित आवास पर रखा गया।

पद्मभूषण महाकवि गोपालदास नीरज का 94 वर्ष की आयु में दिल्ली स्थित एम्स में निधन हो गया था। वह पिछले कुछ दिनों से बीमार थे। गुरुवार 19 जुलाई को उन्होंने आखिरी सांस ली थी। शनिवार को उनका पार्थिव शरीर दिल्ली से अलीगढ़ लाया गया था। यहां जनकपुरी आवास से अंतिम यात्रा शुरू होकर नुमाइश ग्राउंड स्थित कृष्णांजलि नाट्यशाला में लोगों की भीड़ अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी थी। जिसके बाद मोक्षधाम में अंतिम संस्कार किया गया। मंगलवार तड़के पुत्र नीरज गुंजन, पौत्र पल्लव नीरज व कवि नीरज के प्रशंसक अस्थि लेकर हरिद्वार के लिए रवाना हुए थे।
करीब 11 बजे बजे हरिद्वार में शिवालिक नगर में नीरज गुंजन अपने घर पिता का अस्थि कलश लेकर पहुंचे। जहां स्थानीय लोगों ने अंतिम दर्शन कर अस्थि कलश पर पुष्प अर्पित किए। दोपहर 12 बजे परिजन हर की पौड़ी स्थित ब्रह्म कुंड पहुंचे। जहां अस्थि विसर्जन संस्कार किया गया। जिसके बाद अस्थियों और चिता की राख को गंगा में प्रवाहित कर दिया गया। इस दौरान नासिर अब्बास, राकेश सक्सेना आदि मौजूद थे।
-एजेंसी

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