Saravana Bhavan के मालिक पी राजगोपाल का निधन, काट रहे थे उम्रकैद

नई दिल्ली । जानी मानी फूड चेन Saravana Bhavan के मालिक पी राजगोपाल का 72 वर्ष की आयु में गुरुवार को निधन हो गया है। अपने ही एक कर्मचारी की हत्या के मामले में राजगोपाल को उम्र क़ैद की सज़ा दी गयी थीराजगोपाल ने।

राजगोपाल ने Saravana Bhavan के नाम से एक रेस्टोरेंट खोला, इस रेस्टोरेंट में सांभर, वाडा, इडली डोसा जैसी चीजें शामिल की गई। चेन्नई के लोगों के लिए ये वो चीजें थी जिसे वो घर से बाहर निकलकर खा सकते थे। इसमें इन चीजों के टेस्ट पर खास ध्यान दिया गया जिससे लोगों को घर जैसा अहसास हो सके। अब यदि कोई घर के बाहर परिवार के साथ कहीं कुछ खाना चाहता था तो उसके लिए पी राजगोपाल का Saravana Bhavan बेहतर विकल्प था।

Saravana Bhavan के मालिक पी राजगोपाल 9 जुलाई को ही किया था आत्मसमर्पण 

9 जुलाई को ही एक सेशन कोर्ट के सामने उन्होंने आत्मसमर्पण किया था. जेल में उनकी तबीयत ख़राब हो गयी और उन्हें सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन उनकी तबीयत बिगड़ती गयी तो उनके बेटे ने निजी अस्पताल में इलाज के लिए मद्रास हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था।
इसके बाद उन्हें मद्रास हाई कोर्ट से निजी अस्पताल में इलाज की अनुमति मिल गयी और 16 जुलाई को उन्हें जेल से चेन्नई के एक निजी अस्पताल में शिफ़्ट किया गया था।
बताया जाता है कि उन्हें जेल में दिल का दौरा पड़ा था। इसके अवाला उन्हें डायबिटीज, हाइपरटेंशन और किडनी संबंधित बीमारियां थीं।
डॉक्टरों के मुताबिक़ उनके किडनी की बीमारी बहुत अधिक बढ़ गयी थी लिहाज़ा उन्हें दो दिनों से वेंटिलेटर पर रखा गया था.

सुप्रीम कोर्ट से राजगोपाल ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए और समय मांगा था, लेकिन याचिका खारिज होने के बाद उन्हें समर्पण करना पड़ा। वह एम्बुलेंस से अदालत पहुंचे थे।

बता दें कि न्यायमूर्ति एन. वी. रमण के नेतृत्व वाली उच्चतम न्यायालय की पीठ ने स्वास्थ्य कारणों से समर्पण के लिए और वक्त देने की राजगोपाल की याचिका खारिज कर दी थी। पीठ ने कहा कि मामले की अपील पर सुनवाई के दौरान उनकी बीमारी का मुद्दा नहीं उठाया गया था। राजगोपाल ने अक्टूबर 2001 में अपने होटल के एक कर्मचारी की सिर्फ इसलिए हत्या कर दी थी, क्योंकि वह उसकी पत्नी से विवाह करना चाहता था। इस मामले में उम्रकैद की सजा काटने के लिए उसे सात जुलाई को समर्पण करना था।

पी. राजगोपाल ने सजा से बचने के लिए निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक में अपील की मगर वहां से भी उन्हें राहत नहीं मिली, कोर्ट ने उन्हें दोषी मनाते हुए आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी थी।

Saravana Bhavan के नाम से खोला था रेस्टोरेंट 

पी राजगोपाल एक निम्न परिवार से थे। 1981 में उन्होंने चेन्नई में एक जनरल स्टोर (किराने की दुकान) खोली, इसे मद्रास के नाम से खोला गया था। इस काम में राजगोपाल को बहुत अधिक कामयाबी नहीं मिली तो उन्होंने कुछ खाने-पीने का रेस्टोरेंट टाइप का खोलने का मन बनाया। ये वो दौर था जब लोग घर से बाहर खाने के लिए सोचते भी नहीं थे। घर से खाकर निकलते थे और वापस घर पर ही आकर खाया करते थे। ऐसे में इस तरह की चीजें सोचना अपने आप में एक बड़ा निर्णय था।

-BBC

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