Owaisi ने बाबरी मस्जिद पर गोडबोले के दावे को सही बताया

हैदराबाद। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन Owaisi ने बाबरी मस्जिद पर पूर्व केंद्रीय गृह सचिव माधव गोडबोले के दावे को बिल्कुल सही बताया है।
गोडबोले ने कहा था कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने ही बाबरी मस्जिद के ताले खुलवाए थे और यह ऐतिहासिक तथ्य है।
बता दें कि अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी हो चुकी है और इस महीने अदालत का बहुप्रतीक्षित फैसला आने की उम्मीद है।
मीडिया से बातचीत में हैदराबाद सांसद ओवैसी ने दावा किया कि राजीव गांधी ने इसी स्थान (अयोध्या) से अपना चुनाव अभियान भी शुरू किया था।
Owaisi ने कहा, ‘माधव गोडबोले साहब ने जो कुछ कहा है, उसमें सच्चाई है। उन्होंने बिल्कुल सच कहा है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने बाबरी मस्जिद के ताले खुलवाए थे।’
‘शाहबानो मामले का ताले खुलवाने से नहीं था संबंध’
ओवैसी ने आगे कहा, ‘यह ऐतिहासिक तथ्य है। यह भी एक ऐतिहासिक तथ्य है कि ताले खुलवाने के मामले का शाहबानो प्रकरण से कोई लेना-देना नहीं था। राजीव गांधी के बारे में गोडबोले ने जो कुछ कहा है, सच है। जब ताले खोले गए तब यह पार्टी (कांग्रेस) सत्ता में थी और जब विवादित ढांचा ढहाया गया तब कांग्रेस के पीवी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री थे।’
‘कांग्रेस गलती के लिए बराबर की साझीदार’
ओवैसी ने कहा, ‘कांग्रेस इस गलती के लिए बराबर की साझीदार है।’ बीजेपी नेता विनय कटियार के कथित रूप से यह कहने पर कि अयोध्या का फैसला आ जाने के बाद काशी और मथुरा पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, ओवैसी ने उम्मीद जताई कि इस मामले में फैसले से देश में कानून के शासन की पुष्टि होगी।
गोडबोले ने क्या कहा था?
1992 में बाबरी विध्वंस के समय केंद्रीय गृह सचिव रह चुके माधव गोडबोले ने कहा था, ‘अगर राजीव गांधी ने सक्रियता दिखाई होती तो अयोध्या विवाद का समाधान निकाला जा सकता था क्योंकि तब तक राजनीतिक किलेबंदियां नहीं हुई थीं। उस समय लेन-देन की संभावना थी और समाधान स्वीकार्य हो सकता था। राजीव गांधी ने बाबरी मस्जिद के ताले खुलवा दिए। उन्हीं के प्रधानमंत्री रहते हुए मंदिर की नींव रखी गई इसीलिए मैंने उन्हें इस आंदोलन का दूसरा कारसेवक कहा था। पहला कारसेवक उस समय अयोध्या का जिलाधिकारी था, जिसने यह सब होने दिया।’
उस समय की सुरक्षा स्थितियों का जिक्र करते हुए गोडबोले ने कहा, ‘हमने अनुच्छेद 355 लागू करने का प्रस्ताव रखा था, जिसके तहत उत्तर प्रदेश में केंद्रीय सुरक्षा बलों को मस्जिद की रक्षा के लिए भेजा जाता और फिर राष्ट्रपति शासन लगा दिया जाता। हमने एक बेहद प्रासंगिक प्लान बनाया था क्योंकि राज्य सरकार सहयोग नहीं करने वाली थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव को शंका थी कि उन्हें ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति शासन लगाने का संवैधानिक अधिकार है या नहीं।’
-एजेंसियां

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