मोदी के खिलाफ विपक्षी एकता का पता तो 2019 से पहले ही लग जाएगा

नई दिल्ली। राज्य सभा के उपसभापति पी. जे. कुरियन 1 जुलाई को रिटायर हो रहे हैं। इसके बाद उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू को नए डेप्युटी चेयरमैन के चुनाव की प्रक्रिया को संपन्न कराना है। एक तरफ बीजेपी आम सहमति बनाकर इस पोस्ट को अपने उम्मीदवार के लिए सुरक्षित करना चाहती है तो वहीं विपक्षी पार्टियां एक संयुक्त उम्मीदवार की संभावनाएं तलाश रही हैं। ऐसे में 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले यह विपक्षी एकता का असली टेस्ट भी साबित होगा।
आंकड़ों का गणित
बीजेपी के पास 106 सांसदों का समर्थन है, जिसमें AIADMK के 14 MPs शामिल हैं। उधर, विपक्षी पार्टियों का सम्मिलित आंकड़ा 117 तक पहुंच रहा है, जिसमें TDP भी शामिल है। हालांकि 245 सदस्यीय सदन में जीत के लिए 122 वोटों की जरूरत होगी। ऐसे में समीकरण फिलहाल इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि दोनों पक्षों को अतिरिक्त वोट की जरूरत होगी।
अब सबके निशाने पर BJD, TRS और YSRCP जैसी क्षेत्रीय पार्टियां हैं जो NDA और विपक्षी पार्टियों के बीच कुर्सी की रेस में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं। दोनों ही पक्ष अब इन पार्टियों को साधने में जुट गए हैं।
इसलिए अहम है यह चुनाव
राज्य सभा में बहुमत न होना बीजेपी के लिए बड़ी समस्या है। आम चुनाव से एक साल पहले पार्टी कानूनों को पास कराना चाहेगी और इसके लिए चेयरमैन (वेंकैया नायडू) और डेप्युटी चेयरमैन बड़े मददगार साबित हो सकते हैं। उधर, कांग्रेस के लिए उपसभापति की सीट पर कब्जा जमाना उसके लिए किसी ‘संजीवनी’ से कम नहीं होगा, लेकिन वह किसी गैरकांग्रेसी उम्मीदवार को सहयोग देने के लिए भी मजबूर हो सकती है।
-एजेंसी

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