कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग लेकर राष्‍ट्रपति से मिले विपक्षी नेता

नई दिल्‍ली। केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों पर अपनी चिंताओं से अवगत कराने और इसे वापस लेने की मांग को लेकर विपक्षी दलों का एक प्रतिनिधिमंडल नौ दिसंबर को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात करने पहुंचा। इस प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, राकांपा प्रमुख शरद पवार, द्रमुक के एक प्रतिनिधि, भाकपा के महासचिव डी राजा और माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी शामिल थे।
कृषि कानूनों के मुद्दे पर राष्ट्रपति से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में शामिल सभी पार्टियां भारत बंद का समर्थन कर चुकी हैं। दरअसल, भाजपा ने एनसीपी प्रमुख शरद पवार पर निशाना साधते हुए कहा था कि यूपीए सरकार में कृषि मंत्री के तौर पर शरद पवार ने राज्यों को एपीएमसी कानून में संशोधन करने को कहा था। पवार ने राज्यों को आगाह किया था कि अगर सुधार नहीं किए गए, तो केंद्र की तरफ से वित्तीय सहायता नहीं दी जाएगी। लेकिन अब पवार खुद विरोध कर रहे हैं।
* सीताराम येचुरी ने कहा, “हमने राष्ट्रपति को एक ज्ञापन दिया है। हमने उनसे कृषि कानून और बिजली संशोधन बिल को रद्द करने की मांग की है जिसे बिना किसी उचित विचार-विमर्श और सलाह के अलोकतांत्रिक तरीके से पास किया गया था।”
* राष्ट्रपति से मुलाकात करने के पहले सीताराम येचुरी ने कहा, “तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को 25 से अधिक विपक्षी दलों ने अपना समर्थन दिया है। ये कानून भारत के हक में नहीं हैं और यह हमारी खाद्य सुरक्षा के लिए भी खतरा है।”
* कांग्रेस के नेता राहुल गांधी राष्ट्रपति भवन पहुंचे। कृषि क़ानून को लेकर विपक्षी दलों के नेताओं की राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ एक बैठक है।
क्या है मामला
कृषि क्षेत्र में बड़े सुधार के तौर पर सरकार ने सितंबर में तीनों कृषि कानूनों को लागू किया था। सरकार ने कहा था कि इन कानूनों के बाद बिचौलिए की भूमिका खत्म हो जाएगी और किसानों को देश में कहीं पर भी अपने उत्पाद को बेचने की अनुमति होगी। वहीं, किसान तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग पर अड़े हुए हैं। प्रदर्शन कर रहे किसानों का दावा है कि ये कानून उद्योग जगत को फायदा पहुंचाने के लिए लाए गए हैं और इनसे मंडी और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की व्यवस्था खत्म हो जाएगी।
-एजेंसियां

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