Civil society ने नीति आयोग में भी दर्ज करवाया विरोध

Civil society ने साक्ष्‍य प्रस्‍तुत करते हुए कहा कि NIACL मुखौटा कंपनीयों (शैल कंपनीयों) के समकक्ष्‍ा

Civil society ने कहा- 4065 करोड़ का गैर जरूरी निवेश बिगाड़ के रख देगा यूपी का अर्थतंत्र

आगरा। आगरा Civil society के द्वारा NIACL (नौयडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट कंपनी लिमिटैड) के विरोध में तमाम अनियमित्‍ताओं के संबध में नीति आयोग भारत सरकार को एक तमाम जानकारियों से युक्‍त एक विस्‍तृत पत्र भेजा है।

NIACL नौयडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और इसके लिये गठित की गयी सरकारी कंपनी है।

दरअसल Civil society आगरा ने ‘नौयडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट कंपनी लिमिटैड’ को मुखौटा कंपनीयों (शैल कंपनीयों) के समकक्ष्‍ा बताते हुए अनियमितताओं की भरमार वाला बताते हुए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड — सेबी (SEBI-Securities and Exchange Board of India) के चेयरमैन को पत्र लिखकर कंपनी और इसके निवेशकों क विरूद्ध जांच की तथा अनिवार्य औपचारकतायें पूरी न होने तक कंपनी को पंजीकृत न करने का आग्रह किया था।

सेबी को लिखे गये इस पत्र के प्रत्‍युत्‍तर में नीति आयोग से प्राप्‍त पत्र (Ref- July/2018/03) के जबाब में Civil society के द्वारा एक बार पुन: उन आरोपों और अनियमितताओं की पुष्‍टि की है जो कि सेबी को लिखे पत्र में समाहित किये थे।

Civil society के सेकेट्री अनिल शर्मा का कहना है कि यह केवल एयरपोर्ट प्राजेक्‍ट से जुडा हुआ मामला ही नहीं है, कुछ व्‍यक्‍तियों की राजनैतिक महत्‍वकांक्षा को पूरा करने के लिये जनता की गाढी कमाई को गैर जरूरी क्षेत्र में निवेश को की जा रही कोशिशों से जुड़ा मुद्दा है। 4065 करोड की राशि का अलाभकरी योजना पर खर्च किया जाना कोई छोटा मामला तो नहीं है।

निजी निवेशकों को आकर्षित नहीं कर सका प्रोजेक्ट

एयरपोर्ट के बारे में सिविल सोसायटी की ओर से कहा गया है कि उप्र सरकार ने विशेष उद्धेश्‍य परक निगम ( ए पी बी -स्‍पेशल परपज व्‍हैकिल) कंपनी का गठन कर सरकारी निवेश के सहारे ही जनता के धन से जेवर ग्रीन फील्‍ड इंटरनेशनल एयरपोर्ट को बनाये जाने को कार्य प्रारंभ किया है। जबकि यह एक ग्रीन फील्‍ड प्रोजेक्‍ट है और ग्रीनफील्‍ड प्रोजेक्‍ट के तहत बनाये जाने वाले इंटरनेशनल एयरपोर्टों के केन्‍द्र सरकार की घोषित नीति के तहत निजी क्षेत्र के निवेशकों से ही निवेश जुटाये जाने थे। सरकार को कंपनी गठित कर व्‍यापार करने या किसी कार्य को पूरा करवाये जाने का अधिकार है किन्‍तु जेवर एयरोर्ट के लिये गठित की गयी कंपनी उन आधारभूत औपचारिकताओं को भी पूरा नहीं करती जिनके न होने पर सामान्‍य निजी क्षेत्र के निवेशक की कंपनी को सरकार मुखौटा कंपनी (शैल कंपनी) ठहरा देती रही है।

मुखौटा कंपनियों के समरूप स्‍थिति
मसलन कंपनी के पास न तो अब तक नेशनल कैपीटल रीजन ( एन सी आर) का अपने प्रोजेक्‍ट ‘ग्रीनफील्‍ड इंटरनेशनल एयरपोर्ट ‘ के लिये एन ओ सी है और ना ही इसको बनाये जाने के लिये जमीन ही। यही नहीं सरकार के दबाव के आधार पर कंपनी की ओर से जो भी प्रयास अब तक किये गये हैं, किसानों ने उनका विरोध ही किया है। कंपनी जिस दर पर जमीन खरीदना चाहती है किसान उस दर पर बेचना नहीं चाहते हैं। भूमि से अपना हक खोने के लिये किसान शायद तैयार भी हो जाता किन्‍तु उसके सामने दिशा हीनता की स्‍थिति उपस्‍थित होने का संशय सबसे बडी दुविधा है।

दिशाहीन किसान चाहते हैं चकबंदी

सरकार की ओर से जमीन देने वाले किसानों के परिवार के एक सदस्‍य को नौकरी देने की बात कही जा रही है किन्‍तु अभी तक यह स्‍पष्‍ट नहीं किया जा का है कि किसे नौकरी दी जायेगी और कंपनी या राज्‍य सरकार में से कौन नौकरी देगा।

यही नहीं इससे भी बडी समस्‍या है कि अविभाजित हिन्‍दू और मुस्‍लिम परिवारों के मुखियाओं के सामने अपने परिवार के उस एक सुपात्र का चयन मुश्‍किल भरा हो गया है जिसके लिये वे नौकरी पानी की सिफारिश कर सकें।

अधिकांश किसान चाहते हैं कि जेवर तहसील की चकबन्‍दी हो जाये खसरा -खतौनी अपडेटेड हो जायें जिससे कि पूरे परिवार का नाम जमीन की पैमाइश के साथ राजस्‍व रिकार्डों के अनुसार अपडेटेड हो जाये जिससे कि जमीन के एवज में नौकरी पाने का हक परिवार के कई पात्रों के लिये संभव हो सकेगा।

भूमि हीन ग्रामीणों के मामले पर चुप्‍पी

जमीन के मालिक किसानों की स्‍थिति के अलावा प्रोजेक्‍ट के लिये उजड़ने वाले 8 गांवों के किसानों में से भूमिहीन असंगठित क्षेत्र के किसानों और उनके परिवरों के बारे में पुनर्वास और वैकल्‍पिक रोजगार को लेकर न तो उ प्र सरकार और नहीं निवेश्‍क कंपनी ‘नोयडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट कंपनी लिमिटेड’ के पास ही कोयी योजना है।

निवेश बाजार को आकर्षित नहीं कर सका प्रोजेक्ट

‘नौयडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट कंपनी लिमिटेड’ का गठन जनता के धन का उपयोग संभव करने के लिये किया गया माना जा रहा है, भारत के निवेशक ही नहीं अतर्राष्‍ट्रीय बाजार तक उ प्र सरकार के इस प्रयास को अब तक केवल राजनैतिक महत्‍वाकांक्षा को पूरा करने से अधिक नहीं मान सके हैं। धन जुटाने के लिये सरकार ने अपने अलावा नौयडा डवलपमेंट अथार्टी , ग्रटी नोयडा डवलपमेंट अथार्टी, यमुना एक्‍सप्रेस वे इंटस्‍ट्रियल डवलपमेंट अथार्टी को कंपनी में भागीदार बनाया है।

कंपनी की सहभागी अथार्टियां खुद फंसी हैं गंभीर जांचों में

उ प्र सरकार तो पब्‍लिक टैक्‍स वसूलने की हकदार है, जबकि अन्‍य तीनो अथार्टियों को अपना राजस्‍व जुटाने के लिये मुख्‍य रूप से जमीन और संपत्‍तियों से जुड़े कारोबार अर्जित मुनाफे पर ही निर्भर रहना पड़ता है। तीनों ही अथार्टियां वर्तमान में अपनी साख के संकट से जूझ रही हैं। भूमि घोटाला, अपूर्ण प्रोजेक्‍ट, गैर जरूरी खर्च आदि के लिये ज्‍यादा चर्चा में रही हैं। इन अथार्टियों के अनेक अधिकारी व कर्मचारियों के विरुद्ध घोटालों के आरोप पुलिस में दर्ज हैं और अदालती कार्रवाहियां चल रही हैं।

कुछ मामलों में तो सरकार ने खुद ही सी बी आई के क्षरा जांच करवाये जाने की संस्‍तुस्‍ती की हुई है। लगभग 1468 हैक्‍टेयर जमीन और उसे खरीदने के लिये 4065 करोड राशि का इंतजाम करना मोजूदा हालातों में असंभव नहीं तो मुश्‍किल जरूर है।

टैक्‍स के पैसे के दुरुपयोग को रोकने लिये आवाज उठाया जाना जरूरी

अमृत विद्या -एजूकेशन फार इम्‍मोर्टिलिटी, सोसायटी और आगरा Civil society के जनरल सेकेट्री अनिल शर्मा ने अपनी शिकायत नुमा प्रतिवेदन के साथ कथनों के परिप्रेक्ष्‍य में तमाम प्रमाणिक साक्ष्‍य दिखाते हुए कहा कि ऐसे प्रोजेक्‍ट के लिये प्रदेश के नागरिकों के लिये न तो आधारभूत ढांचागत जरूरतों के संगत है और ना ही उ प्र सरकार की प्राथमिकता का ही। अधिकांश जानकार मानते हैं कि इस प्रोजेक्‍ट के कारण उ प्र शासन को भारी वित्‍तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा और घाटा भरपाई के लिये ऐसे कदम उठाने पड़ सकते हैं जो कि सरकार की लोकप्रियता पर प्रतिकूल असर डालने वाले साबित हो सकते हैं।

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