सुंजवान आर्मी कैंप में ऑपरेशन अब भी जारी: 5 जवान शहीद, 4 आतंकी मार गिराए

जम्मू। जम्मू के सुंजवान आर्मी कैंप में घुसे आतंकियों के खिलाफ चल रहे ऑपरेशन को 29 घंटे से भी ज्यादा का समय बीत चुका है। बताया गया है कि सेना के रिहायशी कैंप में आतंकी छिपे हुए हैं, ऐसे में ऑपरेशन अब भी जारी है। सेना ने कुल 4 आतंकियों को मार गिराया है जबकि 1 या 2 आतंकियों के अब भी छिपे होने की आशंका जताई जा रही है। इस ऑपरेशन में 5 जवान शहीद हो गए हैं, जिनमें 2 जेसीओ शामिल हैं। मुठभेड़ के दौरान एक नागरिक की भी मौत हो गई है। इस ऑपरेशन की निगरानी आर्मी चीफ बिपिन रावत खुद कर रहे हैं। शनिवार देर रात ही वह जम्मू पहुंच गए थे।
रविवार सुबह जम्मू के IGP एसडी सिंह जामवाल ने बताया था कि 3 आतंकवादी मारे जा चुके हैं। सेना पूरा ऐहतियात बरत रही है क्योंकि हर एक जान कीमती है। सेना बहुत ज्यादा नुकसान नहीं चाहती है। उन्होंने कहा, ‘हम जल्द ही ऑपरेशन खत्म करने की स्थिति में पहुंच जाएंगे।’
रात में भी आतंकवादियों ने सैनिकों पर फायरिंग की थी। बताया जा रहा है कि आर्मी कैंप पर हमले को आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के चार से पांच आतंकियों ने अंजाम दिया और अब भी कुछ आतंकवादी कैंप के अंदर ही मौजूद हो सकते हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक आतंकी रुक-रुककर जवानों पर फायरिंग कर रहे हैं।
सेना को मृत आतंकियों के पास से एके-47 और भारी गोला-बारूद बरामद हुआ है। सेना ने कहा है, ‘जब तक सभी आतंकी पकड़े या मारे नहीं जाते, ऑपरेशन चलता रहेगा।’ हमले को देखते हुए समूचे जम्मू शहर में रेड अलर्ट है। आर्मी कैंप के आधे किलोमीटर के दायरे में आने वाले सभी शैक्षणिक संस्थानों को बंद कर दिया गया है। केंद्र सरकार की हालात पर पूरी नजर है।
जानबूझकर रिहायशी इलाके को बनाया निशाना
सुंजवान कैंप के पिछले गेट पर बने बंकर के संतरी ने शनिवार तड़के 4:55 बजे संदिग्ध हरकत देखी। संतरी ने फायर किया तो सेना की वर्दी में 4 से 5 आतंकवादी भारी गोलीबारी करते और ग्रेनेड फेंकते हुए अंदर घुस आए। माना जाता है कि पिछले गेट से अंदर आने के बाद वे पास ही स्थित फौजियों के घरों में अलग-अलग जगह छिप गए। जिस तरह रिहायशी इलाके को निशाना बनाया गया, उससे लगता है कि इनके मंसूबे भारी नुकसान पहुंचाने के थे।
पहले जवानों के परिवारों को निकाला गया
सूचना मिलते ही क्विक रेस्पॉन्स टीम मौके पर पहुंची। आतंकियों की सही स्थिति का पता लगाने के लिए हेलिकॉप्टरों और ड्रोन की मदद ली गई। जिन घरों में आतंकियों के छिपने की आशंका थी, उन्हें घेर लिया गया। फिर बुलेटप्रूफ वाहनों से सैन्यकर्मियों के परिवारों को निकाला गया। शनिवार देर शाम तक सेना ने फौजियों के 150 घरों की तलाशी ली थी। इसी दौरान, 2 जेसीओ के शहीद होने और 6 अन्य के घायल होने की बात सामने आई।
इस आतंकी हमले में सूबेदार मदनलाल चौधरी और सूबेदार मोहम्मद अशरफ मीर शहीद हो गए। घायलों में सेना के मेजर, हवलदार अब्दुल हमीद, लांस नायक बहादुर सिंह और दिवंगत सूबेदार चौधरी की बेटी हैं। घायल मेजर को नाजुक स्थिति में ऊधमपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
शुरुआत में सेना के जनसंपर्क अधिकारी ने बताया था कि हमले के दौरान परिवारों को निकालने में जेसीओ शहीद हुए, जबकि महिला और बच्चे सहित 6 घायल हैं। कैंप की चारदीवारी के बाहर सीआरपीएफ और पुलिसकर्मियों की टुकड़ियां तैनात की गई हैं और आसपास नजर रखी जा रही है। इससे पहले आतंकियों ने 28 जून 2003 में भी इसी आर्मी कैंप पर आत्मघाती हमला किया था, जिसमें 12 जवान शहीद हो गए थे और दो फिदायीन मारे गए थे।
-एजेंसी