केडी हास्पीटल में हर्शप्रंग बीमारी से पीड़ित बच्‍चे का हुआ Operation

मल्टी स्पेशियेलिटी केडी हास्पीटल में डा. श्याम बिहारी शर्मा के नेतृत्व में टीम ने किया Operation

हर्शप्रंग बीमारी से पीडित आठ माह के आर्यन की निष्क्रिय आंत को निकाल कर Operation कर उसे मलाशय से एक बार में ही जोडा

मथुरा। मल्टी स्पेशियेलिटी केडी हास्पीटल में हर्शप्रंग बीमारी से पीडित आठ माह के आर्यन को तीन चरणों में Operation करने के बजाय एक चरण में ही राहत देने में सफलता पाई है। आॅपरेशन के दौरान डा. श्याम बिहारी शर्मा के नेतृत्व में टीम ने निष्क्रिय आंत को निकाल कर उसे मलाशय से जोड दिया गया है। इससे अब आर्यन अगले दिन से ही मलद्वार से ही मल त्याग रहा है। टीम को भरोसा है कि आर्यन को अब आजीवन हर्शप्रंग से परेशानी नहीं होगी। आर्यन के पिता ने बताया कि कई राज्यों में इलाज कराने के बावजूद उसके बेटे को लाभ नहीं हो पा रहा था मगर अब केडी हास्पीटल में कुछ हजार रुपयों के खर्च में ही बेटे आर्यन को पूरा लाभ मिल गया।

Operation-in-KD-Hospital-Ma
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मथुरा निवासी आर्यन के पिता जितेंद्र बोले-आर्यन को लेकर हरियाणा के फरीदाबाद, दिल्ली और भरतपुर आगरा में खूब घूमे, मगर कहीं इलाज नहीं मिला तो कहीं बहुत ही ज्यादा महंगा

मथुरा के गांव बाद, रिफाइनरी निवासी आर्यन के पिता जितेंद्र ने बताया कि वह आर्यन को लेकर हरियाणा के फरीदाबाद, दिल्ली और भरतपुर आगरा में दिखा चुके थे। किसी जगह बीमारी चिकित्सकों के समझ नहीं आई तो कहीं इलाज के नाम पर लाखों रुपयों की मांग की। जबकि केडी हास्पीटल के शिशु शल्य चिकित्सक डा. श्याम बिहारी को ओपीडी में दिखाने के बाद उन्होंने मात्र कुछ ही हजार रुपये के खर्च पर तीन चरणों में होने वाला सफल आॅपरेशन मात्र एक चरण में पूरा कर दिखाया। वह इसे चिकित्सक डा. श्याम बिहारी शर्मा के अनुभव का प्लसप्वाइंट बताते हैं। उन्होंने कहा कि अब उन्हें भरोसा कि आॅपरेशन के बाद आर्यन न तो उल्टी कर रहा है, न ही उसका पेट ही फूल रहा है। वह समय से दूध पीने के बाद मल त्याग कर रहा है। जबकि केडी हास्पीटल की ओपीडी में दिखाने के चार-पांच दिन पूर्व से ही मल त्याग नहीं किया था। इससे उसका पेट फूला हुआ था। आॅपरेशन करने वाली टीम डा. श्याम बिहारी शर्मा के साथ डा. आशुतोष कुमार सिंह, डा. वरुण कुमार सिसौदिया, डा. विक्रम यादव, एनेस्थेटिस्ट डा. मंजू सक्सेना, डा. शहनवाज और सहायक पवन शर्मा आदि मौजूद रहे।

जन्म से पेट फूलने, दूध न पीने को लें गंभीरता से-डा. एसबी शर्मा

मथुरा। शिशु शल्य चिकित्सक डा. श्याम बिहारी शर्मा ने बताया कि हर्शप्रंग बीमारी बडी आंत में गैंगलिओन कोशिका न होने कारण वह निष्क्रिय हो जाती है। इससे पैदा होने बाद से ही बच्चा ठीक से मल त्याग नहीं कर पाता। इस रोग को डेनमार्क के चिकित्सक हर्शप्रंग ने खोजा था। इसके निदान के लिए पहली स्टेज में पेट पर एक मलद्वार बनाना होता है। दूसरी स्टेज में निष्क्रिय आंत को काटकर हटाया जाता है। अंतिम तीसरी स्टेज में पेट पर बनाए मलद्वार को बंद कर यथास्थान से मल चालू कराया जाता है। इसमें खर्चा भी काफी आता है। मगर काटी हुई बडी आंत के हिस्से की जांच से पता चला कि यह आंत खराब थी क्योंकि इस हिस्से में नसों के गुच्छे यानी कि गैंगिलियोन कोशिकाओं का अभाव था, इसी से ये निष्क्रिय थी। जो आंत नीचे लेकर आए वह आंत सही काम कर रही थी। इसी से आॅपरेशन एक ही स्टेज में सफलतापूर्वक पूरा हो गया। ऐसा पैथोलाॅजिस्ट डा. अम्बरीश ने भी भेजे सैम्पिल को सूक्ष्मदर्शी से देखने के बाद पुष्टि की है।

अनुभवी शिशु शल्य चिकित्सा ईकाई का लाभ लें-डा. राम किशोर अग्रवाल

मथुरा। आरके एजुकेशन हब के चैयरमेन डा. राम किशोर अग्रवाल, वाइस चैयरमेन पंकज अग्रवाल और एमडी मनोज अग्रवाल ने कहा कि मल्टी स्पेशियेलिटी केडी हास्पीटल का शिशु शल्य चिकित्सा ईकाई काफी अनुभवी और सक्रिय है। जो जटिल से जटिल बच्चों के आॅपरेशन सहजता से कर रही है। ब्रज के लोगों के अलावा अन्य राज्यों के लोगों को नन्हे मुन्ने ग्वाल वालों की स्वास्थ्य संबंधी परेशानी को दिखाने के लिए केडी हास्पीटल में अवश्य लाएं। यहां एक ही कैम्पस में हर रोगों के विशेषज्ञ चिकित्सक मौजूद हैं। इससे मरीज के स्वस्थ हो जाने की संभावनाएं काफी प्रबल हो जाती हैं। ऐसा हो भी रहा है। रोगों से पीडित और दुखी आए मरीज हंसते मुस्कराते हुए घर की लौट रहे लोग आरके एजुकेशन हब के मूल उद्देश्य को पूरा कर रहा है।

-Legend News

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