कच्चे तेल की कीमतें तय करने में अब OPEC की भूमिका खत्म

हाल के घटनाक्रमों से यह तय हो गया है कि कच्चे तेल की कीमतें तय करने में अब तेल उत्पादक देशों के समूह OPEC की भूमिका खत्म हो गई है। साल 2019 और उसके आगे तेल की कीमत तय करने में अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप, रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन और सऊदी अब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की भूमिका सर्वोपरि होगी। हालांकि यह अलग बात है कि तीनों की सोच अलग है।
OPEC जहां साझा भूमिका को लेकर उलझन में है, वहीं दूसरी तरफ तेल की वैश्विक आपूर्ति पर अमेरिका, रूस और सऊदी अरब का दबदबा हो गया है। तीनों मिलकर ओपेक के 15 सदस्य देशों के बराबर तेल का उत्पादन करते हैं। तीनों देश रिकॉर्ड मात्रा में तेल का उत्पादन कर रहे हैं। हर देश अगले साल उत्पादन में बढ़ोत्तरी कर सकता है, लेकिन वे ऐसा नहीं करेंगे।
सऊदी अरब और रूस ने मिलकर जून में OPEC समूह को उत्पादन कम करने का दबाव डाला। 2017 से ही ओपेक समूह कच्चे तेल का भारी उत्पादन कर रहे था। इसके बाद दोनों देशों ने कच्चे तेल का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर, या रिकॉर्ड के निकट पहुंचा दिया। इसी समय अमेरिका में भी तेल का उत्पादन अप्रत्याशित तरीके से रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
अधिक उत्पादन के कारण जैसे ही तेल की कीमतें गिरनी शुरू हुईं तो सऊदी अरब ने घोषणा कर दी कि वह अगले महीने से तेल उत्पादन में रोजाना पांच लाख बैरल की कटौती करेगा। इस घोषणा का एक तरह से पुतिन ने समर्थन किया, तो ट्रंप ने नाराजगी जताई।
दरअसल, मोहम्मद बिन सलमान को सऊदी अरब की महत्वाकांक्षी योजनाओं के लिए कच्चे तेल से आमद की जरूरत है।
दूसरी तरफ रूस ने अपने कच्चे तेल के उत्पादन में कोई कटौती नहीं करने का संकेत नहीं दिया है। रूस का बजट तेल की आमद पर बेहद कम निर्भर है। पुतिन मोहम्मद बिन सलमान से रिश्ते सुधारने के भी इच्छुक हैं। ऐसे में वह सऊदी अरब की योजना का समर्थन करने से भला क्यों कतराएंगे। पुतिन ने कहा भी है कि कच्चे तेल की कीमत प्रति बैरल 70 डॉलर सही स्तर है।
ट्रंप का विरोध ऐसे वक्त में सामने आया है, जब रूस और सऊदी अरब अपने राजनीतिक संबंध सुधारने में जुटा है। वहीं अमेरिकी सीनेटरों ने यमन में युद्ध छेड़ने और पत्रकार खशोगी की हत्या को लेकर सऊदी अरब पर कड़े प्रतिबंध लगाने पर विचार किया है।
इस तरह सऊदी अरब अगर 2019 में तेल बाजार को संतुलित करने की उम्मीद करता है, तो उसे ट्रंप की नाराजगी, पुतिन के मतभेद और अमेरिका के बूमिंग तेल उद्योग के जोखिम का सामना करना पड़ेगा।
-एजेंसियां

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