ट्रंप और किम की मुलाकात के मात्र 3 दिन बाद फिर बिगड़ी बात

उत्तर कोरिया का कहना है कि किम जोंग-उन और राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के बीच परमाणु मुद्दे पर बातचीत के लिए सहमति बनने के बावजूद अमरीका अपने विपरीत रवैये पर अड़ा है.
बुधवार को संयुक्त राष्ट्र संघ में उत्तर कोरिया के दूत ने कहा कि अमरीका ‘प्रतिबंध लगाने के अपने जुनून पर सवार’ है.
साथ ही इसे कोरियाई प्रायद्वीप में शांति प्रक्रिया को बिगाड़ने की कोशिश बताया गया है.
महज़ तीन दिन पहले रविवार को (30 जून) डोनल्ड ट्रंप उत्तर कोरिया की धरती पर कदम रखने वाले पहले अमरीकी राष्ट्रपति बने और उत्तर कोरिया के अपने समकक्ष किम जोंग-उन के साथ क़रीब एक घंटे तक बातचीत की जिसके बाद दोनों ने रुके हुए परमाणु निरस्त्रीकरण की तरफ़ दोबारा लौटने पर अपनी सहमति जताई.
लेकिन अब उत्तर कोरिया के इस बयान के बाद निश्चित ही एक बार फिर दोनों देशों के तल्ख़ रिश्तों की ओर वापसी के आसार हैं.
उत्तर कोरिया ने क्या कहा?
उत्तर कोरियाई दूत ने कहा कि वह अमरीकी दूत के उस आरोप का जवाब दे रहे थे जिसमें अमरीकी दूत ने कहा था कि उत्तर कोरिया ने 2017 में तय की गई पेट्रोलियम आयात की सीमा का उल्लंघन किया है.
उन्होंने यह भी कहा कि वो उत्तर कोरिया पर अतिरिक्त प्रतिबंध की मांग को लेकर अमरीका, फ़्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन के संयुक्त राष्ट्र संघ को लिखे संयुक्त पत्र (जॉइंट लेटर) का जवाब भी दे रहे थे.
इस जॉइंट लेटर में सभी सदस्यों से प्रवासी उत्तर कोरियाई कामगारों को उनके घर वापस भेजे जाने की अपील की गई है.
इस बयान में कहा गया है, “जिस बात को नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता, वो यह है कि जॉइंट लेटर का खेल खेला गया… और वो भी उसी दिन जब दूसरी तरफ़ राष्ट्रपति ट्रंप एक शिखर वार्ता का प्रस्ताव रख रहे थे.”
यह भी कहा गया कि व्यावहारिक रूप से यह अमरीका के दोहरे रवैये को दर्शाता है, जो उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ विरोधी रुख़ है.
इसमें कहा गया है कि, “संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों को कोरियाई प्रायद्वीप पर शांतिपूर्ण माहौल बिगाड़ने की सोची समझी गई इन अमरीकी कोशिशों के प्रति सतर्क रहना होगा.”
उत्तर कोरिया ने कहा कि ‘सभी समस्याओं के लिए रामबाण’ के रूप में प्रतिबंधों का इस्तेमाल करना ‘काफ़ी हास्यास्पद’ है.
उत्तर कोरिया के इस बयान पर अभी अमरीकी प्रतिक्रियाएं नहीं आई हैं.
कैसे हैं अमरीका-उत्तर कोरिया के रिश्ते?
बीते महीने ही अमरीका ने उत्तर कोरिया के एक मालवाहक समुद्री जहाज़ को यह कहते हुए ज़ब्त किया था कि इसने अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों का उल्लंघन किया है.
इसी साल फ़रवरी में अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के बीच असफल मुलाक़ात हुई थी.
अमरीका उत्तर कोरिया से उसके परमाणु कार्यक्रमों को बंद करने के लिए कह रहा था जबकि उत्तर कोरिया ने उस पर लगे प्रतिबंधों में छूट देने की मांग की थी.
उत्तर कोरिया ने अमरीका पर दबाव बनाने की रणनीति के तहत मई के महीने में ही पांच दिनों के भीतर दो बार मिसाइल परीक्षण भी किया था.
जबकि अमरीका ने उत्तर कोरिया के परमाणु हथियार और मिसाइल परीक्षणों के चलते ही उस पर कई तरह के अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंध लगा रखे हैं.
बीते वर्ष कोरियाई शासक किम जोंग-उन और अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के बीच सिंगापुर में परमाणु निरस्त्रीकरण को लेकर ही मुलाकात हुई थी.
दोनों कोरियाई प्रायद्वीप को पूरी तरह से परमाणु हथियार मुक्त बनाने पर सहमत भी हुए थे, हालांकि इस बारे में विस्तार से तब कुछ नहीं बताया गया था.
फ़रवरी में हनोई में जब दोनों के बीच बातचीत असफल हो गयी तो उसके बाद से दोनों के बीत वार्ता ठप हो गयी थी. वैसे दोनों के बीच पत्र के माध्यम से बात चलती रही.
रविवार को हुई तीसरी मुलाक़ात को सौहार्दपूर्ण बताया जा रहा था क्योंकि कभी किम को छोटा रॉकेट मैन कहने वाले ट्रंप ने इस मुलाकात के बाद दुनिया के लिए इसे बहुत बड़ा दिन बताया था.
-BBC

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »