एक रुपया-एक ईंंट का उदाहरण किसी और राजा में नहीं: गौरदास

आगरा। एक रुपया एक ईंट देकर अपने भाइयों को बसाने का जो काम महाराजा अग्रसेन के शासन में हुआ था ऐसा कोई उदाहरण पूरे विश्व में दूसरा नहीं मिलता। महाराज अग्रसेन की शासन में जब भी कोई नया आदमी उनके राज्य में बसने के लिए आता था, तो पूरे राज्य के एक लाख लोग एक रुपये एक ईंट उसे देते थे। ये कहना था लोहामंडी स्थित महाराजा अग्रसेन भवन के स्थापना दिवस पर अग्रसेन चरित्र का वर्णन करते हुए कथावाचक गौरदास जी महाराज का । महाराजा अग्रसेन सेवा समिति की ओर से आयोजित हुए अग्रसेन के पावन चरित्र कार्यक्रम का शुभारम्भ अध्यक्ष सतीश मांगलिक, महासचिव डॉ० बी०डी० अग्रवाल, मोहनलाल सर्राफ, उपाध्यक्ष दिनेश बंसल कातिब, महावीर मंगल, कोषाध्यक्ष घनश्याम दास अग्रवाल तथा जगदीश प्रसाद बगला ने महाराजा अग्रसेन जी के चित्र पर माल्यार्पण कर किया ।

अध्यक्ष सतीश मांगलिक ने बताया कि महाराजा अग्रसेन भवन के स्थापना दिवस के अवसर पर प्रातः 10 बजे वैदिक मंत्रोचार से हवन-यज्ञ किया गया । सांय 4 बजे से महाराजा अग्रसेन जी के जीवन चरित्र की कथा में वृन्दावन से आये प्रख्यात कथावाचक गौरदास महाराज ने अपने मुखारबिंद से सभी को सुनाई गयी । सभी ने अग्रसेन जी के पथ पर चलने का प्रण लिया ।

गौरदास महाराज ने बताया कि महाराजा अग्रसेन का विवाह नागराज कन्या माधवी से हुआ था। माधवी बहुत सुंदर कन्या थी। उनके लिए स्वयंबर रखा गया था, जिसमे राजा इंद्र ने भी भाग लिया था, लेकिन कन्या ने अग्रसेन को चुना, जिससे राजा इंद्र को अपमान महसूस हुआ और उन्होंने प्रताप नगर में अकाल की स्थिती निर्मित कर दी, जिसके कारण राजा अग्रसेन ने इंद्र देव पर आक्रमण किया। इस अवसर पर प्रमुख रूप से मुरारी प्रसाद अग्रवाल, राम रतन मित्तल, ओपी गोयल, मुन्ना लाल बंसल, फूलचंद बंसल, सुभाष चंद्र अग्रवाल, प्रेमचंद्र अग्रवाल आदि मौजूद रहे ।

कैसे हुई अग्रोहा धाम की स्थापना
गौरदास महाराज ने बताया कि महाराज अग्रसेन प्रताप नगर के राजा थे। राज्य खुशहाली से चल रहा था। समृद्धि की इच्छा लेकर अग्रसेन ने तपस्या में अपना मन लगाया, जिसके बाद माता लक्ष्मी ने उन्हें दर्शन दिये और उन्होंने अग्रसेन को एक नवीन विचारधारा के साथ वैश्य जाति बनाने एवम एक नया राज्य रचने की प्रेरणा दी, जिसके बाद राजा अग्रसेन एवम रानी माधवी ने पूरेे देश की यात्रा की और अपनी समझ के अनुसार अग्रोहा राज्य की स्थापना की।

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