इंदौर में कोरोना संक्रमित एक और डॉक्‍टर की मौत, डर से 50 डॉक्‍टर्स ने दिया इस्‍तीफा

भोपाल। कोरोना अब इंदौर में जानलेवा होने लगा। देश की अन्य शहरों की तुलना में यह मौत की रफ्तार ज्यादा है। देश में पहली बार कोरोना से गुरुवार को इंदौर में एक डॉक्टर की मौत हुई। शुक्रवार को भी इंदौर के ही अरबिंदो अस्पताल में डॉक्टर ओमप्रकाश चौहान की मौत हो गई है।
बताया जा रहा है कि डॉ. चौहान इंदौर के मरीमाता इलाके में क्लीनिक चलाते थे। तबियत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। 3 दिन पहले ही जांच के बाद उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। शुक्रवार को अरबिंदों के आईसीयू में उन्होंने अंतिम सांस ली। डॉ. ओमप्रकाश चौहान शुगर और बीपी के पेशेंट थे। जानकारी के अनुसार वह लॉक डाउन के दौरान भी अपना क्लीनिक चला रहे थे। इंदौर में कोरोना से शुक्रवार को कुल 4 मौत हुई है।
संक्रमण कैसे
इंदौर में 2 दिन में 2 डॉक्टरों की मौत हुई है। दोनों क्लीनिक चलाते थे, ऐसे में प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चिंता की विषय यह है कि आखिर इन डॉक्टरों को कोरोना हुआ कैसे। क्या क्लीनिक में ये कोरोना संक्रमित के संपर्क में आए क्योंकि वहां स्क्रीनिंग की तो कोई व्यवस्था नहीं थी। ऐसे प्रशासन उन लोगों की हिस्ट्री भी निकाल सकती है जिनके संपर्क में ये डॉक्टर आए थे। डॉ. चौहान पहले सुयश अस्पताल में भर्ती हुए थे, तबियत में सुधार नहीं होने पर उन्हें अरबिंदो में लाया गया था।
डॉ. पंजवानी की मौत
देश में सबसे पहले इंदौर में ही कोरोना से डॉक्टर की मौत हुई है। डॉ. पंजवानी की रिपोर्ट भी 2 दिन पहले ही कोरोना पॉजिटिव आई थी। शहर में कोरोना संक्रमण के बावजूद वह प्राइवेट क्लीनिक चला रहे थे, साथ ही कोई एहतियात भी नहीं बरत रहे थे। इन्हें लेकर पूर्व में कई अफवाह भी उड़ी थी कि ये कोरोना संक्रमित हैं, बाद में वीडियो जारी कर कहा था कि मैं पूरी तरह से फिट हूं।
शव यात्रा में 5 लोग होंगे शामिल
इंदौर में बढ़ते संक्रमण के मामले को देखते हुए इंदौर कलेक्टर मनीष सिंह ने फैसला किया है कि शव यात्रा या किसी के जनाजे में अब पांच से ज्यादा लोग नहीं जाएंगे। उन्होंने कहा कि टाटपट्टी बाखल में अगर 20 केस मिले हैं तो वह जनाजे निकलने की वजह से ही है। क्षेत्र के लोग अब खतरे में हैं। कलेक्टर ने यह भी आदेश दिया है कि अब अस्पताल में किसी भी व्यक्ति की मौत होती है तो वह सीधे अब शमशान या कब्रिस्तान जाएगा। चाहे मृत्यु किसी भी वजह से क्यों न हुई हो।
खौफ, 50 डॉक्टरों ने दिया इस्तीफा
ग्वालियर। कोरोना के खौफ में ग्वालियर जिले के 50 डॉक्टर्स ने एक साथ इस्तीफा दे दिया है। बताया जा रहा है कि कोरोना की वजह से पहले इन सभी लोगों ने इस्तीफा दे दिया है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। हालांकि राज्य में एस्मा लागू है, इसे लागू होने के बाद जरूरी सेवाओं से जुड़े लोग ड्यूटी से पीछे नहीं हट सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन लोगों ने पहले ही इस्तीफा दे दिया था।
कोरोना के कारण ग्वालियर के गजराजा मेडिकल कॉलेज में तीन महीने के लिए 92 डॉक्टरों की नियुक्ति की गई थी। ये सभी 92 लोग जीआर मेडिकल कॉलेज से पासआउट थे। इनकी नियुक्ति अलग-अलग विभागों में अस्थाई रूप से की गई थी। प्रदेश को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग ने गजराजा मेडिकल सहित प्रदेश के दूसरे मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस इंटर्न करने वालों को अस्थाई रूप से नियुक्ति का आदेश दिए थे।
92 ने किया था ज्वाइन
गजराजा मेडिकल कॉलेज में 114 लोगों की संविदा पर नियुक्ति हुई थी जिनमें से 92 लोगाें ने ही ज्वाइन किए। संविदा पर नियुक्त इन डॉक्टरों की ड्यूटी सुपर स्पेशलिटी और आइसोलेशन वार्ड में लगाई गई थी। 50 इस्तीफा देकर चले गए हैं। संविदा पर नियुक्त 42 डॉक्टर ही यहां बचे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में मरीजों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
ड्यूटी से हटे
वहीं, एक स्थानीय अखबार से बात करते हुए इस्तीफा देने वाले डॉक्टरों ने कहा कि पहले उन लोगों ने कोरोना ड्यूटी के लिए स्वीकृति दी थी। बाद में आदेश आया कि जिनकी मर्जी हैं, वो कोरोना ड्यूटी करें या फिर अलग हो जाएं। इसके बाद हम लोगों ने इस्तीफा दे दिया। डॉक्टरों ने यह भी कहा कि हम यहां के लोकर हैं, अगर कोरोना संक्रमितों का इलाज करेंगे तो इसका असर हमारे परिवार पर पड़ेगा।
एस्मा से पहले दिया इस्तीफा
जीआरएमसी मेडिकल कॉलेज के डीन ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि इस्तीफा देने वाले डॉक्टरों को तीन महीने की नियुक्ति दी गई थी। ये सभी लोग एमबीबीएस हैं। वहीं, जब उनसे एस्मा के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि डॉक्टरों ने प्रदेश में एस्मा लागू होने से पहले ही इस्तीफा भेज दिया था।
-एजेंसियां

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