100 मुस्‍लिम हस्‍ती Ayodhya पर पुनर्विचार याचिका के विरोध में

मुंबई। शबाना आजमी, नसीरूद्दीन शाह समेत अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाली देशभर से तकरीबन 100 मुस्लिम हस्तियों ने Ayodhya विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती देने का विरोध किया है। इनका कहना है कि Ayodhya विवाद को कायम रखने से सिर्फ मुस्लिमों को ही नुकसान होगा। पुनर्विचार याचिका का विरोध करने वालों में स्कॉलर, एक्टिविस्ट, वकील, पत्रकार, बिजनेसमैन, कवि, एक्टर, फिल्ममेकर और थिएटर पर्सनैलिटी शामिल हैं। इन सभी ने पुनर्विचार याचिका के खिलाफ हस्‍ताक्षर किए हैं।
अपने बयान में इन्होंने कहा है कि Ayodhya विवाद के फैसले पर पुनर्विचार याचिका सिर्फ नुकसान पहुंचाएगी, मदद नहीं करेगी। इस बयान में यह भी कहा गया है कि वे इस तथ्य पर भारतीय मुस्लिम समुदाय, संवैधानिक विशेषज्ञों और धर्मनिरपेक्ष संगठनों की नाखुशी साझा करते हैं कि सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कानून से ऊपर आस्था को रखा है।
नसीरूद्दीन शाह, शबाना आजमी समेत 100 हस्तियां
बयान पर हस्ताक्षर करने वालों में फिल्म अभिनेता नसीरूद्दीन शाह, शबाना आजमी, सामाजिक कार्यकर्ता आरिज मोहम्मद, वकील ए जे जावेद, लेखक व स्तंभकार अब्दुल कादेर मुकदम, संगीतकार अफाक आजाद, पत्रकार आफताब खान, होटल व्यवसायी और एक्टिविस्ट अफजल पटेल, फिल्म लेखक अंजुम राजाबाली, बिजनेसमैन आरिफ कपाड़िया जैसे लोग अन्य शामिल हैं।
‘अपने कड़वे अनुभवों से कुछ नहीं सीखा’
अपनी अपील में इन्होंने कहा है, ‘हम साथी मुसलमानों से आग्रह करते हैं कि वे इस पर मंथन करें कि तीन दशक से ज्यादा पुराने Ayodhya के रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में क्या हासिल हुआ और क्या खोया है?
क्या इसका मतलब एक तरफ मुस्लिमों की जान और संपत्ति का नुकसान और दूसरी तरफ संघ परिवार की राजनीति को बढ़ावा देना नहीं है?
क्या हमने किसी सांप्रदायिक संघर्ष से मिले कड़वे अनुभवों से कुछ नहीं सीखा है, वह मुस्लिम ही है जो कीमत चुकाता है।’
इस विवाद से दूर रहें
इसमें आगे लिखा है, ‘कई लोगों ने मुस्लिमों को आगे बढ़ने की सलाह दी है। हमारी अपने साथी मुसलमानों से अपील है कि इस मंदिर-मस्जिद विवाद से दूर हो जाएं क्योंकि इससे सिर्फ संघ परिवार के असली एजेंडे को छिपाने में मदद मिलेगी। कोर्ट में विवाद को जारी रखना मुस्लिम विरोधी प्रॉपेगैंडा और इस्लामोफोबिया को बढ़ाएगा और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण होगा।
दूसरी तरफ इस मामले को आगे न बढ़ाने से मुस्लिमों को बहुसंख्यक समुदाय के धर्मनिरपेक्ष लोगों की सद्भावना और सहानुभूति मिलेगी। यह समुदाय और देश के सर्वोत्तम हित में होगा।’
पुनर्विचार याचिका का निर्णय
बता दें कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार याचिका दायर करने का निर्णय लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए विवादित 2.7 एकड़ जमीन रामलला विराजमान को दे दी। वहीं मस्जिद बनाने के लिए पांच एकड़ जमीन सुन्नी वक्फ बोर्ड को देने का आदेश भी दिया था।
-एजेंसियां

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